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भारतीय टेनिस टीम का निराशाजनक प्रदर्शन: 40 साल में पहली बार एशियाड से लौटेंगे खाली हाथ, चुनौती हुई समाप्त

Thu, 01 Oct 2026 03:05 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नागोया Published by: शोभित चतुर्वेदी Updated Thu, 01 Oct 2026 03:05 PM IST
सार

भारतीय टेनिस दल ने एशियन गेम्स में निराशाजनक प्रदर्शन किया। भारत का टेनिस में अभियान समाप्त हो गया है और इस स्पर्धा में देश को एक भी पदक नहीं मिला है।

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Indian tennis contingent to return without medal from Asian Games for first time in 40 years
सुमित नागल - फोटो : ANI

विस्तार

भारतीय टेनिस दल 1986 के बाद पहली बार एशियन गेम्स से पदक लिए बिना लौटेगा। सुमित नागल के पुरुष एकल क्वार्टर फाइनल में हारकर बाहर होने से एशियाड में भारतीय चुनौती समाप्त हो गई। पदक की दावेदार युगल टीमों के बुधवार को ही बाहर होने के बाद भारत की उम्मीदों का दारोमदार एकल रैंकिंग में नंबर एक खिलाड़ी सुमित पर था जो चीन के यिबिंग वू से एक घंटे 38 मिनट तक चले मैच में 4-6, 4-6 से हार गए।
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कम से कम तीन पदक की थी उम्मीद
भारत ने 1990 के बाद से हर एशियन गेम्स खेल में टेनिस में पदक जीते हैं और इस बार भी कम से कम तीन पदकों की उम्मीद थी। सोल में डेविस कप में दक्षिण कोरिया से मिली हार के बाद जापान में पदक जीतने से भारतीय टेनिसप्रेमियों को राहत मिलती, लेकिन यहां भी निराशाजनक प्रदर्शन जारी रहा। आखिरी बार एकल वर्ग में प्रग्नेश गुणेश्वरन और अंकिता रैना ने भारत के लिए पदक जीते थे। दोनों को जकार्ता में 2018 में हुए एशियाई खेलों में कांस्य पदक मिला था।
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पिछली बार मिश्रित युगल में आया था मेडल
हांगझोउ में 2023 खेलों में भारत को एकल पदक नहीं मिला था। रोहन बोपन्ना और दिविज शरण ने 2018 में पुरुष युगल स्वर्ण और रोहन बोपन्ना के साथ रूतुजा भोसले ने 2023 में मिश्रित युगल में स्वर्ण जीता था। युकी भांबरी और एन श्रीराम बालाजी से पदक की उम्मीद थी, लेकिन वे पुरुष युगल और मिश्रित युगल मे हारकर बाहर हो गए। नागल अभी 29 साल के हैं और 2030 में दोहा एशियाई खेलों तक 33 के हो जाएंगे लिहाजा भारत को अगली जमात के टेनिस खिलाड़ियों की तलाश करनी होगी।

भारतीय कोच आशुतोष सिंह ने कहा, हम अच्छा नतीजा चाहते थे क्योंकि टीम के पास काबिलियत और अनुभव था। एक टीम के रूप में हम नतीजे की जिम्मेदारी लेते हैं। बहाने बनाने का कोई फायदा नहीं। लेकिन हालात, शेड्यूल, तैयारी और विरोधी टीम को देखते हुए आकलन जरूरी है, सिर्फ स्कोर देखकर नहीं।
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