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Nearby Glasses App: अब कोई चुपके से नहीं बना पाएगा वीडियो, यह एप तुरंत देगा अलर्ट; जानें कैसे करेगा काम
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Sat, 07 Mar 2026 04:09 PM IST
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सार
Smart Glasses Privacy Alert: स्मार्ट ग्लासेस जैसी वियरेबल टेक्नोलॉजी तेजी से लोकप्रिय हो रही है, लेकिन इसके साथ प्राइवेसी को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं। इसी समस्या का समाधान देने के लिए एक खास एप विकसित किया गया है, जो आसपास मौजूद स्मार्ट ग्लासेस को ब्लूटूथ सिग्नल के जरिए पहचानकर यूजर को तुरंत अलर्ट कर सकता है।
नियरबाई स्मार्ट ग्लासेस एप
- फोटो : play.google
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विस्तार
पिछले कुछ वर्षों में स्मार्ट ग्लासेस वियरेबल टेक्नोलॉजी की दुनिया में तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। इन ग्लासेस की मदद से यूजर चलते-फिरते वीडियो रिकॉर्ड कर सकते हैं, फोटो ले सकते हैं और यहां तक कि अपने सामने मौजूद चीजों की जानकारी भी तुरंत पा सकते हैं, लेकिन जहां इस्तेमाल करने वाले के लिए यह तकनीक काफी सुविधाजनक है, वहीं आसपास मौजूद लोगों के लिए यह चिंता का कारण बन सकती है या फिर बन ही रही हैं।
इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए एक नया मोबाइल एप तैयार किया गया है, जो लोगों को यह पता लगाने में मदद कर सकता है कि उनके आसपास स्मार्ट ग्लासेस मौजूद हैं या नहीं। इसका नाम है नियरबाई ग्लासेस एप, जानिए क्या है ये और कैसे काम करता है...
क्या है नियरबाई ग्लासेस एप?
नियरबाई ग्लासेस एक ऐसा एप है जिसे खास तौर पर स्मार्ट ग्लासेस की मौजूदगी का पता लगाने के लिए बनाया गया है। यह एप आसपास मौजूद ब्लूटूथ सिग्नल्स को लगातार स्कैन करता रहता है। साथ ही कई स्मार्ट ग्लासेस और वियरेबल डिवाइस ब्लूटूथ के जरिए ही फोन या अन्य गैजेट्स से कनेक्ट होते हैं।
ये भी पढ़े: Meta AI Smart Glasses: मेटा के एआई स्मार्ट ग्लासेज पर अमेरिका में मुकदमा, यूजर डेटा और प्राइवेसी को लेकर सवाल
जैसे ही एप को किसी ऐसे ब्लूटूथ डिवाइस का संकेत मिलता है जो स्मार्ट ग्लासेस से जुड़ा हो सकता है, यह यूजर को तुरंत अलर्ट का नोटिफिकेशन भेज देता है। इससे सामने वाले को अंदाजा लग जाता है कि आसपास रिकॉर्डिंग सक्षम डिवाइस मौजूद है। इससे वो सतर्क हो सकता है।
कैसे आया इस एप का आइडिया?
इस एप को बनाने वाले डेवलपर यवेस जीनरेनॉड (Yves Jeanrenaud) को इसका विचार वियरेबल निगरानी तकनीक से जुड़ी रिपोर्ट पढ़ने के बाद आया। खासतौर पर रे-बैन मेटा स्मार्ट ग्लासेस से जुड़े कुछ विवादों ने उन्हें इस विषय पर सोचने के लिए प्रेरित किया। उनका मानना है कि अगर भविष्य में स्मार्ट ग्लासेस में चेहरे की पहचान जैसी सुविधाएं डिफॉल्ट रूप से शामिल होने लगें तो इससे निजता से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। इसलिए उन्होंने ऐसा टूल बनाने की कोशिश की जो आम लोगों को सतर्क रहने में मदद करे।
ये भी पढ़े: AI War: सैम ऑल्टमैन का एंथ्रोपिक CEO को करारा जवाब; कहा- तथ्य सुधारें, सरकार कंपनियों से ज्यादा शक्तिशाली है
कैसे काम करता है ये एप?
नियरबाई ग्लासेस एप का काम करने का तरीका काफी आसान है। यह आसपास मौजूद ब्लूटूथ सिग्नल्स को स्कैन करता है। दरअसल, हर हर ब्लूटूथ डिवाइस का एक पब्लिक आइडेंटिफायर होता है। ऐसे में अगर एप को ऐसा आइडेंटिफायर मिलता है जो स्मार्ट ग्लासेस से जुड़ा हो सकता है, तो वह तुरंत यूजर को अलर्ट नोटिफिकेशन भेज देता है। इसके अलावा एप यूजर को यह सुविधा भी देता है कि वे चाहें तो कुछ विशेष ब्लूटूथ पहचान संकेतों को खुद भी सूची में जोड़ सकते हैं। इससे निगरानी और अधिक सटीक हो सकती है।
क्यों जरूरी हो रही है ऐसी टेक्नोलॉजी?
आज के डिजिटल दौर में स्मार्ट ग्लासेस, स्मार्ट वॉच और अन्य वियरेबल डिवाइस तेजी से आम होते जा रहे हैं। हालांकि यह तकनीक लोगों की जिंदगी को आसान बनाती है, लेकिन इसके दुरुपयोग की आशंका भी बनी रहती है। इसी वजह से नियरबाई ग्लासेस जैसे एप लोगों को अपनी डिजिटल प्राइवेसी के प्रति जागरूक और सतर्क रहने में मदद कर सकते हैं। टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि आगे चलकर ऐसे टूल और भी जरूरी हो जाएंगे, क्योंकि वियरेबल डिवाइस का इस्तेमाल आने वाले समय में और तेजी से बढ़ने वाला है।
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क्या है नियरबाई ग्लासेस एप?
नियरबाई ग्लासेस एक ऐसा एप है जिसे खास तौर पर स्मार्ट ग्लासेस की मौजूदगी का पता लगाने के लिए बनाया गया है। यह एप आसपास मौजूद ब्लूटूथ सिग्नल्स को लगातार स्कैन करता रहता है। साथ ही कई स्मार्ट ग्लासेस और वियरेबल डिवाइस ब्लूटूथ के जरिए ही फोन या अन्य गैजेट्स से कनेक्ट होते हैं।
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जैसे ही एप को किसी ऐसे ब्लूटूथ डिवाइस का संकेत मिलता है जो स्मार्ट ग्लासेस से जुड़ा हो सकता है, यह यूजर को तुरंत अलर्ट का नोटिफिकेशन भेज देता है। इससे सामने वाले को अंदाजा लग जाता है कि आसपास रिकॉर्डिंग सक्षम डिवाइस मौजूद है। इससे वो सतर्क हो सकता है।
कैसे आया इस एप का आइडिया?
इस एप को बनाने वाले डेवलपर यवेस जीनरेनॉड (Yves Jeanrenaud) को इसका विचार वियरेबल निगरानी तकनीक से जुड़ी रिपोर्ट पढ़ने के बाद आया। खासतौर पर रे-बैन मेटा स्मार्ट ग्लासेस से जुड़े कुछ विवादों ने उन्हें इस विषय पर सोचने के लिए प्रेरित किया। उनका मानना है कि अगर भविष्य में स्मार्ट ग्लासेस में चेहरे की पहचान जैसी सुविधाएं डिफॉल्ट रूप से शामिल होने लगें तो इससे निजता से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। इसलिए उन्होंने ऐसा टूल बनाने की कोशिश की जो आम लोगों को सतर्क रहने में मदद करे।
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कैसे काम करता है ये एप?
नियरबाई ग्लासेस एप का काम करने का तरीका काफी आसान है। यह आसपास मौजूद ब्लूटूथ सिग्नल्स को स्कैन करता है। दरअसल, हर हर ब्लूटूथ डिवाइस का एक पब्लिक आइडेंटिफायर होता है। ऐसे में अगर एप को ऐसा आइडेंटिफायर मिलता है जो स्मार्ट ग्लासेस से जुड़ा हो सकता है, तो वह तुरंत यूजर को अलर्ट नोटिफिकेशन भेज देता है। इसके अलावा एप यूजर को यह सुविधा भी देता है कि वे चाहें तो कुछ विशेष ब्लूटूथ पहचान संकेतों को खुद भी सूची में जोड़ सकते हैं। इससे निगरानी और अधिक सटीक हो सकती है।
क्यों जरूरी हो रही है ऐसी टेक्नोलॉजी?
आज के डिजिटल दौर में स्मार्ट ग्लासेस, स्मार्ट वॉच और अन्य वियरेबल डिवाइस तेजी से आम होते जा रहे हैं। हालांकि यह तकनीक लोगों की जिंदगी को आसान बनाती है, लेकिन इसके दुरुपयोग की आशंका भी बनी रहती है। इसी वजह से नियरबाई ग्लासेस जैसे एप लोगों को अपनी डिजिटल प्राइवेसी के प्रति जागरूक और सतर्क रहने में मदद कर सकते हैं। टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि आगे चलकर ऐसे टूल और भी जरूरी हो जाएंगे, क्योंकि वियरेबल डिवाइस का इस्तेमाल आने वाले समय में और तेजी से बढ़ने वाला है।
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