महंगे हो रहे नए फोन: बढ़ रही Refurbished Smartphone की डिमांड, लेकिन खरीदने से पहले जान लें ये 3 बड़े खतरे!
Refurbished Phone Buying Guide: स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों के बीच भारत में रिफर्बिश्ड फोन की मांग तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, कम कीमत के लालच में खरीदने से पहले वॉरंटी, सॉफ्टवेयर अपडेट और नकली पार्ट्स जैसे तीन बड़े जोखिमों को समझना बेहद जरूरी है। जानिए रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन खरीदने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, ताकि बाद में नुकसान न उठाना पड़े।
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विस्तार
साल 2026 में नए स्मार्टफोन्स खरीदना काफी महंगा हो गया है। फोन में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी (NAND और DRAM) की कीमतें बढ़ने के कारण, लगभग सभी कंपनियों ने अपने स्मार्टफोन्स के दाम 8 से 12 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं। ऐसे में भारतीय ग्राहक अब पैसे बचाने के लिए रिफर्बिश्ड फोन्स की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं। अब यह कोई मजबूरी या जुगाड़ नहीं, बल्कि एक स्मार्ट पसंद बन गया है।
हाल ही में ट्रैकिन टेक और टेकआर्क की एक जॉइंट स्टडी में सामने आया है कि 6% स्मार्टफोन खरीदार अब नए फोन के बजाय रिफर्बिश्ड फोन लेना पसंद कर रहे हैं। रिफर्बिश्ड फोन खरीदकर आप अपने हजारों रुपये तो बचा सकते हैं, लेकिन अगर आपने सावधानी नहीं बरती, तो आपको भारी नुकसान भी हो सकता है। आइए समझते हैं कि रिफर्बिश्ड फोन खरीदने से पहले आपको किन 3 बड़े खतरों के बारे में जरूर पता होना चाहिए।
वॉरंटी की टेंशन
जब आप कोई नया फोन खरीदते हैं, तो आपको कंपनी की तरफ से 1 साल की पक्की वॉरंटी मिलती है। लेकिन रिफर्बिश्ड फोन में ऐसा नहीं होता।
- कंपनी की वॉरंटी नहीं: ज्यादातर रिफर्बिश्ड फोन में ओरिजिनल ब्रांड की वॉरंटी खत्म हो चुकी होती है।
- दुकानदार की वॉरंटी: आमतौर पर आपको इसे बेचने वाले रिटेलर या वेबसाइट की तरफ से वॉरंटी दी जाती है, जो मुश्किल से 3 महीने की होती है।
- सलाह: फोन खरीदने से पहले हमेशा चेक करें कि आपको वॉरंटी मिल रही है या नहीं, और अगर मिल रही है तो कितनी और किसकी तरफ से।
पुराना सॉफ्टवेयर और अपडेट्स की कमी
अगर आप एपल, सैमसंग या गूगल पिक्सेल के अलावा किसी और ब्रांड का पुराना रिफर्बिश्ड फोन ले रहे हैं, तो सॉफ्टवेयर एक बड़ी दिक्कत बन सकता है।
- जल्दी बंद होते अपडेट्स: 2025 से पहले बने फोन्स में कंपनियां बहुत कम एंड्रॉयड अपडेट्स देती थीं।
- हैकिंग का खतरा: उदाहरण के लिए, अगर किसी फोन में एंड्रॉयड 13 के बाद अपडेट आना बंद हो गया है, तो आपको नए सिक्योरिटी पैच नहीं मिलेंगे। इससे आपके फोन का डेटा हैक होने या वायरस आने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
नकली पार्ट्स का झंझट
आप रिफर्बिश्ड फोन कहां से खरीद रहे हैं, यह सबसे ज्यादा मायने रखता है। किसी लोकल या अनजान सेलर से फोन लेना रिस्की हो सकता है।
- लोकल पार्ट्स का इस्तेमाल: पुराने फोन को चमकाने या ठीक करने के लिए कई बार दुकानदार असली पार्ट्स की जगह सस्ते लोकल पार्ट्स का इस्तेमाल करते हैं।
- परफॉर्मेंस में दिक्कत: अगर आपके रिफर्बिश्ड फोन में लोकल स्क्रीन या लोकल बैटरी लगी है, तो कुछ ही दिनों में टचस्क्रीन का ठीक से काम ना करना या बैटरी का जल्दी खत्म होना जैसी परेशानियां शुरू हो सकती हैं।
क्या आपको रिफर्बिश्ड फोन खरीदना चाहिए?
रिफर्बिश्ड फोन खरीदना कोई बुरा सौदा नहीं है, बशर्ते आप इसे किसी भरोसेमंद और सर्टिफाइड प्लेटफॉर्म से खरीदें। फोन लेने से पहले उसकी वॉरंटी, सॉफ्टवेयर अपडेट्स की स्थिति और उसके पार्ट्स की जांच जरूर कर लें, ताकि आपके बचाए हुए पैसे किसी कबाड़ में न फंस जाएं।