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'देश के लिए खेलो, हर हाल में जीतो': 51 साल बाद पदक की आस, 1975 के विश्वकप नायकों ने बढ़ाया भारतीय टीम का हौसला
Sat, 08 Aug 2026 06:17 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Sat, 08 Aug 2026 06:17 PM IST
सार
1975 विश्व कप विजेता अशोक कुमार और असलम शेर खान ने भारतीय हॉकी टीम से देश को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर पूरे जुनून के साथ खेलने की अपील की है। दोनों दिग्गजों का मानना है कि 51 साल से चले आ रहे विश्व कप पदक के इंतजार को खत्म करने के लिए भारत को पेरिस ओलंपिक जैसी मानसिकता और 1975 जैसा आत्मविश्वास दिखाना होगा।
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भारतीय हॉकी टीम
- फोटो : PTI
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विस्तार
भारत के 1975 विश्व कप विजेता हॉकी खिलाड़ियों अशोक कुमार और असलम शेर खान ने मौजूदा भारतीय पुरुष हॉकी टीम से देश को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर रखने और जीत के लिए हर संभव प्रयास करने का आह्वान किया है। दोनों दिग्गजों का मानना है कि देश के लिए जीतने की अटूट इच्छा ही भारत को 51 साल बाद विश्व कप पदक दिला सकती है। भारत ने पुरुष हॉकी विश्व कप का खिताब सिर्फ एक बार जीता है। 1975 में कुआलालंपुर में खेले गए फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को 2-1 से हराकर इतिहास रचा था। उस मुकाबले में अशोक कुमार ने 51वें मिनट में निर्णायक गोल कर भारत को खिताब दिलाया था।
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'जीत-हार आपकी नहीं, देश की होगी'
मौजूदा टीम के लिए अशोक कुमार का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को मैदान पर उतरते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि जीत या हार केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि पूरे देश की होगी। अशोक ने पीटीआई से कहा, 'मैं भारतीय टीम से यही कहूंगा कि ध्यान रखें कि जीत या हार आपकी नहीं, बल्कि आपके देश की होगी। यह सोच अपने आप आपको प्रेरित करेगी। 51 साल का इंतजार बहुत लंबा हो चुका है और अब हमें पदक जीतना है।' इस बार विश्व कप नीदरलैंड्स और बेल्जियम में 15 से 30 अगस्त तक खेला जाएगा।
मौजूदा टीम के लिए अशोक कुमार का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को मैदान पर उतरते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि जीत या हार केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि पूरे देश की होगी। अशोक ने पीटीआई से कहा, 'मैं भारतीय टीम से यही कहूंगा कि ध्यान रखें कि जीत या हार आपकी नहीं, बल्कि आपके देश की होगी। यह सोच अपने आप आपको प्रेरित करेगी। 51 साल का इंतजार बहुत लंबा हो चुका है और अब हमें पदक जीतना है।' इस बार विश्व कप नीदरलैंड्स और बेल्जियम में 15 से 30 अगस्त तक खेला जाएगा।
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1971 और 1973 की निराशा ने बढ़ाई थी खिताब की भूख
1975 की चैंपियन टीम का हिस्सा रहे अशोक और असलम जानते हैं कि निराशा से उबरकर सफलता हासिल करने के लिए किस तरह की मानसिकता चाहिए। दोनों खिलाड़ी 1971 में कांस्य और 1973 में रजत पदक जीतने वाली भारतीय टीमों में भी शामिल थे।
अशोक ने 1971 के सेमीफाइनल में हार को याद करते हुए कहा कि उस हार ने टीम के भीतर देश के लिए जीतने की भूख और बढ़ा दी थी। उन्होंने बताया कि कोच बलबीर सिंह सीनियर हार के बाद इतना रोए थे कि उन्हें संभालना मुश्किल हो गया था। 1973 में रजत पदक मिलने के बावजूद टीम में स्वर्ण से चूकने की निराशा थी। अशोक ने कहा कि उन्हें घर लौटकर अपने पिता और चाचा को पदक दिखाने में भी शर्म महसूस होती थी। वह महान हॉकी खिलाड़ी ध्यानचंद के बेटे और रूप सिंह के भतीजे हैं।
1975 की चैंपियन टीम का हिस्सा रहे अशोक और असलम जानते हैं कि निराशा से उबरकर सफलता हासिल करने के लिए किस तरह की मानसिकता चाहिए। दोनों खिलाड़ी 1971 में कांस्य और 1973 में रजत पदक जीतने वाली भारतीय टीमों में भी शामिल थे।
अशोक ने 1971 के सेमीफाइनल में हार को याद करते हुए कहा कि उस हार ने टीम के भीतर देश के लिए जीतने की भूख और बढ़ा दी थी। उन्होंने बताया कि कोच बलबीर सिंह सीनियर हार के बाद इतना रोए थे कि उन्हें संभालना मुश्किल हो गया था। 1973 में रजत पदक मिलने के बावजूद टीम में स्वर्ण से चूकने की निराशा थी। अशोक ने कहा कि उन्हें घर लौटकर अपने पिता और चाचा को पदक दिखाने में भी शर्म महसूस होती थी। वह महान हॉकी खिलाड़ी ध्यानचंद के बेटे और रूप सिंह के भतीजे हैं।
'देश हमारी मां जैसा था, उसी जुनून से खेलते थे'
अस्सलम शेर खान ने कहा कि 1975 विश्व कप में भारतीय खिलाड़ियों के लिए देश सबसे ऊपर था और मौजूदा टीम को भी इसी भावना के साथ मैदान पर उतरना चाहिए। उन्होंने कहा, 'जब हम विश्व कप में उतरे थे तो हमारा देश हमारी मां जैसा था और हम उसी जुनून के साथ खेलते थे। आपको भी इस सोच के साथ मैदान में उतरना चाहिए कि हम अपनी मां के लिए खेल रहे हैं और हमारा जुनून ऐसा होना चाहिए कि हम हर हाल में जीतें।' उन्होंने बताया कि 1975 विश्व कप से पहले चंडीगढ़ में आयोजित शिविर में देशभर के खिलाड़ी एक साझा लक्ष्य के साथ जुटे थे। पिछले दो विश्व कप में स्वर्ण से चूकने के कारण टीम के भीतर खिताब जीतने की तीव्र इच्छा थी।
किसी टीम को खुद से बेहतर नहीं माना
असलम के मुताबिक 1975 की टीम में आत्मविश्वास की कोई कमी नहीं थी। भारत ने जर्मनी, हॉलैंड या ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों को खुद से बेहतर नहीं माना। उन्होंने कहा कि मौजूदा टीम को भी इसी आत्मविश्वास और जुनून की जरूरत है। उनके मुताबिक अगर खिलाड़ी इसी भावना के साथ खेलेंगे तो कोई भी टीम उन्हें पदक जीतने से नहीं रोक सकती।
असलम ने 1975 विश्व कप के अपने व्यक्तिगत संघर्ष को भी याद किया। उन्होंने बताया कि टूर्नामेंट के अधिकांश समय उन्हें बाहर बैठना पड़ा था और खेलने का मौका नहीं मिलने की पीड़ा इतनी ज्यादा थी कि वह हर रात सोने से पहले भावुक हो जाते थे। हालांकि, यही पीड़ा बाद में उनके लिए प्रेरणा बनी। उन्होंने कहा कि दो सप्ताह तक झेली गई उस तकलीफ ने उन्हें सेमीफाइनल के आखिरी 15 मिनट में निर्णायक गोल करने के लिए प्रेरित किया। असलम ने मलेशिया के खिलाफ सेमीफाइनल में महत्वपूर्ण बराबरी का गोल किया था।
अस्सलम शेर खान ने कहा कि 1975 विश्व कप में भारतीय खिलाड़ियों के लिए देश सबसे ऊपर था और मौजूदा टीम को भी इसी भावना के साथ मैदान पर उतरना चाहिए। उन्होंने कहा, 'जब हम विश्व कप में उतरे थे तो हमारा देश हमारी मां जैसा था और हम उसी जुनून के साथ खेलते थे। आपको भी इस सोच के साथ मैदान में उतरना चाहिए कि हम अपनी मां के लिए खेल रहे हैं और हमारा जुनून ऐसा होना चाहिए कि हम हर हाल में जीतें।' उन्होंने बताया कि 1975 विश्व कप से पहले चंडीगढ़ में आयोजित शिविर में देशभर के खिलाड़ी एक साझा लक्ष्य के साथ जुटे थे। पिछले दो विश्व कप में स्वर्ण से चूकने के कारण टीम के भीतर खिताब जीतने की तीव्र इच्छा थी।
किसी टीम को खुद से बेहतर नहीं माना
असलम के मुताबिक 1975 की टीम में आत्मविश्वास की कोई कमी नहीं थी। भारत ने जर्मनी, हॉलैंड या ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों को खुद से बेहतर नहीं माना। उन्होंने कहा कि मौजूदा टीम को भी इसी आत्मविश्वास और जुनून की जरूरत है। उनके मुताबिक अगर खिलाड़ी इसी भावना के साथ खेलेंगे तो कोई भी टीम उन्हें पदक जीतने से नहीं रोक सकती।
असलम ने 1975 विश्व कप के अपने व्यक्तिगत संघर्ष को भी याद किया। उन्होंने बताया कि टूर्नामेंट के अधिकांश समय उन्हें बाहर बैठना पड़ा था और खेलने का मौका नहीं मिलने की पीड़ा इतनी ज्यादा थी कि वह हर रात सोने से पहले भावुक हो जाते थे। हालांकि, यही पीड़ा बाद में उनके लिए प्रेरणा बनी। उन्होंने कहा कि दो सप्ताह तक झेली गई उस तकलीफ ने उन्हें सेमीफाइनल के आखिरी 15 मिनट में निर्णायक गोल करने के लिए प्रेरित किया। असलम ने मलेशिया के खिलाफ सेमीफाइनल में महत्वपूर्ण बराबरी का गोल किया था।
ओलंपिक और विश्व कप की चुनौती अलग: असलम
असलम ने मौजूदा टीम को यह भी याद रखने की सलाह दी कि ओलंपिक और विश्व कप की परिस्थितियां और दबाव अलग होते हैं। हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने टोक्यो 2021 और पेरिस 2024 ओलंपिक में लगातार कांस्य पदक जीते हैं।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के बीच हुए टोक्यो ओलंपिक की परिस्थितियां अलग थीं, लेकिन भारत ने पेरिस में भी अपना पदक बरकरार रखा। उनके मुताबिक अगर भारतीय टीम पेरिस ओलंपिक जैसी भावना के साथ खेलती है तो 51 साल बाद विश्व कप में भारत का पोडियम पर पहुंचना तय है।
अशोक ने तेज फैसले लेने पर दिया जोर
अशोक कुमार ने खिलाड़ियों को मैदान पर तेजी से निर्णय लेने और खेल की बुनियादी बातों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि गेंद पर नियंत्रण, आक्रमण, बॉल हैंडलिंग और पासिंग से जुड़े फैसले खिलाड़ियों को तेजी से लेने होंगे।
उन्होंने कहा कि हॉकी टीम गेम है और हर खिलाड़ी की भूमिका महत्वपूर्ण है। साथ ही उन्होंने भारतीय फॉरवर्ड खिलाड़ियों से असाधारण प्रयास करने की अपील की। भारत के लिए अब 1975 के गौरव को दोहराने की चुनौती है। 51 साल से विश्व कप पदक का इंतजार कर रही टीम के सामने इस बार दिग्गजों की सीख को मैदान पर उतारने और इतिहास बदलने का मौका होगा।
असलम ने मौजूदा टीम को यह भी याद रखने की सलाह दी कि ओलंपिक और विश्व कप की परिस्थितियां और दबाव अलग होते हैं। हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने टोक्यो 2021 और पेरिस 2024 ओलंपिक में लगातार कांस्य पदक जीते हैं।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के बीच हुए टोक्यो ओलंपिक की परिस्थितियां अलग थीं, लेकिन भारत ने पेरिस में भी अपना पदक बरकरार रखा। उनके मुताबिक अगर भारतीय टीम पेरिस ओलंपिक जैसी भावना के साथ खेलती है तो 51 साल बाद विश्व कप में भारत का पोडियम पर पहुंचना तय है।
अशोक ने तेज फैसले लेने पर दिया जोर
अशोक कुमार ने खिलाड़ियों को मैदान पर तेजी से निर्णय लेने और खेल की बुनियादी बातों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि गेंद पर नियंत्रण, आक्रमण, बॉल हैंडलिंग और पासिंग से जुड़े फैसले खिलाड़ियों को तेजी से लेने होंगे।
उन्होंने कहा कि हॉकी टीम गेम है और हर खिलाड़ी की भूमिका महत्वपूर्ण है। साथ ही उन्होंने भारतीय फॉरवर्ड खिलाड़ियों से असाधारण प्रयास करने की अपील की। भारत के लिए अब 1975 के गौरव को दोहराने की चुनौती है। 51 साल से विश्व कप पदक का इंतजार कर रही टीम के सामने इस बार दिग्गजों की सीख को मैदान पर उतारने और इतिहास बदलने का मौका होगा।