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AI Job : एआई से नौकरियां सुरक्षित, फिर क्यों घट रही युवाओं की हायरिंग? एंथ्रोपिक स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jagriti Updated Fri, 06 Mar 2026 06:14 PM IST
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सार

Anthropic AI Study: क्या एआई सच में नौकरियां खा रहा है? एंथ्रोपिक की ताजा रिपोर्ट एआई का लेबर मार्केट पर पर असर में एक चौंकाने वाला सच सामने लाई है। रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल सामूहिक बेरोजगारी (Mass Unemployment) का कोई संकेत नहीं है, लेकिन युवा वर्कर्स (Freshers) के लिए एंट्री-लेवल नौकरियों के दरवाजे धीरे-धीरे बंद हो रहे हैं। जानिए रिपोर्ट के बारे में विस्तार से...
 

Anthropic Report: AI n’t Killing Jobs Yet, but  Closing Door Young Professionals tech news hindi
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : adobe stock
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विस्तार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह सवाल बार-बार उठता है कि क्या एआई इंसानों की नौकरियां छीन लेगा। इसी मुद्दे पर एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने एक नई स्टडी जारी की है, जिसमें जॉब मार्केट पर एआई के असर का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल एआई की वजह से बड़े पैमाने पर बेरोजगारी नहीं बढ़ी है, लेकिन कुछ खास क्षेत्रों में भर्ती पैटर्न बदलने लगे हैं, जिनसे उनपर संकट मडरा सकता है।
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किन नौकरियों पर एआई का असर ज्यादा?
स्टडी में पाया गया कि व्हाइट-कॉलर और नॉलेज-बेस्ड जॉब्स एआई  के सबसे ज्यादा संपर्क में हैं। इनमें खास तौर पर कंप्यूटर प्रोग्रामर, कस्टमर सर्विस प्रतिनिधि, डेटा एंट्री ऑपरेटर, मार्केट रिसर्च एनालिस्ट और फाइनेंशियल और इन्वेस्टमेंट एनालिस्ट जैसे काम शामिल हैं। इन कामों में कई टास्क पहले से ही ऑटोमेशन या बड़े लैंग्वेज मॉडल (LLM) की मदद से तेजी से किए जा सकते हैं।
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किन नौकरियों पर खतरा कम
इसके उलट, जिन नौकरियों में फिजिकल या मैनुअल स्किल ज्यादा जरूरी होती है, वे अभी एआई से कम प्रभावित मानी जा रही हैं। जैसे कुक, मोटरसाइकिल मैकेनिक, लाइफगार्ड, बारटेंडर और ड्रेसिंग रूम अटेंडेंट जैसे काम। ऐसे कामों में इंसानी मौजूदगी और कौशल अभी भी जरूरी है।

स्टडी में एक अहम बात सामने आई कि 2022 के बाद से एआई से ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में युवा कर्मचारियों की भर्ती थोड़ी धीमी हुई है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अभी तक ऐसे पेशों में बेरोजगारी का कोई बड़ा उदाहरण नहीं देखा गया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियां अब नए कर्मचारियों को रखने से पहले यह देख रही हैं कि क्या वही काम एआई टूल्स से किया जा सकता है।

एआई की क्षमता और असल इस्तेमाल में बड़ा अंतर
रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई  की थ्योरी में जो क्षमता दिखाई देती है और असल दुनिया में उसका इस्तेमाल इन दोनों के बीच अभी बड़ा अंतर है। यानी एआई अभी भी उन सभी कामों को पूरी तरह नहीं कर सकता जिनके बारे में अनुमान लगाया जाता है।

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एआई  कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा भी तेज
एआई  सेक्टर में कंपनियों के बीच मुकाबला भी बढ़ता जा रहा है। जैसे ओपनएआई और चैटजीपीटी के बीच, गूगल और जेमिनी के बीच और क्लाउड एआई जैसे टूल्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार हाल के दिनों में क्लाउट चैटबॉट के डाउनलोड में तेजी आई है और कई देशों में यह ऐप स्टोर पर टॉप एआई एप्स में शामिल हो गया।

क्या बदल सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई जॉब मार्केट को पूरी तरह खत्म नहीं करेगा, बल्कि काम करने के तरीके को बदलेगा। नई तकनीक के साथ कुछ नौकरियां कम हो सकती हैं, लेकिन नई तरह की नौकरियां भी पैदा होंगी। इसके लिए कर्मचारियों को नए डिजिटल स्किल सीखने होंगे, इसलिए आने वाले समय में एआई  के साथ काम करना सीखना ही सबसे बड़ा करियर स्किल बन सकता है।

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