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ट्रूकॉलर का बड़ा अपडेट: अब कॉल आने पर दिखेगा लिंक्डइन प्रोफेशनल, दिखा सकेंगे कंपनी और जॉब की जानकारी
Sun, 27 Sep 2026 03:13 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Sun, 27 Sep 2026 03:13 PM IST
सार
Truecaller ने LinkedIn के साथ एक शानदार पार्टनरशिप की है, जिससे अब कॉलिंग कार्ड पर यूजर्स की प्रोफेशनल डिटेल्स नजर आएंगी। यह नया फीचर फेक कॉल्स पर लगाम कसने और कॉलर की सही पहचान बताने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
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लिंक्डइन
- फोटो : FREEPIK
विस्तार
पॉपुलर कॉलर आईडी प्लेटफॉर्म ट्रूकॉलर (Truecaller) ने अब प्रोफेशनल नेटवर्किंग साइट लिंक्डइन (LinkedIn) के साथ एक बेहद खास और उपयोगी पार्टनरशिप की घोषणा की है। इस नए गठजोड़ के बाद स्मार्टफोन यूजर्स का कॉलिंग अनुभव पूरी तरह से बदलने वाला है। अब जब भी किसी का फोन आएगा, तो ट्रूकॉलर की स्क्रीन पर सिर्फ नाम ही नहीं, बल्कि कॉलर की लिंक्डइन प्रोफाइल की डिटेल्स भी नजर आएंगी।
कॉलिंग कार्ड पर दिखेगा जॉब टाइटल और वर्कप्लेस
इस नए इंटीग्रेशन के जरिए यूजर्स अपने ट्रूकॉलर कॉलिंग कार्ड पर अपनी प्रोफेशनल पहचान दिखा सकते हैं। अगर कोई यूजर अपने लिंक्डइन अकाउंट को ट्रूकॉलर से लिंक करता है, तो कॉल करते समय उसका जॉब टाइटल, कंपनी का नाम और वेरीफाइड प्रोफाइल पिक्चर सामने वाले की स्क्रीन पर दिखाई देगी। इस फीचर की सबसे खास बात यह है कि कॉल रिसीव करने वाला व्यक्ति सीधे उस कॉलर की लिंक्डइन प्रोफाइल की जानकारी देख सकता है। इससे अनजान कॉलर के पेशेवर बैकग्राउंड को समझना और भी आसान हो जाएगा।
पूरी तरह से ऑप्शनल है यह फीचर
यूजर्स की प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए इस शानदार फीचर को पूरी तरह से ऑप्शनल रखा गया है। इसका मतलब है कि सिर्फ उन्हीं लोगों की प्रोफेशनल डिटेल ट्रूकॉलर पर शेयर होगी, जो खुद सेटिंग में जाकर इस विकल्प को चुनेंगे। नए और पुराने दोनों तरह के लिंक्डइन यूजर्स 'वेरीफाइड ऑन लिंक्डइन' टूल का इस्तेमाल करके अपने वर्कप्लेस की सही जानकारी कॉलर आईडी पर जोड़ सकते हैं।
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फर्जी प्रोफाइल्स पर लगेगी लगाम
यह कदम लिंक्डइन और ट्रूकॉलर दोनों के लिए फेक अकाउंट्स और स्पैमर्स से लड़ने का एक बड़ा हथियार साबित होने वाला है। हाल ही में लिंक्डइन ने अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाने के लिए कई नए वेरिफिकेशन टूल्स पेश किए हैं। अब प्लेटफॉर्म पर ऐसे यूजर्स एक-दूसरे को वेरीफाई कर सकेंगे, जो कम से कम एक साल से एक-दूसरे को जानते हों। इन सख्त नियमों से असली और भरोसेमंद प्रोफाइल्स को बढ़ावा मिलेगा, जिससे धोखाधड़ी की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
कंपनियों को भी मिलेगा खास कंट्रोल
इस डीप इंटीग्रेशन का फायदा कंपनियों को भी मिलेगा। लिंक्डइन पर मौजूद कंपनी पेजों के एडमिन अब ऐसे फर्जी लोगों की आसानी से पहचान कर सकेंगे, जो खुद को झूठा कर्मचारी बताते हैं। कंपनियों के पास यह अधिकार होगा कि वे तय कर सकें कि उनके ब्रांड के साथ सर्च रिजल्ट में कौन दिखाई दे। इसके अलावा एक स्पेशल वेरिफिकेशन प्रोसेस भी शुरू किया जा रहा है, जो सीधे वर्कप्लेस के जरिए कर्मचारियों के दावों को पुख्ता करेगा। ट्रूकॉलर पर सिर्फ वही जानकारियां डिस्प्ले होंगी, जो लिंक्डइन की ओर से पूरी तरह से जांची और परखी गई हों।
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कॉलिंग कार्ड पर दिखेगा जॉब टाइटल और वर्कप्लेस
इस नए इंटीग्रेशन के जरिए यूजर्स अपने ट्रूकॉलर कॉलिंग कार्ड पर अपनी प्रोफेशनल पहचान दिखा सकते हैं। अगर कोई यूजर अपने लिंक्डइन अकाउंट को ट्रूकॉलर से लिंक करता है, तो कॉल करते समय उसका जॉब टाइटल, कंपनी का नाम और वेरीफाइड प्रोफाइल पिक्चर सामने वाले की स्क्रीन पर दिखाई देगी। इस फीचर की सबसे खास बात यह है कि कॉल रिसीव करने वाला व्यक्ति सीधे उस कॉलर की लिंक्डइन प्रोफाइल की जानकारी देख सकता है। इससे अनजान कॉलर के पेशेवर बैकग्राउंड को समझना और भी आसान हो जाएगा।
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पूरी तरह से ऑप्शनल है यह फीचर
यूजर्स की प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए इस शानदार फीचर को पूरी तरह से ऑप्शनल रखा गया है। इसका मतलब है कि सिर्फ उन्हीं लोगों की प्रोफेशनल डिटेल ट्रूकॉलर पर शेयर होगी, जो खुद सेटिंग में जाकर इस विकल्प को चुनेंगे। नए और पुराने दोनों तरह के लिंक्डइन यूजर्स 'वेरीफाइड ऑन लिंक्डइन' टूल का इस्तेमाल करके अपने वर्कप्लेस की सही जानकारी कॉलर आईडी पर जोड़ सकते हैं।
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फर्जी प्रोफाइल्स पर लगेगी लगाम
यह कदम लिंक्डइन और ट्रूकॉलर दोनों के लिए फेक अकाउंट्स और स्पैमर्स से लड़ने का एक बड़ा हथियार साबित होने वाला है। हाल ही में लिंक्डइन ने अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाने के लिए कई नए वेरिफिकेशन टूल्स पेश किए हैं। अब प्लेटफॉर्म पर ऐसे यूजर्स एक-दूसरे को वेरीफाई कर सकेंगे, जो कम से कम एक साल से एक-दूसरे को जानते हों। इन सख्त नियमों से असली और भरोसेमंद प्रोफाइल्स को बढ़ावा मिलेगा, जिससे धोखाधड़ी की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
कंपनियों को भी मिलेगा खास कंट्रोल
इस डीप इंटीग्रेशन का फायदा कंपनियों को भी मिलेगा। लिंक्डइन पर मौजूद कंपनी पेजों के एडमिन अब ऐसे फर्जी लोगों की आसानी से पहचान कर सकेंगे, जो खुद को झूठा कर्मचारी बताते हैं। कंपनियों के पास यह अधिकार होगा कि वे तय कर सकें कि उनके ब्रांड के साथ सर्च रिजल्ट में कौन दिखाई दे। इसके अलावा एक स्पेशल वेरिफिकेशन प्रोसेस भी शुरू किया जा रहा है, जो सीधे वर्कप्लेस के जरिए कर्मचारियों के दावों को पुख्ता करेगा। ट्रूकॉलर पर सिर्फ वही जानकारियां डिस्प्ले होंगी, जो लिंक्डइन की ओर से पूरी तरह से जांची और परखी गई हों।