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FIFA: भारत को विश्व कप में खेलते देखना चाहते हैं श्याम थापा, बताया किस तरह बन सकते हैं एशिया की शीर्ष टीम
Tue, 07 Jul 2026 08:41 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
एन. अर्जुन, कोलकाता
एन. अर्जुन, कोलकाता
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Tue, 07 Jul 2026 08:41 PM IST
सार
दुनिया भर में फीफा विश्व कप का जुनून जारी है। इस बीच, भारतीय फुटबॉल टीम के दिग्गज श्याम थापा का कहना है कि उनका सपना एक दिन भारत को इस वैश्विक टूर्नामेंट में खेलते देखने का है। श्याम थापा ने अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत की, आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा...
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श्याम थापा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
फीफा विश्व कप 2026 में छोटे-छोटे देशों को दुनिया की बड़ी फुटबॉल ताकतों को कड़ी चुनौती देते देख भारतीय फुटबॉल के दिग्गज और 'बाइसिकल किक' के बादशाह श्याम थापा की आंखों में भी एक पुराना सपना फिर से जीवंत हो उठा है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी ख्वाहिश है कि एक दिन भारत भी फीफा विश्व कप में खेले।
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श्याम थापा बोले- बड़ा नाम ही जीत की गारंटी नहीं
श्याम थापा ने कहा कि जिस भारत फीफा विश्व कप में खेलेगा, वह भारतीय फुटबॉल के इतिहास का सबसे बड़ा दिन होगा। भारतीय फुटबॉल के स्वर्णिम दौर के अहम खिलाड़ी रहे श्याम थापा का मानना है कि इस विश्व कप ने साबित कर दिया है कि अब केवल बड़े नाम ही जीत की गारंटी नहीं हैं। उन्होंने कहा, छोटे देशों ने जिस आत्मविश्वास, अनुशासन और रणनीति के साथ प्रदर्शन किया है, उसने फुटबॉल की तस्वीर बदल दी है। यही देखकर उम्मीद बंधती है कि भारत भी सही दिशा में काम करे तो विश्व कप तक पहुंच सकता है।
श्याम थापा ने कहा कि जिस भारत फीफा विश्व कप में खेलेगा, वह भारतीय फुटबॉल के इतिहास का सबसे बड़ा दिन होगा। भारतीय फुटबॉल के स्वर्णिम दौर के अहम खिलाड़ी रहे श्याम थापा का मानना है कि इस विश्व कप ने साबित कर दिया है कि अब केवल बड़े नाम ही जीत की गारंटी नहीं हैं। उन्होंने कहा, छोटे देशों ने जिस आत्मविश्वास, अनुशासन और रणनीति के साथ प्रदर्शन किया है, उसने फुटबॉल की तस्वीर बदल दी है। यही देखकर उम्मीद बंधती है कि भारत भी सही दिशा में काम करे तो विश्व कप तक पहुंच सकता है।
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फिटनेस को बताया महत्वपूर्ण
थापा ने आधुनिक फुटबॉल में फिटनेस को सबसे बड़ा हथियार बताया। उनके अनुसार आज की फुटबॉल केवल कौशल का नहीं, बल्कि गति, सहनशक्ति, तकनीक और टीमवर्क का खेल बन चुकी है। अगर खिलाड़ी शारीरिक रूप से सर्वश्रेष्ठ नहीं होगा तो शीर्ष स्तर पर टिकना मुश्किल है। उन्होंने भारतीय फुटबॉल के गौरवशाली अतीत को याद करते हुए कहा कि एक समय भारत एशिया की मजबूत टीमों में गिना जाता था और जापान जैसी टीम को भी हराने का दम रखता था। प्रतिभा आज भी हमारे पास है, लेकिन उसे सही प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और लगातार अवसर देने की जरूरत है।
थापा ने आधुनिक फुटबॉल में फिटनेस को सबसे बड़ा हथियार बताया। उनके अनुसार आज की फुटबॉल केवल कौशल का नहीं, बल्कि गति, सहनशक्ति, तकनीक और टीमवर्क का खेल बन चुकी है। अगर खिलाड़ी शारीरिक रूप से सर्वश्रेष्ठ नहीं होगा तो शीर्ष स्तर पर टिकना मुश्किल है। उन्होंने भारतीय फुटबॉल के गौरवशाली अतीत को याद करते हुए कहा कि एक समय भारत एशिया की मजबूत टीमों में गिना जाता था और जापान जैसी टीम को भी हराने का दम रखता था। प्रतिभा आज भी हमारे पास है, लेकिन उसे सही प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और लगातार अवसर देने की जरूरत है।
श्याम थापा का मानना है कि भारतीय फुटबॉल को दोबारा ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए सरकार और अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) को दीर्घकालिक रणनीति बनानी होगी। जमीनी स्तर पर अकादमियों का विस्तार, प्रशिक्षकों की गुणवत्ता, युवा खिलाड़ियों में निवेश और पूर्व खिलाड़ियों के अनुभव का उपयोग भविष्य की सफलता की कुंजी हो सकता है।
दुनिया के दो महानतम खिलाड़ियों पेले और डिएगो माराडोना के साथ मैदान साझा कर चुके श्याम थापा ने कहा कि ऐसे खिलाड़ियों के खिलाफ खेलना उनके करियर की अमूल्य स्मृतियों में शामिल है। वहीं, अपनी पहचान बन चुकी 'बाइसिकल किक' पर उन्होंने कहा, यह जितनी आसान दिखती है, उतनी होती नहीं। इसके लिए सटीक टाइमिंग, संतुलन, साहस और वर्षों का अभ्यास चाहिए। भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं, जरूरत केवल दूरदृष्टि, निरंतर निवेश और मजबूत फुटबॉल संस्कृति विकसित करने की है। तभी भारत को विश्व कप के मंच पर खेलते देखने का सपना एक दिन साकार हो सकेगा।
दुनिया के दो महानतम खिलाड़ियों पेले और डिएगो माराडोना के साथ मैदान साझा कर चुके श्याम थापा ने कहा कि ऐसे खिलाड़ियों के खिलाफ खेलना उनके करियर की अमूल्य स्मृतियों में शामिल है। वहीं, अपनी पहचान बन चुकी 'बाइसिकल किक' पर उन्होंने कहा, यह जितनी आसान दिखती है, उतनी होती नहीं। इसके लिए सटीक टाइमिंग, संतुलन, साहस और वर्षों का अभ्यास चाहिए। भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं, जरूरत केवल दूरदृष्टि, निरंतर निवेश और मजबूत फुटबॉल संस्कृति विकसित करने की है। तभी भारत को विश्व कप के मंच पर खेलते देखने का सपना एक दिन साकार हो सकेगा।