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Android vs iOS: लाखों खर्च करने के बाद भी iPhone में नहीं मिलते ये फीचर्स, एंड्रॉयड इस मामले में है बेहतर
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जागृति
Updated Tue, 24 Feb 2026 04:46 PM IST
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सार
Best features of Android: क्या महंगा फोन हमेशा बेहतर होता है? जब बात एंड्रॉयड और आईफोन की आती है, तो ये बात दिमाग में जरूर आती होगी होती, लेकिन कुछ ऐसे पावर फीचर्स है, जहां अभी भी एंड्राइड एपल को कहीं पीछे छोड़ देता है। इस लेख में जानिए उन फीचर्स के बारे में विस्तार से...
एपल बनाम एंड्रॉइड
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एंड्रॉयड की सबसे बड़ी खूबी उसका यूनिवर्सल बैक नेविगेशन माना जाता है। आप किसी भी एप में हो, एक सिंपल स्वाइप या बटन आपको बिल्कुल पिछले स्टेप पर ले जाता है। एपल में यह अनुभव एप दर एप बदलता रहता है। कई बार आपको स्क्रीन के सबसे ऊपरी कोने में बैक एरो ढूंढना पड़ता है, जो बड़े फोन यूज करते वक्त काफी झुंझलाहट भरा होता है।
मल्टीटास्किंग: एक साथ दो काम, बिना किसी रुकावट के
अगर आप यूट्यूब देखते हुए नोट्स बनाना चाहते हैं या व्हाट्सएप करते हुए ब्राउजर यूज करना चाहते हैं, तो एंड्रॉयड का स्प्लिट-स्क्रीन फीचर कमाल का है। आईफोन में पिक्चर-इन-पिक्चर (PiP) तो है, लेकिन वह सिर्फ वीडियो और कॉल्स तक सीमित है। एंड्रॉयड की फ्लोटिंग विंडोज आपको डेस्कटॉप जैसा अनुभव देती है, जो आईफोन में फिलहाल मुमकिन नहीं है।
ये भी पढ़े: iQOO 15R भारत में लॉन्च: 7,600mAh बैटरी, स्नैपड्रैगन 8 जेन 5 चिप और 4 साल तक एंड्रॉयड अपडेट का वादा
कीबोर्ड और टाइपिंग की आजादी
एंड्रॉयड पर Gboard या SwiftKey जैसे कीबोर्ड सिस्टम के साथ इतनी गहराई से जुड़े हैं कि आप उन्हें पूरी तरह रिडिजाइन कर सकते हैं। आईफोन में थर्ड-पार्टी कीबोर्ड की अनुमति तो है, लेकिन वे अक्सर सिस्टम क्रैश या लैग का शिकार होते हैं और एपल का अपना कीबोर्ड आज भी प्रेडिक्शन और कस्टमाइजेशन के मामले में एंड्रॉयड से पीछे माना जाता है।
इन फीचर्स को देखते हुए गैजेट एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हार्डवेयर के मामले में एंड्रॉयड ने बाजी मार ली है। जहां सैमसंग ने मार्केट में ट्राई-फोल्ड (Tri-fold) फोन लाकर दुनिया को चौंका दिया है, वहीं एपल अभी भी अपने पहले फोल्डेबल आईफोन पर काम ही कर रहा है। एंड्रॉयड यूजर्स के पास फ्लिप, फोल्ड और अब स्लिम फोल्डेबल्स के ढेरों विकल्प हैं, जबकि आईफोन का डिजाइन पिछले कई वर्षों से लगभग एक जैसा ही बना हुआ है।
ये भी पढ़े: Scheduled Message: व्हाट्सएप में जल्द आएगा मैसेज शेड्यूल करने का फीचर, तय समय पर अपने-आप जाएगा संदेश
फाइल मैनेजमेंट और साइडलोडिंग
एंड्रॉयड की एक और बड़ी ताकत इसका फाइल मैनेजर है। आप अपने फोन को पेनड्राइव की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा, गूगल प्ले स्टोर के बाहर से सुरक्षित तरीके से एप्स इंस्टॉल (Sideloading) करने की जो आजादी एंड्रॉयड देता है, वह एपल के क्लोज्ड इकोसिस्टम में नामुमकिन है।
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अगर आप यूट्यूब देखते हुए नोट्स बनाना चाहते हैं या व्हाट्सएप करते हुए ब्राउजर यूज करना चाहते हैं, तो एंड्रॉयड का स्प्लिट-स्क्रीन फीचर कमाल का है। आईफोन में पिक्चर-इन-पिक्चर (PiP) तो है, लेकिन वह सिर्फ वीडियो और कॉल्स तक सीमित है। एंड्रॉयड की फ्लोटिंग विंडोज आपको डेस्कटॉप जैसा अनुभव देती है, जो आईफोन में फिलहाल मुमकिन नहीं है।
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कीबोर्ड और टाइपिंग की आजादी
एंड्रॉयड पर Gboard या SwiftKey जैसे कीबोर्ड सिस्टम के साथ इतनी गहराई से जुड़े हैं कि आप उन्हें पूरी तरह रिडिजाइन कर सकते हैं। आईफोन में थर्ड-पार्टी कीबोर्ड की अनुमति तो है, लेकिन वे अक्सर सिस्टम क्रैश या लैग का शिकार होते हैं और एपल का अपना कीबोर्ड आज भी प्रेडिक्शन और कस्टमाइजेशन के मामले में एंड्रॉयड से पीछे माना जाता है।
इन फीचर्स को देखते हुए गैजेट एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हार्डवेयर के मामले में एंड्रॉयड ने बाजी मार ली है। जहां सैमसंग ने मार्केट में ट्राई-फोल्ड (Tri-fold) फोन लाकर दुनिया को चौंका दिया है, वहीं एपल अभी भी अपने पहले फोल्डेबल आईफोन पर काम ही कर रहा है। एंड्रॉयड यूजर्स के पास फ्लिप, फोल्ड और अब स्लिम फोल्डेबल्स के ढेरों विकल्प हैं, जबकि आईफोन का डिजाइन पिछले कई वर्षों से लगभग एक जैसा ही बना हुआ है।
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फाइल मैनेजमेंट और साइडलोडिंग
एंड्रॉयड की एक और बड़ी ताकत इसका फाइल मैनेजर है। आप अपने फोन को पेनड्राइव की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा, गूगल प्ले स्टोर के बाहर से सुरक्षित तरीके से एप्स इंस्टॉल (Sideloading) करने की जो आजादी एंड्रॉयड देता है, वह एपल के क्लोज्ड इकोसिस्टम में नामुमकिन है।