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Global EV Sales Crash: क्यों कम हो रही है इलेक्ट्रिक कारों की रफ्तार? जानें फरवरी 2026 के चौंकाने वाले आंकड़े

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jagriti Updated Fri, 13 Mar 2026 10:24 AM IST
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सार

Global EV Sales Drop Feb 2026: इलेक्ट्रिक कारों के वैश्विक बाजार के लिए फरवरी का महीना निराशाजनक रहा। बेंचमार्क मिनरल इंटेलिजेंस (BMI) के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक ईवी रजिस्ट्रेशन में 11% की गिरावट आई है। चीन में सब्सिडी खत्म होने और अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की नई नीतियों के कारण ईवी की बिक्री फरवरी 2024 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। जानें, आखिर क्यों दुनिया भर में लोग अब इलेक्ट्रिक कारों से दूरी बना रहे हैं...
 

EV Sales Slowdown: Why Global Electric Vehicle Market Just Saw Massive 11% Dip
ev - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री की रफ्तार में फरवरी महीने में गिरावट देखी गई। बेंचमार्क मिनरल इंटेलिजेंस (Benchmark Mineral Intelligence - BMI) के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में वैश्विक ईवी रजिस्ट्रेशन में लगभग 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। लगातार दूसरे महीने आई इस गिरावट के बाद कुल बिक्री करीब दस लाख से कुछ अधिक कारों तक सीमित रह गई, जो फरवरी 2024 के बाद का सबसे निचला स्तर है।
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चीन में सबसे बड़ी गिरावट
दुनिया के सबसे बड़े ईवी बाजार चीन में स्थिति सबसे ज्यादा कमजोर रही। यहां बैटरी-इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड कारों के रजिस्ट्रेशन में सालाना आधार पर 32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और बिक्री पांच लाख से नीचे आ गई। ये गिरावट देश में कुल कार बिक्री में आई 34 प्रतिशत की कमी के लगभग बराबर है, जैसा कि चाइना एसोसिएशन ऑफ ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स के डेटा में सामने आया है।
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एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके पीछे कई हो सकते हैं। जैसे सरकार की ओर से ऑटो ट्रेड-इन योजना के लिए फंडिंग बंद होना।
  • ईवी खरीद पर टैक्स छूट समाप्त होना।
  • घरेलू बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा और कीमतों की लड़ाई जैसे कारण प्रमुख माने जा रहे हैं।
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अधिकारियों का क्या कहना है?
बीएमआई के डेटा मैनेज चार्ल्स लेस्टर के अनुसार उपभोक्ता इस समय कीमत को लेकर बेहद संवेदनशील हैं, इसलिए सरकारी प्रोत्साहन कम होते ही मांग पर असर दिखाई दे रहा है।

अमेरिका और उत्तरी अमेरिका में मांग कमजोर
यहीं नहीं ईवी बाजार में गिरावट का असर उत्तरी अमेरिका में भी साफ देखा गया। यहां फरवरी में ईवी बिक्री 35 प्रतिशत से गिरकर करीब 90 हजार से कम रह गई। इस गिरावट की वजह यूनाइटेड स्टेट्स में ईवी टैक्स क्रेडिट योजना का खत्म होना बताया जा रहा है। साथ ही डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन की ओर से CO₂ उत्सर्जन मानकों में संभावित ढील देने के प्रस्ताव ने भी कंपनियों की रणनीतियों को प्रभावित किया है। विश्लेषकों के अनुसार ईवी मांग में आई ठंडक और नीति बदलावों की वजह से अमेरिकी बाजार में अधिक निवेश करने वाली कई कंपनियों को 70 अरब डॉलर से ज्यादा का मूल्यह्रास (write-down) दर्ज करना पड़ा है।

यूरोप में बढ़त लेकिन रफ्तार धीमी
दूसरी ओर यूरोप में ईवी बिक्री की रफ्तार तो बढ़ी है, लेकिन पिछले साल की तुलना में धीमी मानी जा रही है। फरवरी में यहां 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। यूरोपीय देशों ने भी हाल के महीनों में उत्सर्जन लक्ष्यों और प्रोत्साहन योजनाओं में कुछ नरमी दिखाई है, जिससे बाजार की गति थोड़ी कम हुई है।

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उभरते बाजारों में तेजी
दिलचस्प बात ये है कि एशिया के अन्य बाजारों, ऑस्ट्रेलिया और कुछ यूरोपीय देशों में ईवी की मांग तेजी से बढ़ रही है। बाकी दुनिया के बाजारों में फरवरी में ईवी रजिस्ट्रेशन 78 प्रतिशत बढ़कर 1.8 लाख से ज्यादा हो गए। इस तेजी के पीछे मुख्य भूमिका चीनी कंपनियों की है, जो घरेलू बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा की वजह से अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी से विस्तार कर रही हैं।

कैसे बढ़ेगी रफ्तार?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि वैश्विक ईवी उद्योग अभी भी विकास के दौर में है, लेकिन अगले कुछ वर्षों में इसकी दिशा तीन प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी—
  • सरकारी सब्सिडी और नीतियां।
  • बैटरी की कीमत और तकनीक में सुधार।
  • चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार।
अगर सरकारें फिर से प्रोत्साहन योजनाओं को मजबूत करती हैं और बैटरी लागत घटती है, तो ईवी बाजार की रफ्तार दोबारा तेज हो सकती है। अभी के लिए माना जा रहा है कि इलेक्ट्रिक कारों का बाजार तेजी से बढ़ने के बाद एक री-बैलेंस के दौर से गुजर रहा है।
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