Explainer: मिस्र के कोच ने क्यों बनाया 'X' का साइन? जानें फुटबॉल में इसके मयाने क्या और इस विवाद की पूरी कहानी
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अर्जेंटीना से 3-2 से हार के बाद मिस्र के कोच होसाम हसन ने रेफरी के फैसलों के विरोध में फीफा का आधिकारिक 'नो रेसिज्म' (X) जेश्चर बनाया। रेफरी ने इस साइन का गलत इस्तेमाल और अंपायरिंग का आक्रामक विरोध मानते हुए उन्हें तुरंत पीला कार्ड दिखा दिया।
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बीच मैदान पर कोच हसन अचानक रेफरी के सामने अपनी बाहें क्रॉस करके 'X' का साइन बनाने लगे। आमतौर पर यह जेश्चर नस्लवाद के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने के लिए बनाया जाता है, लेकिन रेफरी लेटेक्सियर ने इसे देखते ही तुरंत अपनी जेब से निकालकर कोच हसन को यलो कार्ड थमा दिया। आइए जानते हैं आखिर मैदान पर क्या हुआ था और फीफा का असल नियम क्या कहता है...
इस ऐतिहासिक नॉकआउट मैच में मिस्र की टीम शुरुआत से ही हावी थी और उसने दिग्गज अर्जेंटीना के खिलाफ 2-0 की मजबूत बढ़त बना ली थी। मैच में असली मोड़ तब आया जब मिस्र के खिलाड़ी मोस्तफा जिको ने एक और गोल दागा। इस गोल के होते ही मिस्र की जीत पक्की लग रही थी, लेकिन तभी वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) ने हस्तक्षेप किया और मूव की शुरुआत में एक कथित फाउल का हवाला देकर मिस्र के इस महत्वपूर्ण गोल को रद्द कर दिया।
इस बड़े फैसले के बाद अर्जेंटीना ने खेल में जबरदस्त वापसी की और आखिरी 14 मिनटों में क्रिस्टियन रोमेरो, लियोनल मेसी और एंजो फर्नांडीज के बैक-टू-बैक गोल की बदौलत मैच 3-2 से अपने नाम कर लिया। मैच के अंतिम क्षणों में मोहम्मद सालाह पर हुए एक कथित फाउल पर जब रेफरी ने पेनल्टी देने से मना कर दिया, तो कोच होसाम हसन अपना आपा खो बैठे।
फीफा ने साल 2024 में नस्लवाद और अभद्र भाषा के खिलाफ जीरो-टोलरेंस नीति के तहत आधिकारिक तौर पर 'X' जेश्चर को मान्यता दी थी। फीफा के आधिकारिक नियमों के मुताबिक-
- मैच रोकना (स्टेप-1): यदि कोई खिलाड़ी या स्टाफ नस्लीय दुर्व्यवहार का शिकार होता है, तो वह दोनों बाहें क्रॉस कर 'X' का साइन बनाएगा। इसे देखते ही रेफरी मैच को तुरंत रोक देगा और स्टेडियम में चेतावनी की घोषणा होगी।
- मैच का निलंबन (स्टेप-2): यदि दुर्व्यवहार जारी रहता है, तो रेफरी मैच निलंबित कर दोनों टीमों को ड्रेसिंग रूम भेज देगा।
- मैच रद्द करना (स्टेप-3): स्थिति न सुधरने पर मैच पूरी तरह रद्द कर दिया जाता है।
इस नियम का इस्तेमाल करने का एक बहुत ही बड़ा और ऐतिहासिक उदाहरण हाल ही में 2024 के महिला अंडर-20 विश्व कप के दौरान सामने आया था, जब इतिहास में पहली बार आधिकारिक तौर पर इस नियम के तहत मैच को रोका गया था। यह घटना पूरी दुनिया में फीफा के 'थ्री स्टेप प्रोटोकॉल' का सबसे सटीक उदाहरण है। आइए उस मैच के बारे में जानते हैं-
ब्राजील बनाम कैमरून मैच (सितंबर 2024) में क्या हुआ था?
कोलंबिया में खेले जा रहे अंडर-20 महिला विश्व कप के राउंड ऑफ 16 मैच के दौरान ब्राजील और कैमरून की टीमें आमने-सामने थीं। मैच के दौरान कैमरून के प्रशंसकों की तरफ से ब्राजील की महिला खिलाड़ियों पर स्टैंड्स से लगातार नस्लीय टिप्पणियां की जा रही थीं।
- साइन का इस्तेमाल: ब्राजील की खिलाड़ियों ने तुरंत बीच मैदान पर अपनी दोनों बाहों को क्रॉस करके 'X' का साइन बनाया और रेफरी को इसकी जानकारी दी।
- नियम के तहत एक्शन (स्टेप-1): रेफरी ने इस जेश्चर को देखते ही फीफा के नए नियम के तहत मैच को तुरंत रोक दिया। इसके बाद स्टेडियम के लाउडस्पीकर पर आधिकारिक घोषणा की गई कि यदि नस्लीय व्यवहार तुरंत बंद नहीं हुआ, तो मैच को सस्पेंड कर दिया जाएगा और टीमों को ड्रेसिंग रूम में भेज दिया जाएगा।
- प्रेस कॉन्फ्रेंस और मैच रिपोर्ट्स के मुताबिक, रेफरी लेटेक्सियर ने कोच होसाम हसन को नस्लवाद विरोधी साइन बनाने की सजा नहीं दी, बल्कि इस वॉर्निंग साइन का गलत इस्तेमाल करने के लिए बुक किया था।
- भ्रष्टाचार और पक्षपात का आरोप: मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि होसाम हसन ने किसी नस्लवादी घटना की रिपोर्ट करने के लिए 'X' नहीं बनाया था। उनका आरोप था कि फीफा और रेफरी जानबूझकर 'बड़ी टीम' (अर्जेंटीना) और लियोनल मेसी को टूर्नामेंट में बनाए रखने के लिए उनके साथ नाइंसाफी कर रहे हैं।
- अंपायरिंग का आक्रामक विरोध: खेल के नियमों के तहत, तकनीकी क्षेत्र से बाहर निकलकर रेफरी के फैसलों का सार्वजनिक रूप से मजाक उड़ाना या उनके खिलाफ आक्रामक विरोध प्रदर्शन करना 'डिसेंट' की श्रेणी में आता है, जिसके लिए सीधे यलो कार्ड दिखाने का नियम है।
- क्या वाकई नस्लभेदी टिप्पणी हुई: हालांकि, कुछ फैंस का मानना है कि मिस्र के कोच के खिलाफ नस्लभेदी टिप्पणी हुई थी। हालांकि, अभी तक इसकी कोई पुष्टि नहीं हो सकी है। कुछ फैंस का कहना है कि टिप्पणी हुई हो या नहीं हुई हो, लेकिन रेफरी ने जब वो साइन देखा तो उन्हें पहले मैच रोककर मामला जानना चाहिए था, जो कि थ्री स्टेप प्रोटोकॉल के तहत आता है। पर इसके अलट मिस्र के कोच को यलो कार्ड दिखाकर मैच जारी रखा गया।
- ब्राजील मैच में: खिलाड़ियों ने इस साइन का इस्तेमाल सच्चे नस्लवाद को रिपोर्ट करने के लिए किया था, जैसा कि फीफा के नियम की मूल भावना है। इसलिए वहां मैच तुरंत रोका गया और दोषियों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
- होसाम हसन के मामले में: ऐसा माना जा रहा है कि मिस्र के कोच के खिलाफ स्टैंड से या खिलाड़ियों द्वारा कोई नस्लवाद नहीं हो रहा था। उन्होंने सिर्फ अंपायर के फैसलों (VAR और फाउल) से नाराज होकर रेफरी पर 'भेदभाव' का आरोप लगाने के लिए इस साइन का इस्तेमाल किया। यही कारण है कि वहां मैच रोकने के बजाय खुद कोच को ही पीला कार्ड दिखा दिया गया। पर ये फैसला थ्री स्टेप प्रोटोकॉल पर भी सवाल खड़े करता है।