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सीएक्सएमटी: चीन की सबसे बड़ी मेमोरी चिपमेकर ने पेंटागन पर ठोका केस, सैन्य सूची से हटाने की मांग; जानें मामला

Sat, 29 Aug 2026 11:42 PM IST
जागृति शुक्ला टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति शुक्ला Updated Sat, 29 Aug 2026 11:42 PM IST
सार

चीन-अमेरिका की चिप जंग अब कोर्ट पहुंच गई है। चीन की दिग्गज मेमोरी चिप कंपनी चांगशिन मेमोरी टेक्नोलॉजीज ने अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। कंपनी को अमेरिकी सैन्य सूची में शामिल किए जाने पर सीएक्सएमटी ने इस फैसले को चुनौती दी है। आखिर चीन की इस बड़ी चिप कंपनी को अमेरिकी सैन्य सूची में क्यों डाला गया और अब पेंटागन के खिलाफ कोर्ट जाने की नौबत क्यों आई? जानिए पूरा मामला।

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CXMT Sues US Pentagon, Chinese Chipmaker Challenges Military List Designation
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड

विस्तार

चीन की सबसे बड़ी डीआरएएम मेमोरी चिप निर्माता कंपनी चांगशिन मेमोरी टेक्नोलॉजीज यानी सीएक्सएमटी ने अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है। यह कदम तब उठाया गया जब अमेरिकी सरकार ने कंपनी को चीनी सेना यानी पीएलए का समर्थन करने वाली संदिग्ध संस्थाओं की काली सूची में शामिल बनाए रखा ।
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कंपनी को अमेरिकी सरकार की उस सूची में शामिल किया गया है, जिसमें चीन की उन कंपनियों को रखा जाता है जिन्हें अमेरिकी सरकार चीनी सेना का समर्थन करने वाली मानती है। सीएक्सएमटी का कहना है कि उसका चीनी सेना से कोई संबंध नहीं है और वह नागरिक व व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए डीआरएएम चिप बनाती है।
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सीएक्सएमटी ने पेंटागन पर मुकदमा क्यों किया?
  • सीएक्सएमटी ने अपना शिकायत पत्र यूनाइटेड स्टेट्स डिस्ट्रिक्ट कोर्ट फॉर द डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया में दाखिल किया है।
  • कंपनी का कहना है कि उसे अमेरिकी सैन्य सूची में शामिल करने का फैसला मनमाना था। सीएक्सएमटी के अनुसार, यह फैसला पर्याप्त सबूतों पर आधारित नहीं था और इससे कंपनी के उचित प्रक्रिया के अधिकारों का भी उल्लंघन हुआ।
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  • कंपनी ने कहा है कि वह चीनी सैन्य से संबद्ध नहीं है। उसके अनुसार, उसके डीआरएएम चिप्स नागरिक और व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए डिजाइन, तैयार और बेचे जाते हैं, न कि सैन्य उपयोग के लिए।

अमेरिकी सरकार की सूची में कंपनी कैसे पहुंची?
  • सीएक्सएमटी को पहली बार जनवरी 2025 में अमेरिकी रक्षा विभाग की इस सूची में नामित किया गया था। कंपनी ने इस नाम को हटाने की कोशिश भी की।
  • इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन ने जून में किए गए अपडेट में सीएक्सएमटी को सूची में बनाए रखा। यही फैसला अब अदालत में चुनौती दिया गया है।

सूची में नाम आने से क्या नुकसान हो सकत है?
  • अमेरिकी सरकार की इस सूची में शामिल होने का असर सिर्फ सरकारी कारोबार तक सीमित नहीं रह सकता। ऐसी कंपनियों को अमेरिकी सरकार के साथ कारोबार करने से रोका जा सकता है। इसके अलावा कंपनी की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा पर भी असर पड़ सकता है और सरकारी क्षेत्र के बाहर मौजूद कारोबारी साझेदार भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।
  • सीएक्सएमटी का कहना है कि उसे इस नामकरण के बाद से पहले ही प्रतिष्ठा और व्यावसायिक नुकसान उठाना पड़ा है। कंपनी के अनुसार, जनवरी 2025 में शुरुआती नामकरण के बाद से लगातार इसका असर देखने को मिल रहा है।

एपल कनेक्शन ने भी बढ़ाया मामला
  • इसके अलावा सीएक्सएमटी का मामला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि अमेरिकी टेक दिग्गज एपल ने कथित तौर पर अमेरिकी अधिकारियों से सीएक्सएमटी की स्थिति को लेकर विशेष अनुरोध किया था।
  • रिपोर्ट के अनुसार, एपल ने चीन के बाजार में बेचे जाने वाले आईफोन और मैकबुक के लिए सीएक्सएमटी के साथ शुरुआती बातचीत भी की थी। ऐसे में सीएक्सएमटी की अमेरिकी सैन्य सूची में मौजूदगी सिर्फ कंपनी के लिए ही नहीं, बल्कि उन वैश्विक टेक कंपनियों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो चीन के सेमीकंडक्टर सप्लायर्स के साथ काम करना चाहती हैं।

पेंटागन का इसपर क्या कहना है?
अमेरिकी रक्षा विभाग ने मामले पर विस्तृत टिप्पणी करने से इंकार किया है। पेंटागन की ओर से कहा गया कि विभाग की नीति के अनुसार वह लंबित या चल रहे मुकदमों पर टिप्पणी नहीं करता। अब सीएक्सएमटी की याचिका पर अमेरिकी अदालत में आगे की कानूनी प्रक्रिया होगी।


सीएक्सएमटी के मुकदमे में कौन-कौन प्रतिवादी है?
  • सीएक्सएमटी ने मुकदमे में अमेरिकी रक्षा विभाग के अलावा कई वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रतिवादी बनाया है। इनमें डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ, डिप्टी डिफेंस सेक्रेटरी स्टीव फीनबर्ग और असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ डिफेंस फॉर इंडस्ट्रियल बेस पॉलिसी माइकल कैडेनजी शामिल हैं।
  • कंपनी का कहना है कि अमेरिकी सरकार का फैसला उचित आधार और पर्याप्त सबूतों के बिना लिया गया।

 
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