Meta AI Smart Glasses: मेटा के एआई स्मार्ट ग्लासेज पर अमेरिका में मुकदमा, यूजर डेटा और प्राइवेसी को लेकर सवाल
Meta AI Smart Glasses: मेटा के एआई स्मार्ट ग्लासेज एक बड़े प्राइवेसी विवाद में फंस गए हैं। आरोप है कि यूजर्स के प्राइवेट और संवेदनशील वीडियो को थर्ड-पार्टी कर्मचारियों ने देखा है। झूठे प्राइवेसी दावों को लेकर अमेरिका में कंपनी पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
विस्तार
स्मार्ट ग्लासेज पहनने के शौकीन लोगों के लिए एक परेशान करने वाली खबर सामने आई है। टेक दिग्गज मेटा अपने एआई स्मार्ट ग्लासेज को लेकर एक नए विवाद में घिर गई है। कंपनी पर आरोप है कि उसके ग्लासेज से रिकॉर्ड किए गए लोगों के बेहद निजी और संवेदनशील पलों को थर्ड-पार्टी कॉन्ट्रैक्टर्स ने देखा है। इस खुलासे के बाद यूजर्स की निजता पर बड़े सवाल उठ रहे हैं और अमेरिका में कंपनी के खिलाफ मुकदमा भी ठोक दिया गया है। आइए समझते हैं कि पूरा मामला क्या है और मेटा ने इस पर क्या सफाई दी है।
क्या है पूरा विवाद?
हाल ही में स्वीडिश मीडिया की एक जांच रिपोर्ट सामने आई थी। इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि केन्या की एक थर्ड-पार्टी कंपनी के कर्मचारी मेटा स्मार्ट ग्लासेज से रिकॉर्ड किए गए वीडियो और तस्वीरों की समीक्षा कर रहे थे। हैरानी की बात यह है कि इन वीडियो में लोगों के बेहद निजी पल शामिल थे। जैसे- नहाते या टॉयलेट का इस्तेमाल करते समय के वीडियो, यौन गतिविधियों से जुड़े फुटेज और नग्नता से जुड़े दृश्य। मेटा का दावा है कि जब कर्मचारी इन वीडियो को देखते हैं तो लोगों के चेहरे धुंधले कर दिए जाते हैं ताकि उनकी पहचान न हो सके। लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह ब्लरिंग सिस्टम अक्सर ठीक से काम नहीं करता है। इस खुलासे के बाद यूके की डेटा प्राइवेसी रेगुलेटर संस्था ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है।
ग्राहकों के साथ धोखे का आरोप
अमेरिका के न्यू जर्सी की रहने वाली जीना बार्टोन और कैलिफोर्निया के मेटो कानू ने 'क्लार्कसन लॉ फर्म' के जरिए मेटा और ग्लासेज बनाने वाली कंपनी लक्सोटिका पर मुकदमा दायर किया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मेटा ने अपने ग्लासेज को बेचते समय झूठे दावे किए। विज्ञापनों में कहा गया था, "डिजाइन्ड बाई प्राइवेसी, कंट्रोल्ड बाई यू" (प्राइवेसी के लिए डिजाइन किया गया, आपके कंट्रोल में), "बिल्ड फॉर योर प्राइवेसी" (आपकी प्राइवेसी के लिए बना)। इन दावों को देखकर ग्राहकों को लगा कि उनका डेटा पूरी तरह सेफ है। लेकिन कंपनी ने उन्हें यह साफ तौर पर नहीं बताया कि अगर वे एआई फीचर्स का इस्तेमाल करते हैं तो उनके डेटा को इंसान भी देख सकते हैं।
आरोपों पर मेटा ने क्या कहा?
मेटा ने इन आरोपों पर अपनी सफाई पेश करते हुए कहा है कि वह यूजर्स का डेटा चोरी-छिपे नहीं लेती है। कंपनी ने अपना काम करने का तरीका समझाया:
- डेटा फोन में रहता है: स्मार्ट ग्लासेज से खींची गई फोटो या वीडियो तब तक आपके फोन में सुरक्षित रहते हैं जब तक आप खुद उन्हें कहीं शेयर न करें।
- एआई के इस्तेमाल पर शेयर होता है डेटा: अगर आप अपनी फोटो या वीडियो पर 'मेटा एआई' का इस्तेमाल करते हैं तब वह डेटा मेटा के सर्वर पर जाता है।
- सर्विस बेहतर करने के लिए रिव्यू: मेटा के मुताबिक, एआई को और स्मार्ट बनाने के लिए कुछ मामलों में इंसान इस डेटा को चेक करते हैं। कंपनी का कहना है कि यह बात उनकी 'प्राइवेसी पॉलिसी' में पहले से लिखी हुई है।
क्यों अहम है यह मामला?
एआई वाले स्मार्ट गैजेट्स का चलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में मेटा ने 70 लाख से ज्यादा स्मार्ट ग्लासेज बेचे हैं। अब यह कानूनी लड़ाई इस बात पर तय होगी कि क्या कंपनियां विज्ञापन में जिस प्राइवेसी का वादा करती हैं, असल में गैजेट्स भी उसी तरह काम करते हैं या नहीं।
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