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एपल-ओपनएआई के बीच बढ़ी रार: कोर्ट में एक-दूसरे से भिड़ी कंपनियां, लगाए गंभीर आरोप; समझिए क्या है विवाद की जड़
Wed, 02 Sep 2026 11:55 AM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Wed, 02 Sep 2026 11:55 AM IST
सार
कभी एआई को लेकर एक दूसरे का हाथ थामने वाली एपल और ओपनएआई आज अमेरिकी कोर्ट में आमने-सामने खड़ी हैं। एपल ने ओपनएआई पर गंभीर आरोप लगाए हैं, तो दूसरी ओर ओपनएआई इन आरोपों को बेबुनियाद बता रही है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि दोनों कंपनियों को विवाद सुलझाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा? आइए जानते हैं...
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अमेरिकी कोर्ट में चल रही है विवाद पर सुनवाई
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
टेक जगत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक एपल (Apple) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की अग्रणी कंपनी ओपनएआई (OpenAI) के बीच इन दिनों एक बड़ा कानूनी विवाद चल रहा है। कभी पार्टनरशिप की राह पर चलने वाली ये दोनों कंपनियां अब अदालत में आमने-सामने हैं। सोमवार को सैन जोस की अमेरिकी अदालत में ओपनएआई ने अपना बचाव करते हुए एपल के ट्रेड सीक्रेट चोरी के आरोपों को खारिज कर दिया। कंपनी ने कहा कि एपल यह साबित नहीं कर पाई कि उसके पूर्व कर्मचारियों ने कोई गोपनीय जानकारी चुराई।
बता दें कि एपल ने जुलाई में ओपनएआई और अपने पूर्व कर्मचारियों टैंग टैन तथा चांग लियू पर मुकदमा दायर कर हार्डवेयर डिजाइन, निर्माण और सप्लाई-चेन से जुड़े ट्रेड सीक्रेट चुराने का आरोप लगाया था। आइए विस्तार से समझते हैं इस पूरे विवाद की शुरुआत कैसे हुई और वर्तमान में परिस्थितियां क्या हैं।
एपल और ओपनएआई के विवाद की पूरी कहानी
जून 2024 में एपल ने अपने वार्षिक डेवलपर कॉन्फ्रेंस (WWDC) में एपल इंटेलिजेंस (Apple Intelligence) पेश किया था। उस समय एपल के अपने एआई मॉडल हर तरह के जटिल सवालों के लिए पर्याप्त नहीं थे। इसलिए कंपनी ने ओपनएआई के साथ साझेदारी की और चैटजीपीटी को आईफोन, आईपैड और मैक के अनुभव में शामिल करने का एलान किया।
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इस व्यवस्था में सीरी (Siri) जरूरत पड़ने पर यूजर से अनुमति लेकर सवाल चैटजीपीटी को भेज सकती थी। चैटजीपीटी को एपल के राइटिंग टूल्स और दूसरे एआई फीचर्स के साथ भी जोड़ा गया। शुरुआत में दोनों कंपनियों के लिए यह साझेदारी फायदे का सौदा दिख रही थी। एपल को बेहतर जनरेटिव एआई क्षमता मिल रही थी और ओपनएआई को करोड़ों एपल यूजर्स तक पहुंच।
लेकिन समस्या तब बढ़ी जब एपल को एहसास हुआ कि वह अपने एआई सिस्टम को सिर्फ ओपनएआई पर निर्भर नहीं रखना चाहता। एपल ने अपनी एआई क्षमताओं को विकसित करने पर जोर जारी रखा। इसके बाद कंपनी ने गूगल के जेमिनी मॉडल को सीरी और एपल इंटेलिजेंस के लिए इस्तेमाल करने की दिशा में कदम बढ़ाया। नवंबर 2025 में रिपोर्ट सामने आई कि एपल नई सीरी के लिए गूगल जेमिनी को इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है।
जनवरी 2026 में एपल और गूगल के बीच जेमिनी को सीरी के लिए इस्तेमाल करने की डील हुई। इसका मतलब यह था कि ओपनएआई, जिसे कभी एपल के एआई भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका मिलती दिख रही थी, अब सीरी के मुख्य एआई इंजन की दौड़ में पीछे हो गया। चैटजीपीटी की भूमिका अधिकतर जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल होने वाले विकल्प तक सीमित होने लगी। यहीं से दोनों कंपनियों के रिश्तों में तनाव शुरू हुआ।
टाइमलाइन में समझें पूरी कहानी
मई 2026 में सार्वजनिक हुआ विवाद
रिपोर्ट्स के मुताबिक ओपनएआई को लगता था कि 2024 की साझेदारी से उसे जितना व्यावसायिक और रणनीतिक फायदा मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। खास तौर पर ओपनएआई इस बात से नाराज थी कि एपल ने चैटजीपीटी को अपने प्लेटफॉर्म पर उतना प्रमुख स्थान नहीं दिया, जितनी उम्मीद थी। ओपनएआई ने कथित तौर पर एपल के साथ विवाद सुलझाने की कोशिश की, लेकिन मामला नहीं सुलझा। इसके बाद ओपनएआई के वकीलों ने एपल के खिलाफ संभावित कानूनी कार्रवाई के विकल्पों पर काम करना शुरू किया।
एपल ने ओपनएआई पर मुकदमा दायर किया
10 जुलाई 2026 को विवाद ने सबसे गंभीर रूप ले लिया। एपल ने अमेरिकी संघीय अदालत में ओपनएआई और अपने दो पूर्व कर्मचारियों तांग टैन (Tang Tan) और चांग लियू (Chang Liu) के खिलाफ मुकदमा दायर किया। एपल का आरोप है कि उसके कुछ पूर्व कर्मचारियों ने कंपनी की गोपनीय जानकारी को ओपनएआई के साथ साझा किया या ऐसी जानकारी तक पहुंच बनाए रखी, जिसका इस्तेमाल ओपनएआई अपने उपभोक्ता हार्डवेयर को विकसित करने में कर सकता था।
यह भी पढ़ें: एआई पर लगाम ढीली रखने के पक्ष में अमेरिका: जी20 देशों से कहा- इनोवेशन को रोकने वाले नियम बनाने से बचें
एपल ने आरोप लगाया कि ओपनएआई जानबूझकर उसके पूर्व कर्मचारियों के जरिए एपल के हार्डवेयर डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस और सप्लाई चेन से जुड़ी बेहद संवेदनशील और गोपनीय जानकारी चुरा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ओपनएआई अब तक एपल के लगभग 400 से अधिक पूर्व कर्मचारियों को अपने पाले में कर चुका है। एपल का मानना है कि ओपनएआई इन कर्मचारियों का इस्तेमाल अपने गुप्त कंज्यूमर हार्डवेयर डिवाइस प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए कर रहा है।
ओपनएआई के चांग लियू पर गंभीर आरोप
हाल के दिनों में यानी 31 अगस्त और 1 सितंबर 2026 को आए नए अदालती दस्तावेजों ने इस केस में बड़ा मोड़ ला दिया है। एपल ने अदालत में दाखिल दस्तावेज में अपने पूर्व आईफोन इंजीनियर चांग लियू पर आरोप लगाया कि लियू ने कंपनी छोड़ने के बाद भी एपल के क्लाउड स्टोरेज का अनधिकृत एक्सेस जारी रखा। एपल का दावा है कि लियू ने न केवल एपल का एक गोपनीय सर्किट स्केमैटिक (सर्किट डिजाइन) डाउनलोड किया, बल्कि ओपनएआई में अपने काम के दौरान उसका इस्तेमाल भी किया।
एपल ने फोरेंसिक जांच का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि चांग लियू ने पकड़े जाने के डर से अपनी एक ओपनएआई सहकर्मी को सबूत नष्ट करने के निर्देश दिए थे, जिसे उस सहकर्मी ने स्वीकार भी किया था।
एपल का सबसे बड़ा डर यह है कि अगर यह गोपनीय डेटा ओपनएआई के किसी एआई एजेंट या मॉडल को ट्रेन करने में इस्तेमाल हो चुका है, तो सिर्फ ओरिजिनल फाइल डिलीट करने से वो डेटा वापस नहीं आएगा, क्योंकि एआई उसे पहले ही सीख चुका होगा।
ओपनएआई का पलटवार: "गलती एपल की, दोष दूसरों पर"
ओपनएआई ने एपल के इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए अदालत से इस मुकदमे को पूरी तरह से बंद करने की मांग की है। ओपनएआई ने आधिकारिक बयान जारी कर इस मुकदमे को "लापरवाह, आक्रामक और अजीब तरह से व्यक्तिगत" बताया है। कंपनी ने सोमवार को सैन जोस की अमेरिकी अदालत में दाखिल जवाब में एपल द्वारा लगाए गए ट्रेड सीक्रेट चोरी के आरोपों को खारिज कर दिया। कंपनी ने कहा कि एपल यह साबित नहीं कर पाई कि उसके पूर्व कर्मचारियों ने कोई गोपनीय जानकारी चुराई है।
ओपनएआई ने कोर्ट फाइलिंग में कहा, "यह विवाद एपल की अपनी ही खराब ऑफबोर्डिंग प्रक्रियाओं और डेटा एक्सेस नीतियों का नतीजा है। वह अपनी कमियों का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की कोशिश कर रहा है।"
ओपनएआई का आरोप है कि एपल इस कानूनी दांवपेच का इस्तेमाल केवल इसलिए कर रहा है ताकि एआई हार्डवेयर के क्षेत्र में उभर रहे एक नए प्रतिद्वंद्वी को रोका जा सके और अपने कर्मचारियों को दूसरी कंपनियों में जाने से डराया जा सके।
यह भी पढ़ें: टिम कुक ने छोड़ी एपल सीईओ की कुर्सी: 15 साल में कंपनी को 4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाया, एक्स पर किया भावुक पोस्ट
आगे क्या होगा?
दोनों कंपनियों के बीच चल रही यह लड़ाई अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर है। जहां एक तरफ एपल कोर्ट से जल्द से जल्द प्री-ट्रायल फैक्ट-फाइंडिंग की मांग कर रहा है, वहीं ओपनएआई इस केस को खारिज कराने पर अड़ा है। अगर एपल अपने आरोप साबित कर देता है, तो ओपनएआई के आगामी एआई हार्डवेयर कारोबार पर गंभीर असर पड़ सकता है। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को जज एडवर्ड जे. डाविला के सामने होनी तय हुई है, जिसमें यह तय होगा कि यह मुकदमा आगे चलेगा या नहीं।
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बता दें कि एपल ने जुलाई में ओपनएआई और अपने पूर्व कर्मचारियों टैंग टैन तथा चांग लियू पर मुकदमा दायर कर हार्डवेयर डिजाइन, निर्माण और सप्लाई-चेन से जुड़े ट्रेड सीक्रेट चुराने का आरोप लगाया था। आइए विस्तार से समझते हैं इस पूरे विवाद की शुरुआत कैसे हुई और वर्तमान में परिस्थितियां क्या हैं।
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एपल और ओपनएआई के विवाद की पूरी कहानी
जून 2024 में एपल ने अपने वार्षिक डेवलपर कॉन्फ्रेंस (WWDC) में एपल इंटेलिजेंस (Apple Intelligence) पेश किया था। उस समय एपल के अपने एआई मॉडल हर तरह के जटिल सवालों के लिए पर्याप्त नहीं थे। इसलिए कंपनी ने ओपनएआई के साथ साझेदारी की और चैटजीपीटी को आईफोन, आईपैड और मैक के अनुभव में शामिल करने का एलान किया।
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इस व्यवस्था में सीरी (Siri) जरूरत पड़ने पर यूजर से अनुमति लेकर सवाल चैटजीपीटी को भेज सकती थी। चैटजीपीटी को एपल के राइटिंग टूल्स और दूसरे एआई फीचर्स के साथ भी जोड़ा गया। शुरुआत में दोनों कंपनियों के लिए यह साझेदारी फायदे का सौदा दिख रही थी। एपल को बेहतर जनरेटिव एआई क्षमता मिल रही थी और ओपनएआई को करोड़ों एपल यूजर्स तक पहुंच।
लेकिन समस्या तब बढ़ी जब एपल को एहसास हुआ कि वह अपने एआई सिस्टम को सिर्फ ओपनएआई पर निर्भर नहीं रखना चाहता। एपल ने अपनी एआई क्षमताओं को विकसित करने पर जोर जारी रखा। इसके बाद कंपनी ने गूगल के जेमिनी मॉडल को सीरी और एपल इंटेलिजेंस के लिए इस्तेमाल करने की दिशा में कदम बढ़ाया। नवंबर 2025 में रिपोर्ट सामने आई कि एपल नई सीरी के लिए गूगल जेमिनी को इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है।
जनवरी 2026 में एपल और गूगल के बीच जेमिनी को सीरी के लिए इस्तेमाल करने की डील हुई। इसका मतलब यह था कि ओपनएआई, जिसे कभी एपल के एआई भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका मिलती दिख रही थी, अब सीरी के मुख्य एआई इंजन की दौड़ में पीछे हो गया। चैटजीपीटी की भूमिका अधिकतर जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल होने वाले विकल्प तक सीमित होने लगी। यहीं से दोनों कंपनियों के रिश्तों में तनाव शुरू हुआ।
टाइमलाइन में समझें पूरी कहानी
| समय | घटनाक्रम |
|---|---|
| जून 2024 | एपल और ओपनएआई ने चैटजीपीटी को आईफोन, आईपैड और मैक में शामिल करने की साझेदारी की घोषणा की। |
| जुलाई 2025 | एपल की अपनी एआई क्षमताओं और सीरी को लेकर समस्याएं सामने आईं। कंपनी ने वैकल्पिक एआई पार्टनर्स की ओर देखना शुरू किया। |
| नवंबर 2025 | रिपोर्ट आई कि एपल नई सीरी के लिए गूगल जेमिनी का इस्तेमाल कर सकता है। |
| जनवरी 2026 | एपल-गूगल जेमिनी साझेदारी से ओपनएआई की सीरी में भूमिका कमजोर हुई। |
| मई 2026 | ओपनएआई ने एपल के खिलाफ संभावित कानूनी कार्रवाई के विकल्प तलाशने शुरू किए। |
| जून 2026 | एपल ने नई एपल इंटेलिजेंस और एआई-पावर्ड सीरी पेश की। |
| जुलाई 2026 | एपल ने ओपनएआई और पूर्व कर्मचारियों पर ट्रेड सीक्रेट्स के कथित दुरुपयोग को लेकर मुकदमा किया। |
| अगस्त 2026 | ओपनएआई ने मुकदमा खारिज करने की मांग की और एपल के आरोपों को गलत बताया। |
| 31 अगस्त 2026 | एपल ने चांग लियू द्वारा कथित रूप से गोपनीय पावर-सर्किट स्कीमैटिक एक्सेस करने का आरोप लगाया। |
| 1 सितंबर 2026 | ओपनएआई ने जवाब देते हुए कहा कि एपल खुद अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं की कमियों के लिए जिम्मेदार है। |
मई 2026 में सार्वजनिक हुआ विवाद
रिपोर्ट्स के मुताबिक ओपनएआई को लगता था कि 2024 की साझेदारी से उसे जितना व्यावसायिक और रणनीतिक फायदा मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। खास तौर पर ओपनएआई इस बात से नाराज थी कि एपल ने चैटजीपीटी को अपने प्लेटफॉर्म पर उतना प्रमुख स्थान नहीं दिया, जितनी उम्मीद थी। ओपनएआई ने कथित तौर पर एपल के साथ विवाद सुलझाने की कोशिश की, लेकिन मामला नहीं सुलझा। इसके बाद ओपनएआई के वकीलों ने एपल के खिलाफ संभावित कानूनी कार्रवाई के विकल्पों पर काम करना शुरू किया।
एपल ने ओपनएआई पर मुकदमा दायर किया
10 जुलाई 2026 को विवाद ने सबसे गंभीर रूप ले लिया। एपल ने अमेरिकी संघीय अदालत में ओपनएआई और अपने दो पूर्व कर्मचारियों तांग टैन (Tang Tan) और चांग लियू (Chang Liu) के खिलाफ मुकदमा दायर किया। एपल का आरोप है कि उसके कुछ पूर्व कर्मचारियों ने कंपनी की गोपनीय जानकारी को ओपनएआई के साथ साझा किया या ऐसी जानकारी तक पहुंच बनाए रखी, जिसका इस्तेमाल ओपनएआई अपने उपभोक्ता हार्डवेयर को विकसित करने में कर सकता था।
यह भी पढ़ें: एआई पर लगाम ढीली रखने के पक्ष में अमेरिका: जी20 देशों से कहा- इनोवेशन को रोकने वाले नियम बनाने से बचें
एपल ने आरोप लगाया कि ओपनएआई जानबूझकर उसके पूर्व कर्मचारियों के जरिए एपल के हार्डवेयर डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस और सप्लाई चेन से जुड़ी बेहद संवेदनशील और गोपनीय जानकारी चुरा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ओपनएआई अब तक एपल के लगभग 400 से अधिक पूर्व कर्मचारियों को अपने पाले में कर चुका है। एपल का मानना है कि ओपनएआई इन कर्मचारियों का इस्तेमाल अपने गुप्त कंज्यूमर हार्डवेयर डिवाइस प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए कर रहा है।
ओपनएआई के चांग लियू पर गंभीर आरोप
हाल के दिनों में यानी 31 अगस्त और 1 सितंबर 2026 को आए नए अदालती दस्तावेजों ने इस केस में बड़ा मोड़ ला दिया है। एपल ने अदालत में दाखिल दस्तावेज में अपने पूर्व आईफोन इंजीनियर चांग लियू पर आरोप लगाया कि लियू ने कंपनी छोड़ने के बाद भी एपल के क्लाउड स्टोरेज का अनधिकृत एक्सेस जारी रखा। एपल का दावा है कि लियू ने न केवल एपल का एक गोपनीय सर्किट स्केमैटिक (सर्किट डिजाइन) डाउनलोड किया, बल्कि ओपनएआई में अपने काम के दौरान उसका इस्तेमाल भी किया।
एपल ने फोरेंसिक जांच का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि चांग लियू ने पकड़े जाने के डर से अपनी एक ओपनएआई सहकर्मी को सबूत नष्ट करने के निर्देश दिए थे, जिसे उस सहकर्मी ने स्वीकार भी किया था।
एपल का सबसे बड़ा डर यह है कि अगर यह गोपनीय डेटा ओपनएआई के किसी एआई एजेंट या मॉडल को ट्रेन करने में इस्तेमाल हो चुका है, तो सिर्फ ओरिजिनल फाइल डिलीट करने से वो डेटा वापस नहीं आएगा, क्योंकि एआई उसे पहले ही सीख चुका होगा।
ओपनएआई का पलटवार: "गलती एपल की, दोष दूसरों पर"
ओपनएआई ने एपल के इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए अदालत से इस मुकदमे को पूरी तरह से बंद करने की मांग की है। ओपनएआई ने आधिकारिक बयान जारी कर इस मुकदमे को "लापरवाह, आक्रामक और अजीब तरह से व्यक्तिगत" बताया है। कंपनी ने सोमवार को सैन जोस की अमेरिकी अदालत में दाखिल जवाब में एपल द्वारा लगाए गए ट्रेड सीक्रेट चोरी के आरोपों को खारिज कर दिया। कंपनी ने कहा कि एपल यह साबित नहीं कर पाई कि उसके पूर्व कर्मचारियों ने कोई गोपनीय जानकारी चुराई है।
ओपनएआई ने कोर्ट फाइलिंग में कहा, "यह विवाद एपल की अपनी ही खराब ऑफबोर्डिंग प्रक्रियाओं और डेटा एक्सेस नीतियों का नतीजा है। वह अपनी कमियों का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की कोशिश कर रहा है।"
ओपनएआई का आरोप है कि एपल इस कानूनी दांवपेच का इस्तेमाल केवल इसलिए कर रहा है ताकि एआई हार्डवेयर के क्षेत्र में उभर रहे एक नए प्रतिद्वंद्वी को रोका जा सके और अपने कर्मचारियों को दूसरी कंपनियों में जाने से डराया जा सके।
यह भी पढ़ें: टिम कुक ने छोड़ी एपल सीईओ की कुर्सी: 15 साल में कंपनी को 4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाया, एक्स पर किया भावुक पोस्ट
आगे क्या होगा?
दोनों कंपनियों के बीच चल रही यह लड़ाई अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर है। जहां एक तरफ एपल कोर्ट से जल्द से जल्द प्री-ट्रायल फैक्ट-फाइंडिंग की मांग कर रहा है, वहीं ओपनएआई इस केस को खारिज कराने पर अड़ा है। अगर एपल अपने आरोप साबित कर देता है, तो ओपनएआई के आगामी एआई हार्डवेयर कारोबार पर गंभीर असर पड़ सकता है। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को जज एडवर्ड जे. डाविला के सामने होनी तय हुई है, जिसमें यह तय होगा कि यह मुकदमा आगे चलेगा या नहीं।