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फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले में WFI का एक्शन: पांच पहलवान 4 साल के लिए निलंबित, रेफरी आयोग सदस्य को भी नोटिस
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Thu, 04 Jun 2026 07:43 PM IST
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सार
फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जमा करने के मामले में डब्ल्यूएफआई ने ट्रायल विजेता दीपांशु समेत पांच पहलवानों को चार साल के लिए निलंबित कर दिया है। वहीं, बेटे के मुकाबले में कोच की भूमिका निभाने के आरोप में रेफरी आयोग के सदस्य जयबीर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई)
- फोटो : WFI (facebook)
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विस्तार
भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने आयु धोखाधड़ी के खिलाफ अपनी कार्रवाई को तेज करते हुए पांच पहलवानों को चार साल के लिए निलंबित कर दिया है। इन पहलवानों के जन्म प्रमाण पत्र जांच के दौरान फर्जी पाए गए। वहीं, एक अलग मामले में डब्ल्यूएफआई ने रेफरी आयोग के सदस्य जयबीर को हितों के टकराव के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
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फर्जी जन्म प्रमाण पत्र पर पांच पहलवान निलंबित
डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय कुमार सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार, निलंबित किए गए पहलवानों में दीपांशु, तनुज अंतिल, बलजोत सिंह, निखिल दलाल और साकेत ड्राल शामिल हैं। महासंघ ने बताया कि हाल के महीनों में कई पहलवानों के जन्म प्रमाण पत्रों में गड़बड़ियां सामने आई थीं। इसके बाद संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई गई।
एशियन चैंपियनशिप ट्रायल विजेता दीपांशु भी कार्रवाई की जद में
बुधवार को अंडर-20 एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप ट्रायल में पुरुष फ्रीस्टाइल 65 किग्रा वर्ग के विजेता रहे दीपांशु का जन्म प्रमाण पत्र भी फर्जी पाया गया। इसके बाद उन्हें भारतीय टीम से बाहर कर दिया गया है। उनकी जगह अब पवन बालाजी धायगुड़े को टीम में शामिल किया गया है। अंडर-20 एशियाई चैंपियनशिप 27 जून से थाईलैंड के पटाया में आयोजित होगी।
डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय कुमार सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार, निलंबित किए गए पहलवानों में दीपांशु, तनुज अंतिल, बलजोत सिंह, निखिल दलाल और साकेत ड्राल शामिल हैं। महासंघ ने बताया कि हाल के महीनों में कई पहलवानों के जन्म प्रमाण पत्रों में गड़बड़ियां सामने आई थीं। इसके बाद संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई गई।
एशियन चैंपियनशिप ट्रायल विजेता दीपांशु भी कार्रवाई की जद में
बुधवार को अंडर-20 एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप ट्रायल में पुरुष फ्रीस्टाइल 65 किग्रा वर्ग के विजेता रहे दीपांशु का जन्म प्रमाण पत्र भी फर्जी पाया गया। इसके बाद उन्हें भारतीय टीम से बाहर कर दिया गया है। उनकी जगह अब पवन बालाजी धायगुड़े को टीम में शामिल किया गया है। अंडर-20 एशियाई चैंपियनशिप 27 जून से थाईलैंड के पटाया में आयोजित होगी।
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साकेत ड्राल को फाइनल से हटाया गया
86 किग्रा वर्ग में ट्रायल के फाइनल तक पहुंचे साकेत ड्राल को भी फर्जी दस्तावेज मामले में कार्रवाई का सामना करना पड़ा। उन्हें फाइनल मुकाबले से हटा दिया गया और उनकी जगह साहिल दलाल को मौका मिला। बाद में साहिल ने भारतीय टीम में स्थान हासिल किया।
चंडीगढ़ नगर निगम से हुई जांच
डब्ल्यूएफआई के अनुसार, चंडीगढ़ नगर निगम के जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रार कार्यालय से कराई गई जांच में पता चला कि इन पांचों पहलवानों द्वारा जमा किए गए जन्म प्रमाण पत्रों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसके बाद महासंघ ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए सभी को तत्काल प्रभाव से चार वर्षों के लिए सभी कुश्ती गतिविधियों से निलंबित कर दिया।
86 किग्रा वर्ग में ट्रायल के फाइनल तक पहुंचे साकेत ड्राल को भी फर्जी दस्तावेज मामले में कार्रवाई का सामना करना पड़ा। उन्हें फाइनल मुकाबले से हटा दिया गया और उनकी जगह साहिल दलाल को मौका मिला। बाद में साहिल ने भारतीय टीम में स्थान हासिल किया।
चंडीगढ़ नगर निगम से हुई जांच
डब्ल्यूएफआई के अनुसार, चंडीगढ़ नगर निगम के जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रार कार्यालय से कराई गई जांच में पता चला कि इन पांचों पहलवानों द्वारा जमा किए गए जन्म प्रमाण पत्रों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसके बाद महासंघ ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए सभी को तत्काल प्रभाव से चार वर्षों के लिए सभी कुश्ती गतिविधियों से निलंबित कर दिया।
आयु धोखाधड़ी पर सख्त रुख
महासंघ ने कहा कि आयु में हेरफेर की समस्या लंबे समय से आयु वर्ग प्रतियोगिताओं को प्रभावित करती रही है। ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
रेफरी आयोग के सदस्य जयबीर को कारण बताओ नोटिस
एक अन्य मामले में डब्ल्यूएफआई ने रेफरी आयोग के सदस्य और अंतरराष्ट्रीय रेफरी जयबीर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। महासंघ के मुताबिक, 31 मई को लखनऊ में आयोजित एशियाई खेल चयन ट्रायल्स के दौरान जयबीर रेफरी की भूमिका में तैनात थे। इसी प्रतियोगिता में उनके बेटे रोनक दहिया ने 130 किग्रा ग्रीको-रोमन वर्ग में हिस्सा लिया था।
महासंघ ने कहा कि आयु में हेरफेर की समस्या लंबे समय से आयु वर्ग प्रतियोगिताओं को प्रभावित करती रही है। ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
रेफरी आयोग के सदस्य जयबीर को कारण बताओ नोटिस
एक अन्य मामले में डब्ल्यूएफआई ने रेफरी आयोग के सदस्य और अंतरराष्ट्रीय रेफरी जयबीर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। महासंघ के मुताबिक, 31 मई को लखनऊ में आयोजित एशियाई खेल चयन ट्रायल्स के दौरान जयबीर रेफरी की भूमिका में तैनात थे। इसी प्रतियोगिता में उनके बेटे रोनक दहिया ने 130 किग्रा ग्रीको-रोमन वर्ग में हिस्सा लिया था।
बेटे के मैच में कोच की भूमिका निभाने का आरोप
डब्ल्यूएफआई का आरोप है कि 130 किग्रा वर्ग के फाइनल मुकाबले के दौरान जयबीर ने रेफरी की ड्यूटी छोड़कर अपने बेटे के कोच की भूमिका निभाई। महासंघ ने इसे निष्पक्षता और पेशेवर आचरण के नियमों का उल्लंघन बताया है।
10 जून तक मांगा जवाब
महासंघ ने जयबीर से 10 जून तक लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि, वर्तमान में वह मंगोलिया में चल रहे तीसरे रैंकिंग टूर्नामेंट में रेफरी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, जो 9 जून को समाप्त होगा। डब्ल्यूएफआई ने स्पष्ट किया है कि टूर्नामेंट समाप्त होने के बाद जयबीर को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया जाएगा और उनके जवाब के आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
डब्ल्यूएफआई का आरोप है कि 130 किग्रा वर्ग के फाइनल मुकाबले के दौरान जयबीर ने रेफरी की ड्यूटी छोड़कर अपने बेटे के कोच की भूमिका निभाई। महासंघ ने इसे निष्पक्षता और पेशेवर आचरण के नियमों का उल्लंघन बताया है।
10 जून तक मांगा जवाब
महासंघ ने जयबीर से 10 जून तक लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि, वर्तमान में वह मंगोलिया में चल रहे तीसरे रैंकिंग टूर्नामेंट में रेफरी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, जो 9 जून को समाप्त होगा। डब्ल्यूएफआई ने स्पष्ट किया है कि टूर्नामेंट समाप्त होने के बाद जयबीर को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया जाएगा और उनके जवाब के आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
डब्ल्यूएफआई का संदेश
महासंघ ने कहा कि सभी तकनीकी अधिकारियों और रेफरियों का दायित्व है कि वे किसी भी संभावित हितों के टकराव की जानकारी पहले से दें और ऐसी परिस्थितियों में स्वयं को संबंधित जिम्मेदारियों से अलग रखें, ताकि प्रतियोगिताओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे।
महासंघ ने कहा कि सभी तकनीकी अधिकारियों और रेफरियों का दायित्व है कि वे किसी भी संभावित हितों के टकराव की जानकारी पहले से दें और ऐसी परिस्थितियों में स्वयं को संबंधित जिम्मेदारियों से अलग रखें, ताकि प्रतियोगिताओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे।