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Asian Games: शेन वॉटसन की 'विनर्स माइंडसेट' से सीखा दबाव से निपटना, एशियाड के लिए तैयार तीरंदाज साहिल जाधव
Fri, 07 Aug 2026 06:17 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Fri, 07 Aug 2026 06:17 PM IST
सार
शेन वॉटसन की किताब द विनर्स माइंडसेट से प्रेरित तीरंदाज साहिल जाधव एशियन गेम्स 2026 में बड़ी चुनौती के लिए तैयार हैं। सात साल के संघर्ष के बाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करने वाले साहिल की नजर अब एशियन गेम्स में पदक पर है।
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साहिल जाधव
- फोटो : IANS
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विस्तार
क्रिकेट और तीरंदाजी का दूर-दूर तक कोई सीधा संबंध नजर नहीं आता, लेकिन प्रेरणा किसी भी क्षेत्र से मिल सकती है। भारतीय तीरंदाज साहिल जाधव के लिए ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर शेन वॉटसन की किताब ने दबाव से निपटने और प्रतियोगिता के दौरान खुद को केंद्रित रखने में मदद की है। 25 वर्षीय जाधव अब अगले महीने जापान में होने वाले एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए चुनौती पेश करने की तैयारी कर रहे हैं।
फोन की स्क्रॉलिंग कम करने के लिए शुरू की थी किताब
जाधव ने बताया कि उन्होंने करीब एक महीने पहले वॉटसन की किताब 'द विनर्स माइंडसेट' पढ़ना शुरू किया था। शुरुआत में उनका मकसद फोन पर स्क्रॉलिंग में बिताए जाने वाले समय को कम करना था, लेकिन किताब से उन्हें मानसिक मजबूती से जुड़ी अहम सीख मिली।
जाधव ने साइ मीडिया से कहा, 'मैंने करीब एक महीने पहले शेन वॉटसन की 'द विनर्स माइंडसेट' किताब पढ़ना शुरू की। मेरा शुरुआती मकसद फोन पर स्क्रॉल करने में बिताया जाने वाला समय कम करना था। हालांकि, इससे मुझे दबाव से निपटने और प्रतियोगिताओं के दौरान अपना ध्यान केंद्रित रखने के बारे में काफी महत्वपूर्ण जानकारी मिली।'
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फोन की स्क्रॉलिंग कम करने के लिए शुरू की थी किताब
जाधव ने बताया कि उन्होंने करीब एक महीने पहले वॉटसन की किताब 'द विनर्स माइंडसेट' पढ़ना शुरू किया था। शुरुआत में उनका मकसद फोन पर स्क्रॉलिंग में बिताए जाने वाले समय को कम करना था, लेकिन किताब से उन्हें मानसिक मजबूती से जुड़ी अहम सीख मिली।
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जाधव ने साइ मीडिया से कहा, 'मैंने करीब एक महीने पहले शेन वॉटसन की 'द विनर्स माइंडसेट' किताब पढ़ना शुरू की। मेरा शुरुआती मकसद फोन पर स्क्रॉल करने में बिताया जाने वाला समय कम करना था। हालांकि, इससे मुझे दबाव से निपटने और प्रतियोगिताओं के दौरान अपना ध्यान केंद्रित रखने के बारे में काफी महत्वपूर्ण जानकारी मिली।'
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सात साल तक इंतजार के बाद मिली पहली राष्ट्रीय पदक जीत
जाधव के लिए मानसिक मजबूती और धैर्य हमेशा से बेहद जरूरी रहे हैं। उन्होंने 19 साल की उम्र में तीरंदाजी शुरू की थी और अपने पहले राष्ट्रीय पदक के लिए उन्हें सात साल तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान वह बेहद मामूली अंतर से कई बार पदक से चूकते रहे।
उन्होंने कहा, 'मैंने तीरंदाजी काफी देर से, 19 साल की उम्र में शुरू की। लेकिन मेरा परिवार बेहद सहयोगी रहा। वास्तव में, मेरे परिवार ने मुझसे भी ज्यादा त्याग किया है। वे मुश्किल वर्षों में मेरे साथ खड़े रहे और हर संभव तरीके से मेरा समर्थन किया।' उनकी मेहनत आखिरकार 2024 में रंग लाई, जब उन्होंने सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपना पहला राष्ट्रीय पदक हासिल किया।
जाधव के लिए मानसिक मजबूती और धैर्य हमेशा से बेहद जरूरी रहे हैं। उन्होंने 19 साल की उम्र में तीरंदाजी शुरू की थी और अपने पहले राष्ट्रीय पदक के लिए उन्हें सात साल तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान वह बेहद मामूली अंतर से कई बार पदक से चूकते रहे।
उन्होंने कहा, 'मैंने तीरंदाजी काफी देर से, 19 साल की उम्र में शुरू की। लेकिन मेरा परिवार बेहद सहयोगी रहा। वास्तव में, मेरे परिवार ने मुझसे भी ज्यादा त्याग किया है। वे मुश्किल वर्षों में मेरे साथ खड़े रहे और हर संभव तरीके से मेरा समर्थन किया।' उनकी मेहनत आखिरकार 2024 में रंग लाई, जब उन्होंने सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपना पहला राष्ट्रीय पदक हासिल किया।
विश्व यूनिवर्सिटी गेम्स में भी दिखाया दम
राष्ट्रीय स्तर पर सफलता के बाद जाधव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने 2025 विश्व यूनिवर्सिटी गेम्स में व्यक्तिगत वर्ग का खिताब जीता, जबकि टीम स्पर्धा में रजत पदक अपने नाम किया। इस साल उन्होंने अपने करियर का अब तक का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय परिणाम हासिल किया। जाधव ने चीन के शंघाई में हुए आर्चरी वर्ल्ड कप 2026 स्टेज-2 में पुरुष व्यक्तिगत कंपाउंड स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। पोडियम पर खड़े होने के उस पल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें अपने माता-पिता, उनके त्याग और पिछले कई वर्षों के संघर्ष की याद आई।
राष्ट्रीय स्तर पर सफलता के बाद जाधव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने 2025 विश्व यूनिवर्सिटी गेम्स में व्यक्तिगत वर्ग का खिताब जीता, जबकि टीम स्पर्धा में रजत पदक अपने नाम किया। इस साल उन्होंने अपने करियर का अब तक का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय परिणाम हासिल किया। जाधव ने चीन के शंघाई में हुए आर्चरी वर्ल्ड कप 2026 स्टेज-2 में पुरुष व्यक्तिगत कंपाउंड स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। पोडियम पर खड़े होने के उस पल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें अपने माता-पिता, उनके त्याग और पिछले कई वर्षों के संघर्ष की याद आई।
दक्षिण कोरिया, चीन और जापान की चुनौती
एशियन गेम्स में भारत को दक्षिण कोरिया, चीन और जापान जैसी मजबूत तीरंदाजी टीमों से चुनौती मिलेगी। जाधव का मानना है कि भारतीय तीरंदाजों में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को हराने की क्षमता है, लेकिन दबाव के क्षणों में छोटी गलतियों से बचना होगा।
उन्होंने कहा, 'भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए होने वाले चयन ट्रायल दुनिया में सबसे कठिन हैं। अगर हमने भारतीय टीम में अपनी जगह बनाई है, तो इसका मतलब है कि हमारे अंदर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को हराने की क्षमता है। हालांकि, कभी-कभी हमारे तीरंदाज दबाव में आ जाते हैं, छोटी गलतियां करते हैं या एक-दो अंक से चूक जाते हैं।' जाधव ने बताया कि विश्व कप में भारतीय टीम इस तरह की गलतियों के कारण तीन बार कांस्य पदक से चूक चुकी है। उनके मुताबिक, एशियन गेम्स में इस समस्या पर ध्यान देना जरूरी होगा।
एशियन गेम्स में भारत को दक्षिण कोरिया, चीन और जापान जैसी मजबूत तीरंदाजी टीमों से चुनौती मिलेगी। जाधव का मानना है कि भारतीय तीरंदाजों में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को हराने की क्षमता है, लेकिन दबाव के क्षणों में छोटी गलतियों से बचना होगा।
उन्होंने कहा, 'भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए होने वाले चयन ट्रायल दुनिया में सबसे कठिन हैं। अगर हमने भारतीय टीम में अपनी जगह बनाई है, तो इसका मतलब है कि हमारे अंदर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को हराने की क्षमता है। हालांकि, कभी-कभी हमारे तीरंदाज दबाव में आ जाते हैं, छोटी गलतियां करते हैं या एक-दो अंक से चूक जाते हैं।' जाधव ने बताया कि विश्व कप में भारतीय टीम इस तरह की गलतियों के कारण तीन बार कांस्य पदक से चूक चुकी है। उनके मुताबिक, एशियन गेम्स में इस समस्या पर ध्यान देना जरूरी होगा।
साइ को सफलता में बताया अहम योगदानकर्ता
जाधव फिलहाल कोलकाता स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, ईस्टर्न सेंटर में प्रशिक्षण ले रहे हैं। वह पिछले तीन-चार वर्षों से साइ में अभ्यास कर रहे हैं और एशियन गेम्स को अपने करियर का अब तक का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय असाइनमेंट मानते हैं।
उन्होंने कहा, 'यहां प्रशिक्षण के लिए परिस्थितियां बिल्कुल सही हैं। हम साइ के बहुत आभारी हैं, क्योंकि वह हमारे प्रशिक्षण, रहने, भोजन, उपकरण और अन्य सुविधाओं का ध्यान रखता है। वास्तव में, मैंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो सफलता हासिल की है, उसमें साइ की महत्वपूर्ण भूमिका है।' जाधव अब अपनी व्यक्तिगत फॉर्म और मानसिक मजबूती को बरकरार रखते हुए एशियन गेम्स में भारत को पदक दिलाने की कोशिश करेंगे।
जाधव फिलहाल कोलकाता स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, ईस्टर्न सेंटर में प्रशिक्षण ले रहे हैं। वह पिछले तीन-चार वर्षों से साइ में अभ्यास कर रहे हैं और एशियन गेम्स को अपने करियर का अब तक का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय असाइनमेंट मानते हैं।
उन्होंने कहा, 'यहां प्रशिक्षण के लिए परिस्थितियां बिल्कुल सही हैं। हम साइ के बहुत आभारी हैं, क्योंकि वह हमारे प्रशिक्षण, रहने, भोजन, उपकरण और अन्य सुविधाओं का ध्यान रखता है। वास्तव में, मैंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो सफलता हासिल की है, उसमें साइ की महत्वपूर्ण भूमिका है।' जाधव अब अपनी व्यक्तिगत फॉर्म और मानसिक मजबूती को बरकरार रखते हुए एशियन गेम्स में भारत को पदक दिलाने की कोशिश करेंगे।