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Meta: हर 5 में से 1 टीनएजर ने इंस्टाग्राम पर देखी आपत्तिजनक तस्वीरें, मेटा के आंतरिक सर्वे में खुलासा
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Tue, 24 Feb 2026 11:52 AM IST
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सार
Meta के एक आंतरिक सर्वे में सामने आया है कि 13 से 15 साल के लगभग 19% इंस्टाग्राम यूजर्स ने अनचाही नग्न या यौन तस्वीरें देखने की शिकायत की। यह जानकारी अमेरिका में चल रहे एक फेडरल केस के दौरान सार्वजनिक दस्तावेजों से सामने आई है।
इंस्टाग्राम (सांकेतिक)
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर किशोरों की सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अदालत में पेश दस्तावेजों के मुताबिक, 13 से 15 वर्ष के करीब 19% यूजर्स ने बताया कि उन्हें ऐसे “आपत्तिजनक या यौन तस्वीरें” दिखीं, जिन्हें वे देखना नहीं चाहते थे। यह जानकारी अमेरिका के कैलिफोर्निया में चल रहे एक फेडरल मुकदमे के दौरान सार्वजनिक हुई। दस्तावेजों में मार्च 2025 में इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी की गवाही के अंश भी शामिल हैं।
2021 के सर्वे से सामने आए आंकड़े
मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन के अनुसार, यह आंकड़ा 2021 में इंस्टाग्राम यूजर्स पर किए गए एक सर्वे से आया था। यह किसी पोस्ट की सीधी जांच पर आधारित नहीं था, बल्कि यूजर्स के अनुभवों पर आधारित सर्वे था। सर्वे में यह भी सामने आया कि 13 से 15 साल के लगभग 8% किशोरों ने कहा कि उन्होंने इंस्टाग्राम पर किसी को खुद को नुकसान पहुंचाते या ऐसा करने की धमकी देते देखा।
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2021 के सर्वे से सामने आए आंकड़े
मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन के अनुसार, यह आंकड़ा 2021 में इंस्टाग्राम यूजर्स पर किए गए एक सर्वे से आया था। यह किसी पोस्ट की सीधी जांच पर आधारित नहीं था, बल्कि यूजर्स के अनुभवों पर आधारित सर्वे था। सर्वे में यह भी सामने आया कि 13 से 15 साल के लगभग 8% किशोरों ने कहा कि उन्होंने इंस्टाग्राम पर किसी को खुद को नुकसान पहुंचाते या ऐसा करने की धमकी देते देखा।
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किशोरों को प्रभावशाली यूजर मानती है कंपनी
अदालत में पेश किए गए एक अन्य दस्तावेजों से पता चला है कि मेटा के शोधकर्ता किशोरों को अपने मंच के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानते थे। जनवरी 2021 के एक मेमो में एक शोधकर्ता ने सुझाव दिया था कि कंपनी को किशोरों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए क्योंकि वे अपने घर के लिए 'कैटेलिस्ट' यानी उत्प्रेरक की तरह काम करते हैं।
यह भी पढ़ें: आर्थिक सर्वेक्षण में सोशल मीडिया को लेकर चेतावनी, बच्चों के लिए 'उम्र सीमा' तय करने की सिफारिश
इसका मतलब यह है कि अगर एक किशोर एप का इस्तेमाल करता है, तो वह अपने माता-पिता और छोटे भाई-बहनों को भी इससे जोड़ने के लिए प्रभावित करता है। कंपनी का मानना था कि नए यूजर्स हासिल करने और उन्हें बनाए रखने के लिए बच्चों के जरिए पूरे परिवार तक पहुंचना एक बेहतरीन रणनीति है।
अदालत में पेश किए गए एक अन्य दस्तावेजों से पता चला है कि मेटा के शोधकर्ता किशोरों को अपने मंच के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानते थे। जनवरी 2021 के एक मेमो में एक शोधकर्ता ने सुझाव दिया था कि कंपनी को किशोरों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए क्योंकि वे अपने घर के लिए 'कैटेलिस्ट' यानी उत्प्रेरक की तरह काम करते हैं।
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इसका मतलब यह है कि अगर एक किशोर एप का इस्तेमाल करता है, तो वह अपने माता-पिता और छोटे भाई-बहनों को भी इससे जोड़ने के लिए प्रभावित करता है। कंपनी का मानना था कि नए यूजर्स हासिल करने और उन्हें बनाए रखने के लिए बच्चों के जरिए पूरे परिवार तक पहुंचना एक बेहतरीन रणनीति है।
मेटा पर बढ़ता कानूनी दबाव
मेटा प्लेटफॉर्म्स, जो फेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक है, पर दुनियाभर में आरोप लग रहे हैं कि उसके प्लेटफॉर्म युवा यूजर्स के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अमेरिका में कंपनी पर हजारों मुकदमे चल रहे हैं, जिनमें आरोप है कि मेटा ने जानबूझकर अपने एप्स को नशे की तरह लत लगाने वाला बनाया है, जिससे नाबालिगों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
इन आरोपों के जवाब में इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी का तर्क है कि ज्यादातर आपत्तिजनक सामग्री प्राइवेट मैसेज के जरिए भेजी जाती है। उनके अनुसार, कंपनी के लिए चुनौती यह है कि वे सुरक्षा के नाम पर लोगों के निजी मैसेज नहीं पढ़ सकते क्योंकि इससे यूजर्स की प्राइवेसी का उल्लंघन होगा।
मेटा प्लेटफॉर्म्स, जो फेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक है, पर दुनियाभर में आरोप लग रहे हैं कि उसके प्लेटफॉर्म युवा यूजर्स के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अमेरिका में कंपनी पर हजारों मुकदमे चल रहे हैं, जिनमें आरोप है कि मेटा ने जानबूझकर अपने एप्स को नशे की तरह लत लगाने वाला बनाया है, जिससे नाबालिगों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
इन आरोपों के जवाब में इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी का तर्क है कि ज्यादातर आपत्तिजनक सामग्री प्राइवेट मैसेज के जरिए भेजी जाती है। उनके अनुसार, कंपनी के लिए चुनौती यह है कि वे सुरक्षा के नाम पर लोगों के निजी मैसेज नहीं पढ़ सकते क्योंकि इससे यूजर्स की प्राइवेसी का उल्लंघन होगा।
बढ़ते दबाव के चलते मेटा ने नीतियों में किए बदलाव
हालांकि, बढ़ते दबाव के बीच 2025 के अंत में मेटा ने अपनी नीतियों में कुछ कड़े बदलाव किए हैं। कंपनी ने अब एआई (AI) द्वारा तैयार की गई आपत्तिजनक या यौन सामग्री को पूरी तरह से हटाने का वादा किया है, बशर्ते वह मेडिकल या शैक्षिक उद्देश्य के लिए न हो। मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन का कहना है कि कंपनी सुरक्षा के क्षेत्र में प्रगति कर रही है और इसे और बेहतर बनाने के लिए लगातार काम जारी है।
यह भी पढ़ें: मौत के बाद भी एक्टिव रहेगा सोशल मीडिया अकाउंट? मेटा ने पेटेंट कराई नई AI तकनीक
दुनियाभर में बढ़ रही है सोशल मीडिया पर सख्ती
हालांकि, बढ़ते दबाव के बीच 2025 के अंत में मेटा ने अपनी नीतियों में कुछ कड़े बदलाव किए हैं। कंपनी ने अब एआई (AI) द्वारा तैयार की गई आपत्तिजनक या यौन सामग्री को पूरी तरह से हटाने का वादा किया है, बशर्ते वह मेडिकल या शैक्षिक उद्देश्य के लिए न हो। मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन का कहना है कि कंपनी सुरक्षा के क्षेत्र में प्रगति कर रही है और इसे और बेहतर बनाने के लिए लगातार काम जारी है।
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दुनियाभर में बढ़ रही है सोशल मीडिया पर सख्ती
- दिसंबर 2025 में ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने ऑनलाइन सेफ्टी अमेंडमेंट एक्ट को लागू किया है। इसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।
- डेनमार्क की असेंबली ने नवंबर 2025 में 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर प्रतिबंध लगाने का समझौता किया गया। हालांकि, 13-14 साल के बच्चों को माता-पिता की अनुमति से छूट देने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
- इस साल जनवरी में फ्रांस की नेशनल असेंबली ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने का बिल पास किया।
- मलेशियाई सरकार ने भी सभी प्लेटफॉर्म्स को 16 साल से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं के लिए बैन करने का प्रस्ताव रखा है। वहीं, स्पेन ने भी 16 साल से कम उम्र के नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस बंद करने की योजना की घोषणा की है।
- ग्रीस और स्लोवेनिया भी 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने का बिल ला सकते हैं। वहीं, नॉर्वे में सोशल मीडिया के लिए सहमति की उम्र 13 से बढ़ाकर 15 करने का प्रस्ताव रखा गया है।
- भारत के आर्थिक सर्वेक्षण 2026-27 में बच्चों और किशोरों में बढ़ती सोशल मीडिया की लत पर चिंता जताई गई है। सर्वेक्षण में सोशल मीडिया एप्स के लिए उम्र के हिसाब से सीमाएं तय करने और प्लेटफॉर्म्स को सख्त नियम लागू करने की सिफारिश की गई है।