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D2M: बिना इंटरनेट, बिना डेटा पैक 2000 रुपये के फोन पर भी चलेगा टीवी! जानिए D2M सर्विस कैसे बदल देगा खेल?
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Fri, 09 Jan 2026 07:40 PM IST
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सार
What Is D2M Technology: अब आपको फिल्में या लाइव क्रिकेट मैच देखने के लिए महंगे डेटा पैक या वाई-फाई की जरूरत नहीं होगी। भारत में जल्द आ रही एक तकनीक की मदद से सीधे आपके फोन पर वीडियो स्ट्रीम होगा, जो बिना इंटरनेट और डेटा पैक के काम करेगा।
जानिए कैसे काम करेगी D2M सर्विस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जरा कल्पना कीजिए, आप ट्रेन में सफर कर रहे हैं या किसी दूरदराज गांव में हैं जहां नेटवर्क का नामोनिशान नहीं है, फिर भी आपके फोन पर बिना रुके एचडी क्वालिटी में फिल्में और लाइव मैच चल रहे हैं। यह कोई जादू नहीं, बल्कि भारत में जल्द हकीकत बनने जा रहा है। इस नई तकनीक का नाम है D2M यानी डायरेक्ट-टू-मोबाइल। तो आइए जानते हैं क्या है यह तकनीक और कैसे आप बिना इंटरनेट के इसमें वीडियो देख पाएंगे?
क्या है D2M टेक्नोलॉजी और क्यों है खास?
D2M तकनीक बिल्कुल वैसे ही काम करती है जैसे आपके फोन में एफएम रेडियो चलता है। रेडियो के लिए आपको इंटरनेट नहीं चाहिए होती, क्योंकि फोन सीधे टावर से सिग्नल पकड़ता है। ठीक इसी तरह, D2M के जरिए वीडियो कंटेंट सीधे सैटेलाइट या ब्रॉडकास्ट टावर से आपके मोबाइल तक पहुंचेगा। इसके लिए आपको अपना मोबाइल डेटा खर्च करने की रत्ती भर भी जरूरत नहीं पड़ेगी।
यह भी पढ़ें: फोन की बैटरी से जुड़ी इन 6 गलतफहमियों को सच मानना करिए बंद
फीचर फोन चलाने वालों के लिए वरदान
D2M का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह सिर्फ महंगे स्मार्टफोन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बेहद सस्ते फीचर फोन पर भी यह तकनीक काम करेगी। भारत में करीब 20 करोड़ लोग अभी भी कीपैड या फीचर फोन इस्तेमाल करते हैं, जिनके लिए यह किसी डिजिटल क्रांति से कम नहीं है। भारत में करीब 20 करोड़ लोग आज भी ऐसे ही फोन इस्तेमाल करते हैं। अब वे भी बिना इंटरनेट के लाइव टीवी और खबरें देख पाएंगे।
कौन-कौन सी कंपनियां कर रही हैं तैयारी
Lava और HMD जैसी मोबाइल कंपनियां D2M सपोर्ट वाले फीचर फोन पर काम कर रही हैं। इनकी अनुमानित कीमत 2,000 से 2,500 रुपये के बीच हो सकती है। इन फोनों में SL-3000 चिपसेट इस्तेमाल होंगे, जिन्हें टाटा ग्रुप की कंपनी संख्या लैब्स (Saankhya Labs) ने विकसित किया है। संख्या लैब्स का मर्जर पहले ही टाटा समूह की दूरसंचार कंपनी तेजस नेटवर्क्स (Tejas Networks) के साथ हो चुका है। D2M सिग्नल को खास 470-608 MHz बैंड पर ब्रॉडकॉस्ट किया जाएगा। इसके लिए कंपनियों को फोन में खास एंटीना-रीसीवर देना होगा।
शुरुआत में क्या कंटेंट मिलेगा
शुरुआती दौर में D2M प्लेटफॉर्म पर प्रसार भारती का कंटेंट दिखाया जाएगा। यानी दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो से जुड़े चैनल सबसे पहले इस फोन पर उपलब्ध होंगे। आगे चलकर इस सर्विस को स्मार्टफोन में भी जोड़ने की योजना है।
यह भी पढ़ें: अब यूट्यूब पर 5 सेकंड से ज्यादा नहीं झेलना होगा एड, इस देश ने बनाया सख्त कानून
कहां-कहां हो चुके हैं ट्रायल
दिल्ली और बेंगलुरु में D2M के ट्रायल पहले ही पूरे हो चुके हैं। अगले 6 से 9 महीनों में देश के लगभग 36 शहरों में इसके और टेस्ट किए जाएंगे। सफल रहने पर इसे पूरे भारत में लागू किया जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देशभर में D2M नेटवर्क खड़ा करने में करीब 8,000 करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है। हालांकि, टेलीकॉम कंपनियां इस तकनीक को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं हैं, क्योंकि इससे उनके डेटा पैक बिजनेस पर असर पड़ सकता है।
IIT कानपुर की रिपोर्ट में क्या कहा गया
IIT कानपुर ने 2022 में जारी रिपोर्ट में D2M को भारत की भविष्य की जरूरत बताया था। रिपोर्ट के अनुसार, एक ही नेटवर्क से टीवी, रेडियो और डिजिटल सेवाएं देना संभव होगा। हालांकि, मौजूदा फोनों में इसके लिए जरूरी हार्डवेयर नहीं है, इसलिए नए डिजाइन और खास एंटीना-रिसीवर की जरूरत पड़ेगी।
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क्या है D2M टेक्नोलॉजी और क्यों है खास?
D2M तकनीक बिल्कुल वैसे ही काम करती है जैसे आपके फोन में एफएम रेडियो चलता है। रेडियो के लिए आपको इंटरनेट नहीं चाहिए होती, क्योंकि फोन सीधे टावर से सिग्नल पकड़ता है। ठीक इसी तरह, D2M के जरिए वीडियो कंटेंट सीधे सैटेलाइट या ब्रॉडकास्ट टावर से आपके मोबाइल तक पहुंचेगा। इसके लिए आपको अपना मोबाइल डेटा खर्च करने की रत्ती भर भी जरूरत नहीं पड़ेगी।
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फीचर फोन चलाने वालों के लिए वरदान
D2M का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह सिर्फ महंगे स्मार्टफोन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बेहद सस्ते फीचर फोन पर भी यह तकनीक काम करेगी। भारत में करीब 20 करोड़ लोग अभी भी कीपैड या फीचर फोन इस्तेमाल करते हैं, जिनके लिए यह किसी डिजिटल क्रांति से कम नहीं है। भारत में करीब 20 करोड़ लोग आज भी ऐसे ही फोन इस्तेमाल करते हैं। अब वे भी बिना इंटरनेट के लाइव टीवी और खबरें देख पाएंगे।
कौन-कौन सी कंपनियां कर रही हैं तैयारी
Lava और HMD जैसी मोबाइल कंपनियां D2M सपोर्ट वाले फीचर फोन पर काम कर रही हैं। इनकी अनुमानित कीमत 2,000 से 2,500 रुपये के बीच हो सकती है। इन फोनों में SL-3000 चिपसेट इस्तेमाल होंगे, जिन्हें टाटा ग्रुप की कंपनी संख्या लैब्स (Saankhya Labs) ने विकसित किया है। संख्या लैब्स का मर्जर पहले ही टाटा समूह की दूरसंचार कंपनी तेजस नेटवर्क्स (Tejas Networks) के साथ हो चुका है। D2M सिग्नल को खास 470-608 MHz बैंड पर ब्रॉडकॉस्ट किया जाएगा। इसके लिए कंपनियों को फोन में खास एंटीना-रीसीवर देना होगा।
शुरुआत में क्या कंटेंट मिलेगा
शुरुआती दौर में D2M प्लेटफॉर्म पर प्रसार भारती का कंटेंट दिखाया जाएगा। यानी दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो से जुड़े चैनल सबसे पहले इस फोन पर उपलब्ध होंगे। आगे चलकर इस सर्विस को स्मार्टफोन में भी जोड़ने की योजना है।
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कहां-कहां हो चुके हैं ट्रायल
दिल्ली और बेंगलुरु में D2M के ट्रायल पहले ही पूरे हो चुके हैं। अगले 6 से 9 महीनों में देश के लगभग 36 शहरों में इसके और टेस्ट किए जाएंगे। सफल रहने पर इसे पूरे भारत में लागू किया जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देशभर में D2M नेटवर्क खड़ा करने में करीब 8,000 करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है। हालांकि, टेलीकॉम कंपनियां इस तकनीक को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं हैं, क्योंकि इससे उनके डेटा पैक बिजनेस पर असर पड़ सकता है।
IIT कानपुर की रिपोर्ट में क्या कहा गया
IIT कानपुर ने 2022 में जारी रिपोर्ट में D2M को भारत की भविष्य की जरूरत बताया था। रिपोर्ट के अनुसार, एक ही नेटवर्क से टीवी, रेडियो और डिजिटल सेवाएं देना संभव होगा। हालांकि, मौजूदा फोनों में इसके लिए जरूरी हार्डवेयर नहीं है, इसलिए नए डिजाइन और खास एंटीना-रिसीवर की जरूरत पड़ेगी।