{"_id":"6a67370ee6d35102e00cf011","slug":"savita-reveals-how-indian-women-s-hockey-team-sacrificed-favourite-foods-for-world-cup-glory-2026-07-27","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Hockey: क्या विश्वकप और एशियाड में पदक के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम ने मिठाई तक छोड़ दी? सविता ने किया खुलासा","category":{"title":"Hockey","title_hn":"हॉकी","slug":"hockey"}}
Hockey: क्या विश्वकप और एशियाड में पदक के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम ने मिठाई तक छोड़ दी? सविता ने किया खुलासा
Mon, 27 Jul 2026 04:17 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Mon, 27 Jul 2026 04:17 PM IST
सार
भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान सविता पूनिया ने बताया कि विश्व कप, एशियाई खेल और लॉस एंजिलिस ओलंपिक की तैयारी के लिए खिलाड़ियों ने मिठाई, चॉकलेट और फास्ट फूड से पूरी तरह दूरी बना ली है। उन्होंने कहा कि अब यह अनुशासन मजबूरी नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की आदत और लक्ष्य बन चुका है।
विज्ञापन
भारतीय महिला हॉकी टीम
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारतीय महिला हॉकी टीम विश्व कप, एशियाई खेलों और लॉस एंजिलिस ओलंपिक जैसे बड़े टूर्नामेंटों को ध्यान में रखते हुए किसी भी तरह की कमी नहीं छोड़ना चाहती। यही वजह है कि खिलाड़ियों ने अपनी फिटनेस को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मिठाई, चॉकलेट, केक और फास्ट फूड जैसी पसंदीदा चीजों से पूरी तरह दूरी बना ली है। टीम की अनुभवी गोलकीपर और पूर्व कप्तान सविता पूनिया का कहना है कि यह त्याग अब किसी नियम की वजह से नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की अपनी इच्छा से हो रहा है।
विज्ञापन
'अब ट्रेनर को नजर रखने की जरूरत नहीं पड़ती'
सविता ने बताया कि टोक्यो ओलंपिक 2020 से पहले फिटनेस ट्रेनर वेन लोम्बार्ड खिलाड़ियों पर कड़ी नजर रखते थे, ताकि कोई मीठा या जंक फूड न खा ले। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा, 'टोक्यो ओलंपिक के समय भी वेन लोम्बार्ड ही ट्रेनर थे। वह जितने अच्छे ट्रेनर हैं, उतने ही फिटनेस को लेकर सख्त भी हैं। उन्होंने हमारे लिए बहुत ऊंचे मानदंड तय किए हैं। उनका मानना है कि अगर कुछ बड़ा हासिल करना है तो उसके लिए कुछ त्याग करना ही पड़ेगा।'
सविता ने बताया कि अब टीम की मानसिकता इतनी बदल चुकी है कि किसी को खिलाड़ियों पर नजर रखने की जरूरत नहीं पड़ती। सविता ने कहा, 'उन्होंने सबसे पहले चीनी बंद करवाई। मीठा या फास्ट फूड किचन में होता ही नहीं था। अभी भी कुछ नहीं बदला है। हाल ही में न्यूजीलैंड में एफआईएच नेशंस कप जीतने के बाद विजेता टीम के लिए केक मंगवाया गया था, लेकिन हम सभी हंस रहे थे कि इसे खाना तो है नहीं।'
सविता ने बताया कि टोक्यो ओलंपिक 2020 से पहले फिटनेस ट्रेनर वेन लोम्बार्ड खिलाड़ियों पर कड़ी नजर रखते थे, ताकि कोई मीठा या जंक फूड न खा ले। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा, 'टोक्यो ओलंपिक के समय भी वेन लोम्बार्ड ही ट्रेनर थे। वह जितने अच्छे ट्रेनर हैं, उतने ही फिटनेस को लेकर सख्त भी हैं। उन्होंने हमारे लिए बहुत ऊंचे मानदंड तय किए हैं। उनका मानना है कि अगर कुछ बड़ा हासिल करना है तो उसके लिए कुछ त्याग करना ही पड़ेगा।'
सविता ने बताया कि अब टीम की मानसिकता इतनी बदल चुकी है कि किसी को खिलाड़ियों पर नजर रखने की जरूरत नहीं पड़ती। सविता ने कहा, 'उन्होंने सबसे पहले चीनी बंद करवाई। मीठा या फास्ट फूड किचन में होता ही नहीं था। अभी भी कुछ नहीं बदला है। हाल ही में न्यूजीलैंड में एफआईएच नेशंस कप जीतने के बाद विजेता टीम के लिए केक मंगवाया गया था, लेकिन हम सभी हंस रहे थे कि इसे खाना तो है नहीं।'
विज्ञापन
विज्ञापन
'अब मिठाई लॉस एंजिलिस ओलंपिक के बाद ही खाएंगे'
300 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकी सविता ने कहा कि यह त्याग ही खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा, 'ये चीजें हमें प्रेरित करती हैं, क्योंकि हमें एहसास रहता है कि अच्छा खेलने के लिए हमने अपनी पसंदीदा चीजें छोड़ी हैं, परिवार से दूर रहे हैं और थकान के बावजूद लगातार अभ्यास किया है।' उन्होंने आगे कहा, 'टोक्यो ओलंपिक के समय वेन को नजर रखनी पड़ती थी कि कोई मीठा तो नहीं खा रहा, लेकिन अब सभी खिलाड़ी खुद ही परहेज रखते हैं। अब मिठाई तो शायद लॉस एंजिलिस ओलंपिक के बाद ही खाएंगे।'
300 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकी सविता ने कहा कि यह त्याग ही खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा, 'ये चीजें हमें प्रेरित करती हैं, क्योंकि हमें एहसास रहता है कि अच्छा खेलने के लिए हमने अपनी पसंदीदा चीजें छोड़ी हैं, परिवार से दूर रहे हैं और थकान के बावजूद लगातार अभ्यास किया है।' उन्होंने आगे कहा, 'टोक्यो ओलंपिक के समय वेन को नजर रखनी पड़ती थी कि कोई मीठा तो नहीं खा रहा, लेकिन अब सभी खिलाड़ी खुद ही परहेज रखते हैं। अब मिठाई तो शायद लॉस एंजिलिस ओलंपिक के बाद ही खाएंगे।'
'कोच को पोडियम पर पहुंचकर देना है रिटर्न गिफ्ट'
सविता ने कहा कि मुख्य कोच शोर्ड मारिन और सहयोगी स्टाफ ने टीम को विश्व कप के लिए पूरी तरह तैयार किया है। अब खिलाड़ियों की जिम्मेदारी है कि वे पदक जीतकर उनके भरोसे का सम्मान करें। उन्होंने कहा, 'शोर्ड बहुत डिमांडिंग कोच हैं और उन्हें हारना बिल्कुल पसंद नहीं है। वह हर मैच को चुनौती की तरह लेते हैं और वही दबाव हमसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराता है। वेन, रोडे, कियारा और मार्टिन हर खिलाड़ी की रिकवरी, डाइट और फिटनेस का व्यक्तिगत स्तर पर ध्यान रखते हैं। ताइके ताकेमा ने ड्रैग फ्लिक के साथ-साथ डिफेंस पर भी काफी काम कराया है। अब हमारी जिम्मेदारी है कि पोडियम पर पहुंचकर हम सभी को रिटर्न गिफ्ट दें।'
सविता ने कहा कि मुख्य कोच शोर्ड मारिन और सहयोगी स्टाफ ने टीम को विश्व कप के लिए पूरी तरह तैयार किया है। अब खिलाड़ियों की जिम्मेदारी है कि वे पदक जीतकर उनके भरोसे का सम्मान करें। उन्होंने कहा, 'शोर्ड बहुत डिमांडिंग कोच हैं और उन्हें हारना बिल्कुल पसंद नहीं है। वह हर मैच को चुनौती की तरह लेते हैं और वही दबाव हमसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराता है। वेन, रोडे, कियारा और मार्टिन हर खिलाड़ी की रिकवरी, डाइट और फिटनेस का व्यक्तिगत स्तर पर ध्यान रखते हैं। ताइके ताकेमा ने ड्रैग फ्लिक के साथ-साथ डिफेंस पर भी काफी काम कराया है। अब हमारी जिम्मेदारी है कि पोडियम पर पहुंचकर हम सभी को रिटर्न गिफ्ट दें।'
चीन के खिलाफ खास रणनीति, पुरुष टीम से भी मिलती है प्रेरणा
सविता का मानना है कि विश्व कप में हर मुकाबला चुनौतीपूर्ण होगा। खासकर चीन के खिलाफ पेनल्टी कॉर्नर डिफेंस पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा, 'विश्व कप में हर मैच अहम है और हम मैच दर मैच रणनीति बनाएंगे। इंग्लैंड और चीन दोनों मजबूत टीमें हैं। चीन के खिलाफ पिछले मुकाबलों में हमने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल गंवाए हैं, इसलिए इस बार पीसी डिफेंस बेहतर रखना होगा।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारतीय पुरुष हॉकी टीम के लगातार अच्छे प्रदर्शन से महिला टीम को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा, 'जब हम टोक्यो ओलंपिक में गए थे, तब हमारे अलावा किसी को हमसे उम्मीद नहीं थी। पुरुष टीम लगातार अच्छा खेल रही है और उनके दो ओलंपिक पदकों से हमें भी प्रेरणा मिलती है। हम भी चाहते हैं कि देश, परिवार और पूरी टीम को वही गर्व महसूस कराएं।'
सविता का मानना है कि विश्व कप में हर मुकाबला चुनौतीपूर्ण होगा। खासकर चीन के खिलाफ पेनल्टी कॉर्नर डिफेंस पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा, 'विश्व कप में हर मैच अहम है और हम मैच दर मैच रणनीति बनाएंगे। इंग्लैंड और चीन दोनों मजबूत टीमें हैं। चीन के खिलाफ पिछले मुकाबलों में हमने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल गंवाए हैं, इसलिए इस बार पीसी डिफेंस बेहतर रखना होगा।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारतीय पुरुष हॉकी टीम के लगातार अच्छे प्रदर्शन से महिला टीम को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा, 'जब हम टोक्यो ओलंपिक में गए थे, तब हमारे अलावा किसी को हमसे उम्मीद नहीं थी। पुरुष टीम लगातार अच्छा खेल रही है और उनके दो ओलंपिक पदकों से हमें भी प्रेरणा मिलती है। हम भी चाहते हैं कि देश, परिवार और पूरी टीम को वही गर्व महसूस कराएं।'
बेंगलुरु कैंप में मिलती है सीख
सविता ने बताया कि राष्ट्रीय शिविर बेंगलुरु में होने के कारण महिला और पुरुष टीम के खिलाड़ी एक-दूसरे के अनुभवों से सीखते हैं। उन्होंने कहा कि पेनल्टी कॉर्नर डिफेंस को बेहतर बनाने के लिए वे अनुभवी डिफेंडर अमित रोहिदास जैसे खिलाड़ियों से भी लगातार सुझाव लेती हैं। विश्व कप और एशियाई खेलों से पहले भारतीय महिला हॉकी टीम का यह अनुशासन और समर्पण दिखाता है कि खिलाड़ी केवल मैदान पर ही नहीं, बल्कि अपनी दिनचर्या और खान-पान में भी चैंपियन बनने की तैयारी कर रही हैं।
सविता ने बताया कि राष्ट्रीय शिविर बेंगलुरु में होने के कारण महिला और पुरुष टीम के खिलाड़ी एक-दूसरे के अनुभवों से सीखते हैं। उन्होंने कहा कि पेनल्टी कॉर्नर डिफेंस को बेहतर बनाने के लिए वे अनुभवी डिफेंडर अमित रोहिदास जैसे खिलाड़ियों से भी लगातार सुझाव लेती हैं। विश्व कप और एशियाई खेलों से पहले भारतीय महिला हॉकी टीम का यह अनुशासन और समर्पण दिखाता है कि खिलाड़ी केवल मैदान पर ही नहीं, बल्कि अपनी दिनचर्या और खान-पान में भी चैंपियन बनने की तैयारी कर रही हैं।