AI Privacy Risk: फेक आईडी चलाते हैं तो हो जाइए सावधान! नकली अकाउंट के पीछे की असली पहचान बता सकता है एआई
AI Privacy Risk: क्या आप भी सोशल मीडिया पर फेक आईडी या गुमनाम अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं? अगर हां तो अब सावधान होने का वक्त आ गया है। नई रिसर्च के अनुसार, एडवांस एआई तकनीक अब इंटरनेट पर मौजूद आपकी छोटी-छोटी जानकारियों को जोड़कर ये बता सकती है कि फेक अकाउंट के पीछे असली चेहरा कौन है? जानिए ये तकनीक कैसे काम करती है और खुद को सुरक्षित रखने के क्या तरीके हैं?
विस्तार
आज के डिजिटल दौर में कई लोग सोशल मीडिया पर अपनी असली पहचान छिपाकर (गुमनाम या फेक आईडी से) अपनी बातें या विचार शेयर करना पसंद करते हैं। लेकिन अगर आप भी ऐसा करते हैं तो आपको सावधान होने की जरूरत है। एक नई रिसर्च में सामने आया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब इतना स्मार्ट हो गया है कि वह आपकी गुमनाम प्रोफाइल के पीछे छिपे असली चेहरे को आसानी से बेनकाब कर सकता है। द गार्डियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े एआई मॉडल अब अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद आपकी छोटी-छोटी जानकारियों को जोड़कर आपकी असली पहचान का पता लगा सकते हैं।
एआई कैसे करता है ये काम?
एआई शोधकर्ता साइमन लरमेन और डैनियल पालेका ने अपनी रिसर्च में पाया कि चैटजीपीटी जैसी तकनीक ने किसी की प्राइवेसी में सेंध लगाना बहुत सस्ता और आसान बना दिया है। इसके लिए अब किसी हैकर जैसी बड़ी तकनीकी जानकारी की जरूरत नहीं है। बस इंटरनेट और एआई तक पहुंच ही काफी है। इंसानों के लिए इन दो अलग-अलग बातों को जोड़ना मुश्किल है लेकिन एआई एक जासूस की तरह काम करता है। वह इंटरनेट पर मौजूद डेटा को खंगालता है और इन छोटी-छोटी कड़ियों को जोड़कर बहुत ही सटीकता के साथ बता देता है कि उस अनाम अकाउंट के पीछे असल में कौन सा व्यक्ति है। हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी साफ किया है कि एआई हर बार 100% सही नहीं होता। अगर जानकारी बहुत कम हो या मिलते-जुलते कई लोग हों तो एआई के लिए भी पहचान तय करना मुश्किल हो जाता है।
बड़े खतरे क्या हैं?
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि इस तकनीक का गलत इस्तेमाल डिजिटल दुनिया में कई गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। इसका सबसे बड़ा डर निगरानी का है। सरकारें या एजेंसियां इस तकनीक का इस्तेमाल करके एक्टिविस्ट्स या असंतुष्ट लोगों की असली पहचान उजागर कर सकती हैं। ऐसे लोग अपनी सुरक्षा के लिए गुमनाम रहकर अपनी आवाज उठाते हैं। इसके अलावा, साइबर सुरक्षा के लिहाज से भी यह एक बड़ा खतरा है। हैकर्स आपकी इंटरनेट पर मौजूद सार्वजनिक जानकारियों को हथियार बनाकर आपके साथ 'स्पीयर-फिशिंग' (निजी डेटा से ठगी) जैसे घोटालों को अंजाम दे सकते हैं। हैकर्स आपका डेटा जुटाकर आपके ही किसी परिचित का रूप धारण कर सकते हैं और आपको ऐसे खतरनाक लिंक भेज सकते हैं, जिन पर आप बिना कोई शक किए आसानी से क्लिक कर दें।
खुद को सुरक्षित कैसे रखें?
इस बढ़ते खतरे को देखते हुए प्राइवेसी को सुरक्षित रखने के लिए कुछ कदम उठाने जरूरी हैं:
1. सोशल मीडिया कंपनियों को क्या करना चाहिए?
प्लेटफॉर्म से एक साथ बहुत सारा डेटा डाउनलोड करने पर रोक लगानी चाहिए। डेटा चुराने वाले ऑटोमेटेड बॉट्स को तुरंत ब्लॉक करना चाहिए।
2. यूजर्स को क्या करना चाहिए?
इन खतरों से बचने के लिए यूजर्स को भी अपनी डिजिटल सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना चाहिए। सबसे जरूरी है कि आप सोशल मीडिया पर अपनी बहुत ज्यादा निजी जानकारी- जैसे अपने रोजमर्रा के ठिकाने शेयर करने से बचें। इसके साथ ही इस बात का खास ध्यान रखें कि आप अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसी कोई भी जानकारी पोस्ट न करें जो किसी सुराग की तरह आपस में जुड़कर आपकी असली पहचान को उजागर कर दे।
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