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AI Detection Tool: गूगल-टेस्ला की नौकरी छोड़ी, बना डाला एआई की 'पोल खोलने' वाला टूल; 44 गुना बढ़े यूजर्स
Sun, 02 Aug 2026 06:10 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Sun, 02 Aug 2026 06:10 PM IST
सार
इंटरनेट पर फैले एआई जनरेटेड 'कचरे' को साफ करने का जो काम दिग्गज OpenAI नहीं कर पाया, उसे स्टैनफर्ड के दो दोस्तों ने कर दिखाया है। अपनी हाई-प्रोफाइल नौकरियां छोड़कर इन्होंने ऐसा अनोखा डिटेक्शन टूल तैयार किया है, जिसने सिलिकॉन वैली में तहलका मचा दिया है।
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एआई
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
चैटजीपीटी और दूसरे जनरेटिव एआई टूल्स आने के बाद इंटरनेट पर एआई से तैयार लेख, ब्लॉग और न्यूज कंटेंट तेजी से बढ़े हैं। रिसर्च एजेंसी ग्रेफाइट के मुताबिक, आज इंटरनेट पर मौजूद करीब 50 फीसदी ब्लॉग और न्यूज कंटेंट एआई की मदद से तैयार किया जा रहा है। ऐसे माहौल में असली और एआई से लिखे कंटेंट की पहचान करना बड़ी चुनौती बन गया है। इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी के दो दोस्तों ने पैंग्राम (Pangram) नाम का एआई डिटेक्शन टूल तैयार किया, जो अब तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
गूगल और टेस्ला की नौकरी छोड़ शुरू किया नया सफर
पैंग्राम की शुरुआत मैक्स स्पैरो और ब्रैडली एमी ने की। दोनों की दोस्ती स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी की एआई लैब में पढ़ाई के दौरान हुई थी। रिसर्च के साथ दोनों अक्सर पोकर भी खेलते थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैक्स ने गूगल और ब्रैडली ने टेस्ला में काम किया। इस दौरान दोनों को प्रसिद्ध एआई रिसर्चर आंद्रेज करपथी के साथ भी काम करने का मौका मिला।
ओपनएआई का टूल बंद हुआ, वहीं से मिला नया आइडिया
जब चैटजीपीटी ने दुनिया भर में लोकप्रियता हासिल की, तब इंटरनेट पर एआई से तैयार कंटेंट की बाढ़ आ गई। उस समय टेक इंडस्ट्री में यह माना जाने लगा था कि एआई-जनरेटेड कंटेंट को पहचानना लगभग नामुमकिन है। यहां तक कि ओपनएआई को भी अपना एआई डिटेक्शन टूल बंद करना पड़ा। यही वह मौका था जब मैक्स और ब्रैडली ने इस चुनौती को अवसर में बदलने का फैसला किया।
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99.99% सटीकता का दावा
दोनों ने बड़े पैमाने पर एआई टेक्स्ट का विश्लेषण कर ऐसा मॉडल तैयार किया, जो उनके मुताबिक एआई और इंसानों द्वारा लिखे गए कंटेंट में 99.99 प्रतिशत तक सटीक पहचान कर सकता है। मैक्स खुद को मजाकिया अंदाज में "इंटरनेट का कचरा साफ करने वाला" भी बताते हैं।
एक साल में 44 गुना बढ़े यूजर्स
पैंग्राम की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले एक साल में इसके एक्टिव यूजर्स करीब 2,700 से बढ़कर 1.2 लाख हो गए। इसी दौरान कंपनी की कमाई में 35 गुना वृद्धि दर्ज की गई। क्वोरा और सबस्टैक जैसे बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म भी इस टूल का इस्तेमाल करने लगे हैं।
75 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली
पैंग्राम को सिलिकॉन वैली की वेंचर कैपिटल फर्म मेनलो वेंचर्स से करीब 75 करोड़ रुपये की फंडिंग भी मिल चुकी है। कंपनी अब सिर्फ टेक्स्ट तक सीमित नहीं रहना चाहती। जल्द ही एआई से बनी तस्वीरों और वीडियो की पहचान करने वाले नए टूल भी लॉन्च करने की तैयारी है।
अब अगला लक्ष्य एआई इमेज और वीडियो
मैक्स और ब्रैडली का कहना है कि एआई और इंसान मिलकर तैयार किए गए कंटेंट की पहचान करना अभी भी चुनौतीपूर्ण है और कई बार सिस्टम भ्रमित भी हो सकता है। इसके बावजूद उनका उद्देश्य ऐसा भरोसेमंद सिस्टम तैयार करना है, जिससे लोगों को यह समझने में आसानी हो कि वे जो कंटेंट पढ़ या देख रहे हैं, उसके पीछे इंसानी मेहनत है या एआई की।
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गूगल और टेस्ला की नौकरी छोड़ शुरू किया नया सफर
पैंग्राम की शुरुआत मैक्स स्पैरो और ब्रैडली एमी ने की। दोनों की दोस्ती स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी की एआई लैब में पढ़ाई के दौरान हुई थी। रिसर्च के साथ दोनों अक्सर पोकर भी खेलते थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैक्स ने गूगल और ब्रैडली ने टेस्ला में काम किया। इस दौरान दोनों को प्रसिद्ध एआई रिसर्चर आंद्रेज करपथी के साथ भी काम करने का मौका मिला।
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ओपनएआई का टूल बंद हुआ, वहीं से मिला नया आइडिया
जब चैटजीपीटी ने दुनिया भर में लोकप्रियता हासिल की, तब इंटरनेट पर एआई से तैयार कंटेंट की बाढ़ आ गई। उस समय टेक इंडस्ट्री में यह माना जाने लगा था कि एआई-जनरेटेड कंटेंट को पहचानना लगभग नामुमकिन है। यहां तक कि ओपनएआई को भी अपना एआई डिटेक्शन टूल बंद करना पड़ा। यही वह मौका था जब मैक्स और ब्रैडली ने इस चुनौती को अवसर में बदलने का फैसला किया।
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99.99% सटीकता का दावा
दोनों ने बड़े पैमाने पर एआई टेक्स्ट का विश्लेषण कर ऐसा मॉडल तैयार किया, जो उनके मुताबिक एआई और इंसानों द्वारा लिखे गए कंटेंट में 99.99 प्रतिशत तक सटीक पहचान कर सकता है। मैक्स खुद को मजाकिया अंदाज में "इंटरनेट का कचरा साफ करने वाला" भी बताते हैं।
एक साल में 44 गुना बढ़े यूजर्स
पैंग्राम की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले एक साल में इसके एक्टिव यूजर्स करीब 2,700 से बढ़कर 1.2 लाख हो गए। इसी दौरान कंपनी की कमाई में 35 गुना वृद्धि दर्ज की गई। क्वोरा और सबस्टैक जैसे बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म भी इस टूल का इस्तेमाल करने लगे हैं।
75 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली
पैंग्राम को सिलिकॉन वैली की वेंचर कैपिटल फर्म मेनलो वेंचर्स से करीब 75 करोड़ रुपये की फंडिंग भी मिल चुकी है। कंपनी अब सिर्फ टेक्स्ट तक सीमित नहीं रहना चाहती। जल्द ही एआई से बनी तस्वीरों और वीडियो की पहचान करने वाले नए टूल भी लॉन्च करने की तैयारी है।
अब अगला लक्ष्य एआई इमेज और वीडियो
मैक्स और ब्रैडली का कहना है कि एआई और इंसान मिलकर तैयार किए गए कंटेंट की पहचान करना अभी भी चुनौतीपूर्ण है और कई बार सिस्टम भ्रमित भी हो सकता है। इसके बावजूद उनका उद्देश्य ऐसा भरोसेमंद सिस्टम तैयार करना है, जिससे लोगों को यह समझने में आसानी हो कि वे जो कंटेंट पढ़ या देख रहे हैं, उसके पीछे इंसानी मेहनत है या एआई की।