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AI: एआई का ईंधन बनीं पुरानी किताबें, लाइब्रेरी 'सोने की खदान', दुर्लभ किताबों पर मंडराया खतरा

Mon, 03 Aug 2026 12:25 PM IST
नीतीश कुमार टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Mon, 03 Aug 2026 12:25 PM IST
सार

AI कंपनियां अब इंटरनेट से ज्यादा भरोसा पुरानी किताबों पर कर रही हैं। लाखों किताबें खरीदकर उन्हें स्कैन किया जा रहा है, ताकि AI को बेहतर बनाया जा सके। लेकिन इस प्रक्रिया ने लेखकों के अधिकारों और दुर्लभ पुस्तकों के भविष्य को लेकर नई बहस भी छेड़ दी है।

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एआई के वजह से पुरानी किताबों की मांग बढ़ी - फोटो : एआई जनरेटेड

विस्तार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में इंटरनेट पर एआई से तैयार कंटेंट की भरमार हो चुकी है। ऐसे में बड़ी एआई कंपनियां अब अपने मॉडल को बेहतर बनाने के लिए एक अलग रास्ता अपना रही हैं। वे लाखों की संख्या में पुरानी छपी हुई किताबें खरीद रही हैं, ताकि उन्हें इंसानों द्वारा लिखे गए भरोसेमंद और मौलिक कंटेंट से ट्रेन किया जा सके।
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विशेषज्ञों का मानना है कि एआई मॉडल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए शुद्ध और मानवीय लेखन पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। यही वजह है कि पुरानी लाइब्रेरी और किताबों के गोदाम अब टेक इंडस्ट्री के लिए नई सोने की खान बनते जा रहे हैं।
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एआई को क्यों चाहिए पुरानी किताबें?
  • एआई डेवलपर्स एक बड़ी समस्या से बचना चाहते हैं, जिसे 'मॉडल कोलैप्स' कहा जाता है। इसका मतलब है कि अगर एआई को बार-बार उसी एआई द्वारा तैयार किए गए कंटेंट से प्रशिक्षित किया जाए, तो समय के साथ उसकी गुणवत्ता और सटीकता घटने लगती है।
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  • इसी खतरे से बचने के लिए कंपनियां ऐसे डेटा की तलाश में हैं, जो पूरी तरह इंसानों द्वारा लिखा गया हो। इसलिए 2022 से पहले प्रकाशित किताबों की मांग तेजी से बढ़ गई है। ये किताबें उस दौर की हैं, जब जनरेटिव एआई का व्यापक इस्तेमाल शुरू नहीं हुआ था। इनमें पेशेवर संपादन और वास्तविक मानवीय लेखन मिलता है, जिसे एआई ट्रेनिंग के लिए अधिक भरोसेमंद माना जा रहा है।

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इस फैसले के बाद बढ़ी खरीदारी
  • जून 2025 में अमेरिका की एक संघीय अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा था कि एआई कंपनियां कानूनी तरीके से खरीदी गई छपी हुई किताबों का इस्तेमाल एआई मॉडल को ट्रेन करने के लिए कर सकती हैं। इसके लिए लेखकों की अलग से अनुमति जरूरी नहीं होगी।
  • हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अनुमति केवल खरीदी गई भौतिक किताबों पर लागू होगी, न कि पायरेटेड डिजिटल लाइब्रेरी पर। इस फैसले के बाद एआई कंपनियों ने लाखों किताबें खरीदना शुरू कर दिया।

किताबों की मांग में कई गुना उछाल
एआई कंपनियों की बढ़ती मांग का असर किताबों के बाजार पर भी दिखने लगा है। अप्रैल 2026 तक कई पुस्तक विक्रेताओं ने बताया कि पुरानी किताबों की मांग करीब पांच गुना बढ़ चुकी है। इतना ही नहीं, ISBNdb जैसे डेटाबेस अब खुद को बड़े स्तर पर किताबें उपलब्ध कराने वाले प्लेटफॉर्म के रूप में पेश कर रहे हैं। यहां एक बार में 10 लाख तक किताबों की खरीद-बिक्री की जा रही है।

कैसे बनती है लाखों किताबों की डिजिटल कॉपी?
  • इन किताबों को तेजी से डिजिटल रूप देने के लिए कंपनियां एक खास स्कैनिंग प्रक्रिया अपनाती हैं। इसमें पहले किताब की बाइंडिंग (रीढ़) हटाई जाती है, ताकि हाई-स्पीड स्कैनर कुछ ही मिनटों में सैकड़ों पन्नों को स्कैन कर सके।
  • इसके बाद ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) तकनीक की मदद से स्कैन की गई तस्वीरों को डिजिटल टेक्स्ट में बदला जाता है। यही टेक्स्ट आगे AI मॉडल को प्रशिक्षित करने में इस्तेमाल होता है। स्कैनिंग पूरी होने के बाद किताबों के अलग किए गए पन्नों को आमतौर पर रीसायकल कर दिया जाता है या फिर उन्हें फेंक दिया जाता है।

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दुर्लभ किताबों पर मंडराने लगा खतरा
  • इस पूरी प्रक्रिया ने नई चिंता भी पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसी तरह बड़ी संख्या में किताबों को स्कैन करने के बाद नष्ट किया जाता रहा, तो दुर्लभ और आउट-ऑफ-प्रिंट किताबों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
  • रिपोर्ट के मुताबिक, AI कंपनियां इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर बेहद सतर्क हैं। यही कारण है कि कई कंपनियां गोपनीयता समझौतों (NDA) के तहत काम कर रही हैं, ताकि उनकी पहचान और किताबों की वास्तविक खरीद का पैमाना सार्वजनिक न हो सके।
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