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Meta: अब कीबोर्ड और माउस की नहीं होगी ट्रैकिंग, कर्मचारियों के विरोध के बाद झुकी मेटा, जानें क्या है मामला

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitish Kumar Updated Thu, 04 Jun 2026 05:30 PM IST
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सार

मेटा के कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। भारी विरोध के बाद मार्क जुकरबर्ग की कंपनी ने कर्मचारियों के माउस और कीबोर्ड के हर मूवमेंट को ट्रैक करने वाले अपने विवादित फैसले में ढील दे दी है। कंपनी ने अब कर्मचारियों को इस डेटा ट्रैकिंग को रोकने का अधिकार भी दे दिया है।

mark zuckerbergs meta scales back plan to track employee data after protest
मेटा के कदम का कर्मचारियों ने किया था विरोध - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार

AI की रेस में आगे निकलने की कोशिश कर रही मेटा (Meta) को अपने ही कर्मचारियों के विरोध का सामना करना पड़ा है। कंपनी कर्मचारियों के कंप्यूटर पर होने वाली गतिविधियों जैसे माउस मूवमेंट, क्लिक और कीबोर्ड इनपुट को रिकॉर्ड कर AI मॉडल्स को ट्रेन करना चाहती थी। लेकिन इस योजना को लेकर कर्मचारियों के बीच असहजता और नाराजगी बढ़ने लगी। अब मेटा ने इस प्लान को आंशिक रूप से वापस लेने का फैसला किया है।

क्या है मेटा से जुड़ा विवाद?

पिछले महीने ही मार्क जुकरबर्ग की अगुवाई वाली टेक कंपनी मेटा (Meta) ने अमेरिका में काम कर रहे अपने कर्मचारियों के कंप्यूटरों पर एक नया ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने का एलान किया था। इसका मकसद माउस के मूवमेंट, क्लिक्स और कीस्ट्रोक्स को रिकॉर्ड करना था, ताकि इस डेटा का इस्तेमाल ऐसे एआई एजेंट्स (AI agents) को बनाने में किया जा सके जो भविष्य में इंसानों की तरह काम कर सकें।
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लेकिन यह फैसला ऐसे समय में आया जब कंपनी के भीतर पहले से ही कई बड़े बदलाव हो रहे थे। कर्मचारियों ने इस कदम की कड़ी आलोचना की और कंपनी की तुलना कर्मचारियों का डेटा निकालने वाली फैक्ट्री से कर दी।
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रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मेटा का यह कदम उसके लिए यूरोपीय संघ (EU) में भी नई मुसीबतें खड़ी कर सकता था, क्योंकि वहां टेक कंपनियों को डेटा कलेक्शन को लेकर पहले ही कड़ी कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

विरोध बढ़ा तो कंपनी ने दिए नए विकल्प

Meta के सुपरइंटेलिजेंस लैब के वाइस प्रेसिडेंट स्टीफन कासरियल ने एक आंतरिक मेमो में बताया कि कर्मचारियों की चिंताओं को देखते हुए कंपनी अब उन्हें ज्यादा नियंत्रण देगी। नई व्यवस्था के तहत कर्मचारी डेटा कलेक्शन को एक बार में 30 मिनट तक रोक सकेंगे। इसके अलावा वे विशेष परिस्थितियों में इस कार्यक्रम से छूट भी मांग सकते हैं।

कंपनी ने सॉफ्टवेयर में कुछ तकनीकी सुधार भी किए हैं। कर्मचारियों का आरोप था कि यह टूल जरूरत से ज्यादा डेटा इस्तेमाल कर रहा था, जिससे घर के इंटरनेट उपयोग पर असर पड़ रहा था और लैपटॉप की बैटरी भी तेजी से खत्म हो रही थी।

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बैटरी और इंटरनेट की समस्या भी होगी दूर

कर्मचारियों की परेशानी सिर्फ प्राइवेसी तक सीमित नहीं थी। कई कर्मचारियों ने शिकायत की थी कि यह ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर इतना ज्यादा डेटा यूज कर रहा था कि उनके घर का इंटरनेट बिल तेजी से बढ़ गया था और उनके लैपटॉप की बैटरी भी बहुत जल्दी खत्म हो रही थी।

स्टीफन कासरियल ने मेमो में बताया कि उनकी टीम ने सॉफ्टवेयर में कई बदलाव किए हैं ताकि कंप्यूटर की बैटरी पर इसका असर कम पड़े। फिलहाल मेटा ने अपने कदम पीछे जरूर खींचे हैं, लेकिन यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि एआई के दौर में डेटा और प्राइवेसी के बीच संतुलन बनाना टेक कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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