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SIM Binding: वॉट्सएप-टेलीग्राम पर सख्ती, पर इन एप्स को मिल सकती है छूट; जानें सिम बाइंडिंग पर सरकार का नया रुख

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jagriti Updated Sat, 07 Mar 2026 11:05 AM IST
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सार

Government on SIM Binding: भारत में लागू किए गए सिम बाइंडिंग नियमों को लेकर अब नई चर्चा शुरू हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार इन नियमों में कुछ ढील देने पर विचार कर रही है। संभावना है कि जिन प्लेटफॉर्म्स का मुख्य काम मैसेजिंग नहीं है, उन्हें इससे छूट मिल सकती है। जानिए क्या है सरकार का नया नरम रुख और आपकी प्राइवेसी पर इसका क्या असर होगा ?
 

SIM Binding: Strict Rules WhatsApp, but Exemption Instagram-LinkedIn? Know Govt’s New Stance
सिम बाइंडिंग नियम - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार

भारत में मैसेजिंग एप्स की सुरक्षा बढ़ाने और ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के लिए लागू किए गए सिम बाइंडिंग नियमों को लेकर अब नई जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार इन नियमों में कुछ बदलाव या ढील देने पर विचार कर रही है। बताया जा रहा है कि यह छूट उन प्लेटफॉर्म्स को मिल सकती है जिनका मुख्य काम वन-टू-वन मैसेजिंग नहीं है।
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सिम बाइंडिंग नियम क्या है?
सबसे पहले समझते हैं आखिर सिम बाइंडिंग है क्या? सिम बाइंडिंग का मतलब होता है कि किसी भी मैसेजिंग एप जैसे व्हाट्सएप और टेलीग्राम का इस्तेमाल करने के लिए स्मार्टफोन में सक्रिय सिम कार्ड होना जरूरी होगा। इस नियम के तहत एप को मोबाइल सिम से लिंक किया जाएगा। अगर फोन से सिम कार्ड निकाल दिया जाता है तो एप काम करना बंद कर सकता है। डेस्कटॉप पर चलाने वाले यूजर्स की बात करें तो इन्हें हर 6 घंटे में दोबारा लॉग-इन करना पड़ सकता है। सरकार का मानना है कि इससे फेक अकाउंट, स्पैम और साइबर फ्रॉड को कम करने में मदद मिल सकती है।
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किन एप्स पर लागू हो सकता है नियम?
नियम मुख्य रूप से उन एप्स पर लागू हो सकता है जिनका प्रमुख काम मैसेजिंग का होता है। जैसे व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल, जीयोचैट, अरट्टाई। रिपोर्ट्स के अनुसार इन कंपनियों ने सिम बाइंडिंग को लागू करने की दिशा में तकनीकी काम भी शुरू कर दिया है।

किन एप्स को मिल सकती है छूट?
टेक कंपनियों का कहना है कि सभी एप्स को एक ही नियम के दायरे नहीं रखा जाएगा। कुछ एप्स जैसे इंस्टाग्राम और लिंक्डइन एप्स को कुछ राहत मिल सकती है। इन प्लेटफॉर्म्स में मैसेजिंग फीचर जरूर है, लेकिन इनका उद्देश्य अलग है, जैसे सोशल मीडिया कंटेंट या प्रोफेशनल नेटवर्किंग। यही वजह है कि कंपनियां चाहती हैँ कि सिम बाइंडिंग नियम केवल प्योर मैसेजिंग एप्स पर ही लागू किया जाए।

सरकार का रुख क्या है? 
रिपोर्ट्स के अनुसार इस मामले में दूरसंचार विभाग (DoT) इंडस्ट्री की चिंताओं पर विचार कर रहा है। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकना, फेक नंबर और फर्जी अकाउंट कम करना और यूजर की पहचान को सत्यापित करना है। इसी वजी से नियमों को थोड़ा लचीला बनाते हुए केवल कम्युनिकेशन एप्स पर लागू करने का विकल्प देखा जा सकता है।

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यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?
अगर सिम बाइंडिंग पूरी तरह लागू होता है तो यूजर्स के लिए कुछ बदलाव हो सकते हैं:
  • बिना सिम वाले टैबलेट या फोन में मैसेजिंग एप चलाना मुश्किल हो सकता है।
  • डेस्कटॉप लॉग-इन बार-बार करना पड़ सकता है।
  • अकाउंट सुरक्षा और पहचान सत्यापन मजबूत हो सकता है।
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