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क्रिकेट से लेकर फुटबॉल तक, कैसे कोरोना वायरस खेलों की पूरी दुनिया बदल देगा

Anshul Talmale अंशुल तलमले
Updated Thu, 07 May 2020 03:19 AM IST
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From cricket to athletics and football how coronavirus will change the sporting world
कोरोना वायरस के बाद खेल जगत - फोटो : अमर उजाला

कोरोना वायरस महामारी की वजह से चौपट होती दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पूरे खेल उद्योग को बिना सोचे-समझे बदल सकती है। कुछ खेलों में तो ऐसा संकट आएगा, जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की आर्थिक संरचना बदलने की संभावना है। कम रैंक वाले देशों को धन की कमी हो जाएगी। हॉकी जैसे खेल का भविष्य अंधकारमय नजर आता है।


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कोरोना वायरस महामारी की वजह से चौपट होती दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पूरे खेल उद्योग को बिना सोचे-समझे बदल सकती है। कुछ खेलों में तो ऐसा संकट आएगा, जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की आर्थिक संरचना बदलने की संभावना है। कम रैंक वाले देशों को धन की कमी हो जाएगी। हॉकी जैसे खेल का भविष्य अंधकारमय नजर आता है।

दरअसल, खेल निकायों का राजस्व टेलीविजन प्रसारण अधिकारों के लाइसेंस से आता है। यानी टीवी चैनल्स पर सीधे प्रसारण के एवज में उन्हें पैसे मिलते हैं। अब जब दुनियाभर में खेल प्रतियोगिताएं मानो ठप ही पड़ गईं हैं, ऐसे में यह संभावना है कि दूसरे क्षेत्रों की तरह यहां भी वित्तीय घाटा होगा। हालांकि भारतीय क्रिकेट बोर्ड की हालत दूसरे देशों के क्रिकेट संघों से बेहतर ही है।

दुनिया की प्रमुख रिसर्च कंपनी में से एक डेलॉइट इंडिया के मनीष देसाई की माने तो वेस्टइंडीज, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे छोटे क्रिकेट बोर्ड के मीडिया कॉन्ट्रैक्ट को नवीनीकृत नहीं किया जाता है तो यह देश चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। देसाई ने कहा कि क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों में भारत में सामान्य वापसी करना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि उनकी जेब उतनी गहरी नहीं।

IPL रद्द तो भारतीय अर्थव्यवस्था को झटका

आईपीएल 2020
आईपीएल 2020 - फोटो : सोशल मीडिया
वैसे तो आईपीएल अनिश्चिकाल के लिए टाला गया है, लेकिन अगर इस विकट दौर में टूर्नामेंट रद्द करना पड़े तो बीसीसीआई, टूर्नामेंट के ब्रॉडकास्टर्स और फ्रैंचाइजियों को 3 हजार करोड़ के नुकसान की आशंका है। सभी फ्रैंचाइजियों के पास लगभग 600 कर्मचारी काम करते हैं। सभी की नौकरी खतरे में है। एक आईपीएल अधिकारी ने मीडिया को बताया कि अगर टूर्नामेंट नहीं होता है तो ऑफिशियल ब्रॉडकास्टर स्टार स्पोर्ट्स को 1500 करोड़ रुपये लौटने होंगे।

इसका सीधा प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। 2015 के आईपीएल ने भारतीय सकल घरेलू उत्पाद में 1,150 करोड़ रुपये का योगदान दिया था। डेलॉयट के देसाई ने कहा कि टूर्नामेंट से जुड़े उद्योगों पर भी इस नुकसान को महसूस किया जाएगा। आईपीएल रद्द होने से सपोर्ट स्टाफ, लॉजिस्टिक कंपनियां, एयरलाइंस और होटल सेक्टर बुरी तरह प्रभावित होंगे।

तबाह हो जाएंगे छोटे क्रिकेट बोर्ड

अफगानिस्तान क्रिकेट टीम
अफगानिस्तान क्रिकेट टीम - फोटो : पीटीआई
कोरोना वायरस की वजह से भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच जारी सीरीज आनन-फानन में रद्द करनी पड़ी। फिर दो बार आईपीएल की तारीख आगे बढ़ी। आखिरकार अनिश्चितकाल के लिए दुनिया की इस सबसे महंगी क्रिकेट लीग को भी टाल पड़ना। बहरहाल, बिग 3 रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल की एकबार फिर अहम भूमिका नजर आ रही है। गौरतलब है कि बीसीसीआई, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और इंग्लिश क्रिकेट बोर्ड के बीच इस वित्तीय ढांचे का निर्माण हुआ था।

दक्षिण अफ्रीका के क्रिकेट प्रशासक और पूर्व आईसीसी सीईओ हारून लॉर्गाट ने साफ किया कि इन तीन क्रिकेट बोर्ड के अलावा अन्य देशों के सामने आर्थिक संकट आ खड़ा होगा। यह परेशानी इतनी बड़ी हो सकती है कि मैदान के रखरखाव और कर्मचारियों के वेतन जैसी मूलभूत आवश्यकता भी शायद पूरी न हो पाए। हालांकि खुद आईसीसी छोटे देशों के मदद के लिए आगे आएगी।

ऐसा नहीं है कि नुकसान सिर्फ छोटे क्रिकेट बोर्ड को हो रहा हो। अमीर संस्थाओं में गिने जाने वाले क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया तक की हालत खराब है। कोरोना की वजह से 174 मिलियन डॉलर का नुकसान उठा रहे सीए को इसी साल टेस्ट सीरीज में भारत की मेजबानी करनी है। इसी देश में वर्ल्ड टी-20 2020 का भी आयोजन होना है।

फुटबॉल पर लगा ब्रेक

कतर फुटबॉल विश्व कप 2022
कतर फुटबॉल विश्व कप 2022 - फोटो : ट्विटर
इंडियन सुपर लीग यानी ISL का फाइनल मुकाबल 14 मार्च को गोवा के खाली स्टेडियम में खेला गया। 15 मार्च को चेन्नई सिटी और नेरको के बीच खेला गया मुकाबला इस सीजन में आई-लीग का आखिरी मैच साबित हुआ। मोहन बगान को विजेता घोषित करना पड़ा।

भारत के फीफा विश्व कप क्वालीफायर के बचे मुकाबले भी टाल दिए गए। कतर, अफगानिस्तान औऱ बांग्लादेश के खिलाफ यह मैच मार्च-अप्रैल में प्रस्तावित थे। अंडर-17 महिला फुटबॉल विश्व कप की अगुवाई नवंबर में भारत करने वाला था, अब कोरोना महामारी के खात्मे के बाद ही फीफा नई तारीखों का एलान करेगा।

बैडमिंटन का भी बुरा हॉल

15 मार्च से शुरू हुआ ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप आखिरी इवेंट था, जहां भारत के बड़े बैडमिंटन खिलाड़ी खेलते नजर आए थे। उस वक्त भी खेल प्रशंसकों ने आवाज उठाई थी कि BWF खिलाड़ियों की जान दांव पर लगाकर टूर्नामेंट का आयोजन कर रहा है, जिसके बाद बैडमिंटन के सारे छोटे-बड़े टूर्नामेंट आगे बढ़ा दिए गए। स्विस ओपन, इंडिया ओपन, मलयेशिया ओपन और सिंगापुर ओपन जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट रद्द कर दिए गए।

छोटे टेनिस खिलाड़ियों के सामने घर चलाने की दिक्कत

द्वितीय विश्व युद्द के बाद पहली बार विंबलडन रद्द हुआ। फ्रेंच ओपन को 20 सितंबर तक आगे बढ़ा दिया गया है। ग्रैंडस्लैम के अलावा जारी फेड कप में भारत 17-18 अप्रैल को लातविया से भिड़ता, उससे पहले ही कोरोना का कहर भारी पड़ गया।

जिस तरह से एक के बाद एक टूर्नामेंट रद्द हो रहे हैं, इससे निचले रैंकिंग वाले खिलाड़ियों को आर्थिक नुकसान होगा, जिनका घर सिर्फ खेल जीतकर भरता है। पूर्व महान भारतीय टेनिस खिलाड़ी विजय अमृतराज ने बताया कि अगर आपकी रैंकिंग टॉप 100 में नहीं आती तो मुश्किल हो सकती है।

भारत के सिद्धार्थ रावत की माने तो उनकी रैंकिंग 438 है और वह फिलहाल अपने बचत से सितंबर या अक्टूबर तक घर चलाने की स्थिति में है। मगर उसके बाद उनके लिए जीवन कठिन हो जाएगा।

ओलंपिक के आगे बढ़ने से क्या नुकसान?

टोक्यो ओलंपिक 2020
टोक्यो ओलंपिक 2020 - फोटो : सोशल
ओलंपिक खेल पांच श्रेणियों में बांटे गए हैं और हर अंतरराष्ट्रीय फेडरेशन को इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी यानी IOC वित्तीय सहायता देता है। यह फंडिंग खेल और उसके दर्शकों के आधार पर होती है। अधिकतम 40 मिलियन डॉलर और न्यूनतम 7 मिलियन डॉलर हो सकता है। अनुमान के मुताबिक IOC इन रुपयों का भुगतान रोक सकती है। अगर ऐसा हुआ तो भारत में इन खेलों के खिलाड़ियों की तैयारी पर असर पड़ना तय है। भारत के खेलों का हाजमा भी इससे बिगड़ सकता है। इस बीच खेल मंत्री किरेन रिजिजू की ओर से यह बयान जरूर आया कि सरकार यथासंभव प्रयास करेगी। खिलाड़ियों के मासिक भुगतान, ट्रेनिंग और आधारभूत खर्च को नहीं काटा जाएगा।

टालने पड़े इन सारे खेलों के आयोजन

खेलों पर कोरोना वायरस का प्रभाव
खेलों पर कोरोना वायरस का प्रभाव - फोटो : ट्विटर
एथलेटिक्स: 23 जुलाई 2020 से शुरू होने वाले ओलंपिक खेल अब 23 जुलाई 2021 से शुरू होंगे। ट्रैक एंड फील्ड के खिलाड़ियों के लिए यह किसी कड़ी चुनौती से कम नहीं होगा, क्योंकि बेहद कम समय में उन्हें तीन बड़े टूर्नामेंट में पसीन बहाना है। विश्व एथेलेटिक्स चैंपियनशिप जहां 15-24 जुलाई के बीच चलेगी तो, कॉमनवेल्थ खेलों का आयोजन 27 जुलाई से 7 अगस्त के बीच होना है फिर 10 सितंबर से एशियाई खेल शुरू हो जाएंगे।

तीरंदाजी: 20-26 अप्रैल से ग्वाटेमाला में होने वाला विश्व कप रद्द कर दिया गया है, अब इसका आयोजन 4-10 मई के बीच शंघाई में होगा।

मुक्केबाजी: चीन के वुहान से स्थानांतरित कर एशिया-ओशिनिया ओलंपिक क्वालीफायर अब जॉर्डन की राजधानी अम्मान में 3-11 मार्च तक आयोजित किए जाएंगे। जॉर्डन में ही रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन के बाद स्वदेश लौटने वाले भारतीय एथलीटों को दिल्ली हवाई अड्डे में कोरोना की जांच से गुजरना पड़ा था, जिसके बाद उन्हें क्वारंटीन भी किया गया था।

शूटिंग: 15-26 मार्च तक नई दिल्ली में होने वाले विश्व कप को स्थगित कर 2-9 जून के लिए बढ़ा दिया गया है। 16-26 अप्रैल तक टोक्यो में होने वाला ओलंपिक टेस्ट कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया है।

टेबल टेनिस: दक्षिण कोरिया के बुसान में होने वाली विश्व टीम चैंपियनशिप को 22-29 मई से स्थगित कर 21-28 जून तक के लिए बढ़ा दिया गया है। 6-12 अप्रैल तक बैंकॉक में आयोजित होने वाले एशियाई ओलंपिक क्वालीफाइंग टूर्नामेंट को भी स्थगित कर दिया गया है।

वेटलिफ्टिंग: 16 से 25 अप्रैल तक उज्बेकिस्तान के ताशकंद में होने वाली एशियाई चैंपियनशिप को भी स्थगित कर दिया गया है।

कुश्ती: 20 से 23 फरवरी तक नई दिल्ली में एशियाई चैंपियनशिप आयोजित की गईं, हालांकि चीन, उत्तर कोरिया, तुर्कमेनिस्तान की टीमें पीछे हट गईं। 27-29 मार्च के बीच चीन में होने वाले एशियाई ओलंपिक क्वालीफायर को भी स्थगित कर दिया गया है।

कैसे होगी खेलों की वापसी?

डेलॉइट इंडिया के देसाई की माने तो, 'अब हमें कोरोना वायरस के खतरे के साथ रहने की आदत डालनी होगी। खेल जगत पूरी तरह इस महामारी के साये से बाहर नहीं आ सकता। आईपीएल, इंग्लिश प्रीमियर लीग और एनबीए जैसे बड़े ब्रांड तो खुद को संभाल लेंगे, लेकिन कई छोटी लीग और क्लबों के सामने अस्तित्व का संकट नजर आ रहा है।

हालात सामान्य करने के लिए अब खेल संगठनों की ओर से ही वापसी की दिशा में पहला कदम उठाना होगा। संबंधित खेल निकायों को सरकार के साथ बैठकर आगामी रणनीति बनानी होगी। देसाई ने कहा कि सामान्य तौर पर दो तरीके से ही खेलों की वापसी हो सकती है। पहला यह है कि फैंस को वापस स्टेडियम आने की अनुमति मिल जाए। स्टेडियमों के भीतर ही सामाजिक दूरी के मापदंडों को अपनाया जाए। मैदान के भीतर कोरोना वायरस का सामूहिक परीक्षण किया जाए। हालांकि यह व्यावहारिक रूप से संभव नहीं।

दूसरा तरीका यह हो सकता है कि खेलों को खाली स्टेडियमों में आयोजित किया जाए। प्रशंसकों को मैच देखने का बेहतर अनुभव दिया जाए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करते हुए, खिलाड़ियों के लिए भी कुछ ऐसे तरीके इजाद किए जाए, जिनसे उन्हें ऐसा महसूस हो कि वह स्टेडियम में अकेले नहीं।
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