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Tech Explained: Claude Code Security क्या है? आखिर क्यों इसने ला दिया टेक कंपनियों के शेयर में भूचाल?
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Tue, 24 Feb 2026 03:46 PM IST
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सार
What is Claude Code Security: एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने ‘क्लाउड कोड सिक्योरिटी’ नाम का नया टूल लॉन्च किया है, जो सॉफ्टवेयर कोड में छिपी सुरक्षा खामियों को खोजकर उन्हें ठीक करने के सुझाव देता है। इस एलान के बाद कई बड़ी साइबर सिक्योरिटी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई।
'क्लॉउड कोड सिक्योरिटी' के वजह से शेयर बाजार में अफरातफरी
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
एंथ्रोपिक के नए एआई टूल ने एक बार फिर आईटी शेयर बाजार में खलबली मचा दी है। लगभग दो हफ्ते पहले कंपनी ने काउड मॉडल पर आधारित एक ओपन-सोर्स एआई असिस्टेंट कोवर्क (Claude Cowork) पेश किया था, जिसके बाद दुनियाभर की आईटी कंपनियों के शेयर एक झटके में धड़ाम हो गए थे। इससे निवेशकों को एक दिन में ही करोड़ों डॉलर का नुकसान झेलना पड़ गया था। वहीं, एक बार फिर एंथ्रोपिक के एक नए एआई टूल से टेक कंपनियों के निवेशकों में खौफ का माहौल है। हालात ये हैं कि अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनी आईबीएम के शेयर 13% लुढ़क गए हैं। इस बार साइबर सिक्योरिटी कंपनियां निशाना बनीं हैं। क्या है मामला आइए जानते हैं...
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क्या है एंथ्रोपिक का Claude Code Security?
दरअसल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी एंथ्रोपिक ने अपना नया AI टूल 'क्लाउट कोड सिक्योरिटी' पेश किया है। इस टूल को खासतौर पर AI-आधारित नए साइबर हमलों से बचाव के लिए तैयार किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह टूल सॉफ्टवेयर कोड में मौजूद ऐसी सुरक्षा कमजोरियों को पकड़ सकता है, जिन्हें अक्सर पारंपरिक तरीके से पकड़ना काफी मुश्किल होता है। यह टूल केवल खामियां ढूंढता ही नहीं, बल्कि उन्हें ठीक करने के लिए सटीक 'सॉफ्टवेयर पैच' के सुझाव भी देता है, जिन्हें इंसान बाद में रिव्यू कर सकते हैं।
दरअसल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी एंथ्रोपिक ने अपना नया AI टूल 'क्लाउट कोड सिक्योरिटी' पेश किया है। इस टूल को खासतौर पर AI-आधारित नए साइबर हमलों से बचाव के लिए तैयार किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह टूल सॉफ्टवेयर कोड में मौजूद ऐसी सुरक्षा कमजोरियों को पकड़ सकता है, जिन्हें अक्सर पारंपरिक तरीके से पकड़ना काफी मुश्किल होता है। यह टूल केवल खामियां ढूंढता ही नहीं, बल्कि उन्हें ठीक करने के लिए सटीक 'सॉफ्टवेयर पैच' के सुझाव भी देता है, जिन्हें इंसान बाद में रिव्यू कर सकते हैं।
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साइबर सिक्योरिटी
- फोटो : Adobe Stock
मल्टी-स्टेज वेरिफिकेशन सिस्टम
पुराने टूल्स, जैसे स्टेटिक एनालिसिस सिर्फ पहले से तय पैटर्न के आधार पर कमियां ढूंढते हैं, लेकिन क्लाउड कोड सिक्योरिटी एक इंसानी सिक्योरिटी रिसर्चर की तरह सोचता है। यह कोड के लॉजिक को समझता है, डेटा फ्लो को देखता है और उन पेचीदा गलतियों को पकड़ लेता है जो नियमों पर आधारित पुराने टूल्स की पकड़ में नहीं आते।
यह भी पढ़ें: Tech Explained: क्या है Claude Cowork, क्यों महज एक एआई टूल से खौफ में हैं आईटी कंपनियां?
इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका 'मल्टी-स्टेज वेरिफिकेशन' प्रोसेस है। एआई किसी भी नतीजे पर पहुँचने से पहले खुद ही अपनी जांच को दोबारा परखता है ताकि गलत जानकारी की गुंजाइश न रहे। साथ ही, यह खतरों को उनकी गंभीरता के हिसाब से रेटिंग भी देता है ताकि टेक टीमें सबसे जरूरी काम पहले कर सकें।
पुराने टूल्स, जैसे स्टेटिक एनालिसिस सिर्फ पहले से तय पैटर्न के आधार पर कमियां ढूंढते हैं, लेकिन क्लाउड कोड सिक्योरिटी एक इंसानी सिक्योरिटी रिसर्चर की तरह सोचता है। यह कोड के लॉजिक को समझता है, डेटा फ्लो को देखता है और उन पेचीदा गलतियों को पकड़ लेता है जो नियमों पर आधारित पुराने टूल्स की पकड़ में नहीं आते।
यह भी पढ़ें: Tech Explained: क्या है Claude Cowork, क्यों महज एक एआई टूल से खौफ में हैं आईटी कंपनियां?
इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका 'मल्टी-स्टेज वेरिफिकेशन' प्रोसेस है। एआई किसी भी नतीजे पर पहुँचने से पहले खुद ही अपनी जांच को दोबारा परखता है ताकि गलत जानकारी की गुंजाइश न रहे। साथ ही, यह खतरों को उनकी गंभीरता के हिसाब से रेटिंग भी देता है ताकि टेक टीमें सबसे जरूरी काम पहले कर सकें।
500 से ज्यादा खामियां खोजने का दावा
एंथ्रोपिक का दावा है कि उनके Claude Opus 4.6 मॉडल ने ओपन-सोर्स कोड में 500 से ज्यादा ऐसी कमियां ढूंढ निकालीं हैं जो दशकों से छिपी हुई थीं। हैरानी की बात यह है कि कई वर्षों तक दुनिया भर के एक्सपर्ट्स की नजरों के सामने होने के बावजूद ये कमियां कभी पकड़ी नहीं गईं। कंपनी अब इस टूल का इस्तेमाल खुद के सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए भी कर रही है।
शेयर मार्केट में क्यों है डर का माहौल?
जैसे ही एंथ्रोपिक ने अपने इस नए टूल के लॉन्च का एलान किया, सबसे पहले इसका असर अमेरिकी स्टॉक मार्केट में देखा गया। इस नए टूल के आने की खबर ने साइबर सिक्योरिटी सेक्टर में खलबली मचा दी। देखते ही देखते क्राउड स्ट्राइक, ओकटा, क्लाउडफ्लेयर, सेलपॉइंट और जेडस्केलर जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में लगभग 5% से 9% की भारी गिरावट आई और इनके निवेशकों के अरबों डॉलर स्वाहा हो गए। लेकिन आखिर साइबर सिक्योरिटी कंपनियों और निवेशकों में ये डर क्यों हैं?
एंथ्रोपिक का दावा है कि उनके Claude Opus 4.6 मॉडल ने ओपन-सोर्स कोड में 500 से ज्यादा ऐसी कमियां ढूंढ निकालीं हैं जो दशकों से छिपी हुई थीं। हैरानी की बात यह है कि कई वर्षों तक दुनिया भर के एक्सपर्ट्स की नजरों के सामने होने के बावजूद ये कमियां कभी पकड़ी नहीं गईं। कंपनी अब इस टूल का इस्तेमाल खुद के सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए भी कर रही है।
शेयर मार्केट में क्यों है डर का माहौल?
जैसे ही एंथ्रोपिक ने अपने इस नए टूल के लॉन्च का एलान किया, सबसे पहले इसका असर अमेरिकी स्टॉक मार्केट में देखा गया। इस नए टूल के आने की खबर ने साइबर सिक्योरिटी सेक्टर में खलबली मचा दी। देखते ही देखते क्राउड स्ट्राइक, ओकटा, क्लाउडफ्लेयर, सेलपॉइंट और जेडस्केलर जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में लगभग 5% से 9% की भारी गिरावट आई और इनके निवेशकों के अरबों डॉलर स्वाहा हो गए। लेकिन आखिर साइबर सिक्योरिटी कंपनियों और निवेशकों में ये डर क्यों हैं?
इसका सीधा जवाब कंपनियों को मिलने वाले ऑर्डर यानी डिमांड से है। दरअसल, साइबर सिक्योरिटी कंपनियां अपने क्लाइंट से सर्विस के लिए मोटी फीस वसूलती हैं। डर इस बात का है कि अगर कंपनियां एआई के जरिए खुद समाधान विकसित करने लगेंगी, तो पुराने साइबर सुरक्षा सॉफ्टवेयर की मांग घट सकती है। इससे इन कंपनियों की ग्रोथ, मुनाफे के मार्जिन और लंबी अवधि की प्राइसिंग पावर पर दबाव पड़ सकता है।
यह भी पढ़ें: एंथ्रोपिक से नाराज पेंटागन: सीईओ डारियो अमोदेई को किया तलब, Claude AI का सैन्य उपयोग करना चाहता है रक्षा विभाग
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, निवेशकों को चिंता है कि “वाइब कोडिंग” यानी एआई की मदद से सॉफ्टवेयर कोड तैयार करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इससे यूजर्स खुद अपने एप्लिकेशन बना रहे हैं। जिससे भविष्य में पारंपरिक सॉफ्टवेयर कंपनियों पर उनकी निर्भरता कम हो सकती है।
एआई की रेस में परंपरिक कंपनियों के अस्तित्व पर खतरा
एंथ्रोपिक का यह नया टूल सिर्फ एक प्रोडक्ट लॉन्च नहीं, बल्कि साइबर सिक्योरिटी इंडस्ट्री में बदलाव का बड़ा संकेत है। अगर एआई खुद ही कोड लिखने और खामियां को खोज कर ठीक करने लगे, तो पारंपरिक कंपनियों को अपनी रणनीति बदलनी होगी। फिलहाल बाजार की प्रतिक्रिया डर से प्रेरित दिखती है, लेकिन आने वाले समय में असली सवाल यह होगा कि क्या ये दिग्गज कंपनियां एआई को खतरे की जगह अवसर में बदल पाती हैं या नहीं।
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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, निवेशकों को चिंता है कि “वाइब कोडिंग” यानी एआई की मदद से सॉफ्टवेयर कोड तैयार करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इससे यूजर्स खुद अपने एप्लिकेशन बना रहे हैं। जिससे भविष्य में पारंपरिक सॉफ्टवेयर कंपनियों पर उनकी निर्भरता कम हो सकती है।
एआई की रेस में परंपरिक कंपनियों के अस्तित्व पर खतरा
एंथ्रोपिक का यह नया टूल सिर्फ एक प्रोडक्ट लॉन्च नहीं, बल्कि साइबर सिक्योरिटी इंडस्ट्री में बदलाव का बड़ा संकेत है। अगर एआई खुद ही कोड लिखने और खामियां को खोज कर ठीक करने लगे, तो पारंपरिक कंपनियों को अपनी रणनीति बदलनी होगी। फिलहाल बाजार की प्रतिक्रिया डर से प्रेरित दिखती है, लेकिन आने वाले समय में असली सवाल यह होगा कि क्या ये दिग्गज कंपनियां एआई को खतरे की जगह अवसर में बदल पाती हैं या नहीं।