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UPI ने फिर बनाया इतिहास: जुलाई में 23.66 अरब ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड, ₹29.88 लाख करोड़ का हुआ डिजिटल भुगतान

Sun, 02 Aug 2026 01:04 PM IST
नीतीश कुमार टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Sun, 02 Aug 2026 01:04 PM IST
सार

भारत में डिजिटल पेमेंट का क्रेज लगातार बढ़ रहा है। जुलाई 2026 में UPI ने ट्रांजैक्शन और वैल्यू, दोनों के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबार तक इसकी पहुंच कैसे बढ़ी और दुनिया में भारत का मॉडल क्यों चर्चा में है, पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

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UPI पेमेंट में बना नया रिकॉर्ड - फोटो : AdobeStock

विस्तार

अगर कुछ साल पहले कोई कहता कि चाय की दुकान, सब्जी मंडी, किराना स्टोर और बड़े शॉपिंग मॉल में लोग बिना नकदी निकाले सिर्फ मोबाइल से भुगतान करेंगे, तो शायद यह कल्पना जैसी लगती। लेकिन आज भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था ने ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है, जहां UPI देश में भुगतान का सबसे पसंदीदा माध्यम बन चुका है। जुलाई 2026 के ताजा आंकड़े इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल हैं।
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जुलाई में बना अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में UPI के जरिए 23.66 अरब (23.66 बिलियन) ट्रांजैक्शन किए गए। इन लेन-देन की कुल वैल्यू 29.88 लाख करोड़ रुपये रही। यह अब तक का सबसे बड़ा मासिक रिकॉर्ड है और भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की तेजी से बढ़ती ताकत को दिखाता है।
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मई और जून के रिकॉर्ड भी हुए पीछे
  • UPI लगातार नए मुकाम हासिल कर रहा है। इससे पहले मई 2026 में 23.20 अरब ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए थे, जबकि जून में यह संख्या घटकर 22.72 अरब रही। हालांकि जुलाई में एक बार फिर ट्रांजैक्शन में जबरदस्त उछाल देखने को मिला और सभी पुराने रिकॉर्ड टूट गए।
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  • अगर पिछले साल से तुलना करें तो तस्वीर और भी दिलचस्प है। जुलाई 2025 में UPI के जरिए 25.08 लाख करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था, जबकि इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 29.88 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इससे साफ है कि डिजिटल भुगतान की रफ्तार लगातार तेज हो रही है।

QR कोड बना हर भारतीय की पहली पसंद
  • आज गांवों से लेकर महानगरों तक लगभग हर दुकान पर QR कोड नजर आता है। दूध, सब्जी, टैक्सी, ऑनलाइन शॉपिंग, बिजली-पानी के बिल या किसी दोस्त को पैसे भेजने जैसे लगभग हर काम के लिए लोग UPI का इस्तेमाल कर रहे हैं।
  • सबसे बड़ी बात यह है कि भुगतान की प्रक्रिया तेज, आसान और सुरक्षित है। नकदी रखने, छुट्टे पैसे ढूंढने या एटीएम जाने की जरूरत कम हो गई है। यही वजह है कि छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े कारोबारी भी तेजी से डिजिटल पेमेंट अपना रहे हैं।

भारत से निकलकर दुनिया तक पहुंचा UPI
UPI अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। भारत सरकार और NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) की पहल से यह तकनीक कई देशों तक पहुंच चुकी है। संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर समेत करीब 10 देशों में UPI सेवाएं शुरू हो चुकी हैं या अंतिम चरण में हैं। इससे भारतीय पर्यटकों और प्रवासी भारतीयों के लिए विदेशों में भुगतान करना पहले से कहीं आसान हो गया है।

विशेषज्ञों को आगे और तेज ग्रोथ की उम्मीद
फिनटेक विशेषज्ञों का मानना है कि UPI अब केवल पेमेंट प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल इकोसिस्टम की मजबूत नींव बन चुका है। उनका कहना है कि आने वाले समय में AI और वॉयस-बेस्ड UPI जैसी तकनीकों के आने से डिजिटल भुगतान और तेजी से बढ़ेगा। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी भाषा में बोलकर भुगतान करने जैसी सुविधाएं वित्तीय समावेशन को नई रफ्तार देंगी।

क्या है NPCI और कैसे काम करता है UPI?
  • नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) भारत की प्रमुख संस्था है, जो खुदरा डिजिटल भुगतान प्रणाली का संचालन करती है। इसकी स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के सहयोग से की गई थी।
  • UPI इसी संस्था द्वारा विकसित किया गया प्लेटफॉर्म है, जो अलग-अलग बैंकों के खातों के बीच 24x7 तत्काल पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा देता है। मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसी सुरक्षा व्यवस्था के कारण यह प्रणाली सुरक्षित मानी जाती है और आज भारत को डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल कर चुकी है।
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