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CWG 2026: नीरज चोपड़ा की किस सलाह ने ग्लास्गो में यशवीर का काम किया आसान? भाला फेंक खिलाड़ी ने किया खुलासा
Mon, 03 Aug 2026 06:27 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Mon, 03 Aug 2026 06:27 PM IST
सार
भारत के भाला फेंक एथलीट यशवीर सिंह ने राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक लाने का श्रेय नीरज चोपड़ा को दिया है। यशवीर ने बताया है कि किस तरह अंतिम समय में नीरज की सलाह से वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सके।
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यशवीर और नीरज
- फोटो : IANS
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विस्तार
यशवीर सिंह ने ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा की आखिरी पल की एक आसान सी सलाह को अपनी जिंदगी का सबसे शानदार थ्रो करने का श्रेय दिया जिससे भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में सातवें स्थान से आगे बढ़ते हुए कांस्य पदक जीता। अंतिम दौर से पहले यशवीर 81.33 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ सातवें स्थान पर थे, जबकि दक्षिण अफ्रीका के डाउ स्मिट 82.88 मीटर के प्रयास के साथ तीसरे स्थान पर थे।
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यशवीर बोले- अपना शत प्रतिशत देना चाहता था
सोमवार को राष्ट्रमंडल खेलों से लौटने के बाद दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यशवीर ने बताया, मुझे प्रतिकूल हालात से पार पाना था। नीरज ने मेरे आखिरी थ्रो से पहले मुझे प्रेरित किया और मेरा साथ दिया। उन्होंने मुझे भाले को एक लाइन में रखने के लिए कहा और इसका फायदा हुआ। यह मेरी ज़िंदगी के सबसे बड़े टूर्नामेंट में से एक था इसलिए मेरा एकमात्र मकसद अपना शत प्रतिशत देना था। मैं वहां अपना निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहता था। मुझे खुशी है कि मैंने 85.41 मीटर का निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हासिल किया और उस प्रदर्शन के साथ कांस्य पदक भी जीता।
सोमवार को राष्ट्रमंडल खेलों से लौटने के बाद दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यशवीर ने बताया, मुझे प्रतिकूल हालात से पार पाना था। नीरज ने मेरे आखिरी थ्रो से पहले मुझे प्रेरित किया और मेरा साथ दिया। उन्होंने मुझे भाले को एक लाइन में रखने के लिए कहा और इसका फायदा हुआ। यह मेरी ज़िंदगी के सबसे बड़े टूर्नामेंट में से एक था इसलिए मेरा एकमात्र मकसद अपना शत प्रतिशत देना था। मैं वहां अपना निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहता था। मुझे खुशी है कि मैंने 85.41 मीटर का निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हासिल किया और उस प्रदर्शन के साथ कांस्य पदक भी जीता।
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भाला फेंकते समय इसे एक लाइन में (या कंधे के साथ एक सीध में) रखना एक जरूरी तकनीक है क्योंकि इससे अधिक से अधिक दूरी हासिल करने में मदद मिलती है और भाला फेंकने वाले हाथ पर दबाव कम होता है। जब पूछा गया कि नीरज की सलाह मानने के लिए उन्होंने असल में क्या किया तो यशवीर ने बताया कि इसका मतलब था भाले को कान के स्तर के पास पकड़ना, अपने कंधों को भाला फेंकने की दिशा में एक सीध में रखना, अपने हाथ और भाले को एक सीधी लाइन में पीछे खींचना और उसी लाइन में अपने कंधे के ऊपर से छोड़ना।
'बिना दबाव के किया मुकाबला'
यशवीर ने माना कि उन्होंने बिना किसी दबाव के मुकाबला किया क्योंकि सभी का ध्यान नीरज और उनके प्रतिस्पर्धियों पर था जिनमें ओलंपिक और गत चैंपियन अरशद नदीम, श्रीलंका के रुमेश पथिरागे और दक्षिण अफ्रीका के एंडरसन पीटर्स शामिल थे। उन्होंने कहा, मुझ पर कोई दबाव नहीं था क्योंकि सभी का ध्यान नीरज, नदीम और रुमेश पर था। मुझे बस अपना शत प्रतिशत देना था। मैं खुद से कहता रहा कि अपना निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हासिल करूं। भगवान मेहरबान थे और ऐसा हो गया।
यशवीर ने माना कि उन्होंने बिना किसी दबाव के मुकाबला किया क्योंकि सभी का ध्यान नीरज और उनके प्रतिस्पर्धियों पर था जिनमें ओलंपिक और गत चैंपियन अरशद नदीम, श्रीलंका के रुमेश पथिरागे और दक्षिण अफ्रीका के एंडरसन पीटर्स शामिल थे। उन्होंने कहा, मुझ पर कोई दबाव नहीं था क्योंकि सभी का ध्यान नीरज, नदीम और रुमेश पर था। मुझे बस अपना शत प्रतिशत देना था। मैं खुद से कहता रहा कि अपना निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हासिल करूं। भगवान मेहरबान थे और ऐसा हो गया।