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एशियन गेम्स: घुटने की चोट के बावजूद खेला मैच, कांस्य मिला तो भावुक हुईं पिंकी; बताया कैसे प्रभावित हुई तैयारी

Mon, 28 Sep 2026 03:03 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नागोया Published by: शोभित चतुर्वेदी Updated Mon, 28 Sep 2026 03:03 PM IST
सार

भारत की महिला कुराश खिलाड़ी पिंकी बलहारा ने एशियन गेम्स में कांस्य पदक अपने नाम किया। पिंकी को सेमीफाइनल में हार मिली और उन्हें कांस्य से संतोष करना पड़ा। हालांकि, पिंकी ने बताया कि क्वार्टर फाइनल में उनके घुटने में चोट लग गई थी।

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Pincky Balhara knee was hurt in Quarter final affected show in semifinal winning bronze at Asian Games
पिंकी बलहारा - फोटो : Twitter

विस्तार

एशियन गेम्स में सोमवार को कांस्य पदक जीतकर भारत की सबसे सफल कुराश खिलाड़ी बनने वाली पिंकी बलहारा सेमीफाइनल मुकाबले के बाद फूट-फूटकर रो रही थीं और ये आंसू चोटिल घुटने के कारण बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाने की निराशा के थे। भारत की सबसे सफल कुराश खिलाड़ियों में शामिल पिंकी ने बताया कि दक्षिण कोरिया की लिम गारम के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले के दौरान उनके दाएं घुटने पर चोट लगी थी। सेमीफाइनल में एक अन्य कोरियाई खिलाड़ी सुमिन मो के खिलाफ मुकाबले में चोटिल घुटना उनके लिए परेशानी का सबब बना और वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सकीं।
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क्वार्टर फाइनल मुकाबले में लगी थी चोट
पिंकी ने कहा, क्वार्टर फाइनल मुकाबले में मुझे चोट लग गई थी। मेरे घुटने पर चोट लगी। क्वार्टर फाइनल में मेरी प्रतिद्वंद्वी भी कोरियाई थी। इसलिए सेमीफाइनल की मेरी प्रतिद्वंद्वी को पता था कि मेरे दाएं घुटने में चोट लगी है। मैं आक्रमण कर रही थी, लेकिन वह बार-बार मेरे घुटने पर हमला कर रही थी। इसलिए मैं पेनल्टी के कारण हार गई।
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क्या है कुराश खेल?
कुराश उज्बेकिस्तान की पारंपरिक कुश्ती और मार्शल आर्ट शैली है, जिसमें खिलाड़ियों को मुक्का मारने, लात चलाने या प्रतिद्वंद्वी के पैर पकड़ने की अनुमति नहीं होती। मुकाबले खड़े होकर होते हैं और अंक हासिल करने के लिए खिलाड़ी को प्रतिद्वंद्वी को पूरी ताकत और नियंत्रण के साथ पीठ के बल गिराना होता है। दिल्ली की रहने वाली पिंकी ने 2018 एशियाई खेलों में 52 किग्रा भार वर्ग में रजत पदक जीता था, लेकिन इस बार वह 78 किग्रा भार वर्ग में उतरीं। हांगझोउ एशियाई खेलों 2023 में उनका अभियान क्वार्टर फाइनल से आगे नहीं बढ़ सका था।
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भारत में नहीं है मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय महासंघ
पिंकी के प्रशिक्षण का ज्यादातर हिस्सा लड़कों के साथ मुकाबले करते हुए गुजरता है और उनका मानना है कि इससे उन्हें देश की सबसे सफल कुराश खिलाड़ियों में शामिल होने में मदद मिली। भारत में कुराश का कोई मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय महासंघ नहीं है और इससे जुड़े पक्षों के बीच लगातार मतभेद के कारण खिलाड़ियों को निजी सहयोग पर निर्भर रहना पड़ता है। पिंकी को भी दिल्ली स्थित अपने मामा की अकादमी से ही प्रशिक्षण और सहयोग मिलता है।

2018 एशियाई खेलों से पहले पिता को खो चुकी पिंकी ने कहा, भारत में एक नियम है कि केवल एक ही मार्शल आर्ट खेल खेला जा सकता है। इसलिए मैंने कुराश चुना। मैं कुराश में रैंकिंग वाली खिलाड़ी हूं। 

पिंकी ने कहा कि प्रत्येक एशियाई खेल से पहले एक नया महासंघ सामने आ जाता है, लेकिन खिलाड़ियों के हितों के लिए कोई ठोस काम नहीं होता। उन्होंने अपने पिछले एशियाई खेलों के अनुभव को याद करते हुए कहा, जैसे ही एशियाई खेल आते हैं, एक नया महासंघ बन जाता है। लेकिन इससे खिलाड़ियों का नुकसान होता है। महासंघ तो हमेशा बने रहेंगे। 2023 में हमें गुमराह किया गया था। इसी वजह से मुझे अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
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