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नेट न्यूट्रैलिटी पर सरकार की नजर: क्या स्पेशल इंटरनेट स्पीड के लिए Jio और Airtel वसूल सकते हैं अलग चार्ज?
Sun, 02 Aug 2026 05:07 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Sun, 02 Aug 2026 05:07 PM IST
सार
क्या भविष्य में क्लाउड सर्विस, हेल्थकेयर या स्मार्ट फैक्ट्री जैसी सेवाओं के लिए अलग इंटरनेट प्लान लेना पड़ सकता है? सरकार नेट न्यूट्रैलिटी के नियमों की समीक्षा कर रही है। आखिर इससे एक आम इंटरनेट यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा और टेलीकॉम कंपनियों के लिए क्या बदलेगा, जानिए...
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नेट न्यूट्रैलिटी के मौजूदा नियमों पर सरकार कर रही समीक्षा
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
भारत में इंटरनेट इस्तेमाल करने का तरीका आने वाले समय में बदल सकता है। केंद्र सरकार नेट न्यूट्रैलिटी (Net Neutrality) से जुड़े मौजूदा नियमों की समीक्षा करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि 5G तकनीक और नेटवर्क स्लाइसिंग (Network Slicing) जैसी नई सुविधाओं के चलते सरकार यह स्पष्ट करना चाहती है कि क्या टेलीकॉम कंपनियों को कुछ विशेष डिजिटल सेवाओं के लिए अलग नेटवर्क और अलग शुल्क लेने की अनुमति दी जा सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार इस मामले में टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) से सुझाव मांग चुकी है।
इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, मलेशिया और चीन जैसे देशों में 5G नेटवर्क स्लाइसिंग तकनीक का इस्तेमाल कई विशेष सेवाओं के लिए पहले से किया जा रहा है।
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क्या है नेट न्यूट्रैलिटी?
- नेट न्यूट्रैलिटी का सीधा मतलब है कि इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर सभी वेबसाइट, एप और ऑनलाइन सेवाओं के साथ समान व्यवहार करें। यानी कोई कंपनी किसी वेबसाइट को जानबूझकर तेज या धीमा नहीं कर सकती और न ही किसी खास प्लेटफॉर्म को पैसे लेकर प्राथमिकता दे सकती है।
- उदाहरण के लिए, यदि आपने किसी इंटरनेट कंपनी का कनेक्शन लिया है, तो आपको हर वेबसाइट और एप तक समान स्पीड और समान पहुंच मिलनी चाहिए। यही सिद्धांत नेट न्यूट्रैलिटी सुनिश्चित करता है। भारत में यह नियम वर्ष 2018 में लागू किया गया था ताकि सभी इंटरनेट यूजर्स को खुला और निष्पक्ष इंटरनेट मिल सके।
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सरकार क्यों कर रही है नियमों की समीक्षा?
5G आने के बाद कई नई तकनीकें तेजी से विकसित हुई हैं। इनमें सबसे अहम है नेटवर्क स्लाइसिंग। सरकार का मानना है कि मौजूदा नियमों में यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि क्लाउड गेमिंग, हेल्थकेयर, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, ऑटोमैटिक वाहन और स्मार्ट फैक्ट्री जैसी सेवाओं के लिए अलग नेटवर्क उपलब्ध कराया जा सकता है या नहीं। इसी वजह से सरकार चाहती है कि मौजूदा नियमों की समीक्षा कर यह तय किया जाए कि इनमें बदलाव की जरूरत है या केवल स्पष्टीकरण पर्याप्त होगा।आम इंटरनेट यूजर्स पर क्या होगा असर?
फिलहाल सरकार ने साफ किया है कि खुले इंटरनेट के मूल सिद्धांत में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। यानी किसी वेबसाइट, एप या ऑनलाइन कंटेंट को पैसे लेकर प्राथमिकता देने की अनुमति नहीं होगी। सरकार का कहना है कि इंटरनेट पहले की तरह सभी के लिए खुला रहेगा और कोई भी 'वॉल्ड' मॉडल लागू नहीं किया जाएगा, जिसमें कुछ सेवाओं को विशेष प्राथमिकता मिलती है।क्या है 5G नेटवर्क स्लाइसिंग तकनीक?
- 5G नेटवर्क स्लाइसिंग ऐसी तकनीक है, जिसमें एक ही 5G नेटवर्क को कई वर्चुअल नेटवर्क में बांटा जा सकता है। हर नेटवर्क स्लाइस किसी खास जरूरत के अनुसार तैयार किया जाता है। उदाहरण के तौर पर क्लाउड गेमिंग, रोबोटिक्स, हेल्थकेयर, इंडस्ट्री और ऑटोनोमस वाहन जैसी सेवाओं को बेहद कम लेटेंसी और अधिक बैंडविड्थ वाला अलग नेटवर्क दिया जा सकता है। वहीं, सामान्य इंटरनेट ब्राउजिंग और वीडियो स्ट्रीमिंग दूसरे नेटवर्क पर चलती रहती है।
- हालांकि, यदि इस तकनीक का इस्तेमाल किसी सेवा को सामान्य इंटरनेट से बेहतर सुविधा देने के लिए किया जाता है, तो मौजूदा नेट न्यूट्रैलिटी नियमों के तहत उस पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
Jio और Airtel पहले ही कर रहे हैं तैयारी
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रिपोर्ट के अनुसार, भारती एयरटेल 5G नेटवर्क स्लाइसिंग आधारित सेवा की शुरुआत कर चुका है, जिसके तहत कुछ पोस्टपेड ग्राहकों को बेहतर स्पीड और कम लेटेंसी उपलब्ध कराई जा रही है। इस सेवा की समीक्षा फिलहाल दूरसंचार विभाग (DoT) और TRAI कर रहे हैं।
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वहीं रिलायंस जियो भी घोषणा कर चुका है कि वह भीड़भाड़ वाले शहरी इलाकों में नेटवर्क क्षमता और कवरेज बेहतर बनाने के लिए 5G नेटवर्क स्लाइसिंग तकनीक का इस्तेमाल करेगा।
दुनिया के दूसरे देशों में क्या स्थिति है?
नेट न्यूट्रैलिटी पर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि कई दूसरे देश भी नए सिरे से विचार कर रहे हैं। यूरोपीय संघ के कई देशों में इस विषय पर चर्चा जारी है। अमेरिका में संघीय स्तर पर नेट न्यूट्रैलिटी के नियम हटाए जा चुके हैं, हालांकि कुछ राज्यों में अलग नियम अब भी लागू हैं।इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, मलेशिया और चीन जैसे देशों में 5G नेटवर्क स्लाइसिंग तकनीक का इस्तेमाल कई विशेष सेवाओं के लिए पहले से किया जा रहा है।