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Anthropic: चैटजीपीटी छोड़कर एंथ्रोपिक डाउनलोड कर रहे यूजर्स, एप पर हर दिन हो रहे 10 लाख से ज्यादा साइन-अप

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Sat, 07 Mar 2026 04:02 PM IST
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सार

Anthropic Supply Chain Risk: अमेरिकी सेना (पेंटागन) के साथ डील ठुकराने पर अमेरिकी सरकार ने एआई कंपनी एंथ्रोपिक को सप्लाई चेन रिस्क घोषित कर दिया है। कंपनी इस फैसले को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। राहत की बात यह है कि इसका आम यूजर्स पर कोई असर नहीं होगा। दिलचस्प बात यह है कि इस विवाद के बीच चैटजीपीटी को छोड़कर हर दिन लाखों नए यूजर्स एंथ्रोपिक के एआई चैटबॉट क्लाउड से जुड़ रहे हैं।

US Government Labels Anthropic as Supply Chain Risk After Pentagon Deal Dispute
एंथ्रोपिक (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : AI
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विस्तार

अमेरिकी सरकार और मशहूर एआई कंपनी एंथ्रोपिक के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी सरकार ने इस कंपनी को आधिकारिक तौर पर सप्लाई चेन रिस्क घोषित कर दिया है। टेक जगत में यह खबर चर्चा का विषय बनी हुई है। खासकर इसलिए क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी अमेरिकी कंपनी को ही यह लेबल दिया गया है। आइए समझते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है और इसका हम जैसे आम यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा।

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क्या है पूरा मामला?

दरअसल अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन, एंथ्रोपिक के साथ एक इंटेलिजेंस समझौता करना चाहता था। लेकिन कंपनी ने इस साझेदारी से खुद को अलग कर लिया। एंथ्रोपिक का स्पष्ट कहना था कि वे किसी भी तरह की मास सर्विलांस और पूरी तरह से स्वायत्त हथियारों के विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं। कंपनी के इसी इनकार के बाद अमेरिकी सरकार ने एक्शन लेते हुए उसे सप्लाई चेन रिस्क की कैटेगरी में डाल दिया।

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सप्लाई चेन रिस्क का मतलब क्या है?

इसका मतलब यह है कि अमेरिकी अधिकारियों को लगता है कि इस कंपनी के साथ काम करना या इसकी तकनीक का इस्तेमाल करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। हालांकि, एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने सरकार के इस फैसले को कानूनी रूप से पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि कंपनी इस फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएगी।

क्या आम यूजर्स पर पड़ेगा असर?

अगर आप क्लाउड एआई का इस्तेमाल करते हैं तो आपको बिल्कुल परेशान होने की जरूरत नहीं है। कंपनी के सीईओ ने साफ किया है कि इस सरकारी फैसले से आम यूजर्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा। क्लाउड चैटबॉट हमेशा की तरह ही सामान्य रूप से काम करता रहेगा। यह लेबल मुख्य रूप से सरकारी सिस्टम्स के लिए बनाया गया है न कि आम जनता की सर्विस रोकने के लिए।

चैटजीपीटी के यूजर्स आ रहे हैं क्लाउड पर

इस विवाद का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि इससे एंथ्रोपिक को नुकसान के बजाय फायदा होता दिख रहा है। कंपनी के सह-संस्थापक माइक क्रेगर के अनुसार, इन दिनों हर रोज 10 लाख से ज्यादा नए लोग क्लाउड के लिए साइन-अप कर रहे हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो इनमें से ज्यादातर वो यूजर्स हैं जो चैटजीपीटी छोड़कर आ रहे हैं। 

ऐसा क्यों हो रहा है? 

इसके पीछे की वजह यह है कि चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई ने हाल ही में अमेरिकी सेना के साथ एक समझौता किया है। ओपनएआई के इस कदम की कई यूजर्स आलोचना कर रहे हैं और वे एक ऐसे एआई की तलाश में हैं जो सैन्य प्रोजेक्ट्स से दूर हो।

आगे क्या?

लीक हुए कुछ इंटर्नल मेमो के अनुसार, एंथ्रोपिक के सीईओ का मानना है कि ओपनएआई और सेना की डील सिर्फ एक दिखावा है। वहीं ओपनएआई के सीईओ सैम आल्टमैन ने भी कथित तौर पर अपनी डील को जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया है। कुल मिलाकर, एआई कंपनियों और सेना के बीच काम करने को लेकर यह बहस अभी और गरमा सकती है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे देखने को मिल सकते हैं।

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