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SpaceX: भारत में एंट्री से पहले Starlink की बड़ी जीत! अब आसान हो जाएगा ये काम, मिलेगा सुपरफास्ट इंटरनेट
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Mon, 12 Jan 2026 04:20 PM IST
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सार
Starlink FCC Approval: एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक (Starlink) भारत में कदम रखने की तैयारी में है और इससे पहले उसे एक बड़ी कामयाबी मिली है। अंतरिक्ष में 7,500 नए सैटेलाइट्स भेजने की मंजूरी मिलने से इंटरनेट की रफ्तार और कवरेज में जबरदस्त सुधार होगा, जिसका सीधा फायदा भविष्य में भारतीय ग्रामीण यूजर्स को मिलेगा।
स्टारलिंक को मिली बड़ी कामयाबी
- फोटो : AI जनरेटेड
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विस्तार
दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क का एक बड़ा सपना अब हकीकत बनने के और करीब पहुंच गया है। मस्क के लिए अपने स्टारलिंक प्रोजेक्ट के तहत अब अंतरिक्ष में 7,500 नए और एडवांस सैटेलाइट्स भेजने का रास्ता खुल गया है। अमेरिकी रेगुलेटर फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने मस्क की सैटेलाइट कंपनी SpaceX को इसकी मंजूरी दे दी है, जिससे अब स्टारलिंक के बेड़े में अप्रूव्ड सैटेलाइट्स की कुल संख्या 15,000 हो जाएगी।
इंटरनेट की दुनिया में आएगा बड़ा बदलाव
FCC के चेयरमैन ब्रेंडन कार ने इस फैसले को गेम-चेंजर बताया है। उन्होंने कहा कि इन 7,500 नए सैटेलाइट्स के आने से सैटेलाइट ब्रॉडबैंड की क्षमता पहले से कहीं ज्यादा बढ़ जाएगी। इससे न केवल इंटरनेट की स्पीड बढ़ेगी, बल्कि मार्केट में कंपटीशन भी बढ़ेगा, जिससे ग्राहकों को फायदा होगा।
खास बात यह है कि इस बार कंपनी को 5 अलग-अलग फ्रीक्वेंसी पर काम करने की अनुमति भी मिल गई है। हालांकि, कंपनी को इसके लिए सख्त समय डेडलाइन दी गई है। मस्क को 2028 के अंत तक आधे सैटेलाइट्स और बाकी बचे हुए सैटेलाइट्स 2031 तक अंतरिक्ष में तैनात करने होंगे।
भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?
स्टारलिंक का नेटवर्क अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स का एक जाल है, जो आपस में सिग्नल भेजकर हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाते हैं। सैटेलाइट्स की संख्या बढ़ने का सीधा मतलब है कि इससे कनेक्टिविटी और इंटरनेट की स्पीड बेहतर होगी। स्टारलिंक की टीम पहले से ही भारतीय अधिकारियों के साथ जरूरी लाइसेंस और मंजूरी के लिए बातचीत कर रही है। ऐसे में सैटेलाइट्स की बढ़ती संख्या भारतीय यूजर्स के लिए एक अच्छी खबर है, क्योंकि इससे सर्विस शुरू होते ही उन्हें बेहतरीन नेटवर्क मिल सकेगा।
गांवों के लिए है यह वरदान
एलन मस्क ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि स्टारलिंक की तकनीक घनी आबादी वाले मेट्रो शहरों के मुकाबले दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों के लिए ज्यादा बेहतर है। मस्क का मानना है कि भारी भीड़ वाले शहरों में इतने सारे लोगों को एक साथ सैटेलाइट के जरिए हाई-स्पीड इंटरनेट देना फिलहाल संभव नहीं है। दरअसल, एक निश्चित क्षेत्र के लिए सैटेलाइट की बैंडविड्थ सीमित होती है, इसलिए स्टारलिंक उन जगहों पर सबसे ज्यादा असरदार होगा जहां पारंपरिक फाइबर या केबल इंटरनेट नहीं पहुंच पाता।
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FCC के चेयरमैन ब्रेंडन कार ने इस फैसले को गेम-चेंजर बताया है। उन्होंने कहा कि इन 7,500 नए सैटेलाइट्स के आने से सैटेलाइट ब्रॉडबैंड की क्षमता पहले से कहीं ज्यादा बढ़ जाएगी। इससे न केवल इंटरनेट की स्पीड बढ़ेगी, बल्कि मार्केट में कंपटीशन भी बढ़ेगा, जिससे ग्राहकों को फायदा होगा।
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खास बात यह है कि इस बार कंपनी को 5 अलग-अलग फ्रीक्वेंसी पर काम करने की अनुमति भी मिल गई है। हालांकि, कंपनी को इसके लिए सख्त समय डेडलाइन दी गई है। मस्क को 2028 के अंत तक आधे सैटेलाइट्स और बाकी बचे हुए सैटेलाइट्स 2031 तक अंतरिक्ष में तैनात करने होंगे।
भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?
स्टारलिंक का नेटवर्क अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स का एक जाल है, जो आपस में सिग्नल भेजकर हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाते हैं। सैटेलाइट्स की संख्या बढ़ने का सीधा मतलब है कि इससे कनेक्टिविटी और इंटरनेट की स्पीड बेहतर होगी। स्टारलिंक की टीम पहले से ही भारतीय अधिकारियों के साथ जरूरी लाइसेंस और मंजूरी के लिए बातचीत कर रही है। ऐसे में सैटेलाइट्स की बढ़ती संख्या भारतीय यूजर्स के लिए एक अच्छी खबर है, क्योंकि इससे सर्विस शुरू होते ही उन्हें बेहतरीन नेटवर्क मिल सकेगा।
गांवों के लिए है यह वरदान
एलन मस्क ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि स्टारलिंक की तकनीक घनी आबादी वाले मेट्रो शहरों के मुकाबले दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों के लिए ज्यादा बेहतर है। मस्क का मानना है कि भारी भीड़ वाले शहरों में इतने सारे लोगों को एक साथ सैटेलाइट के जरिए हाई-स्पीड इंटरनेट देना फिलहाल संभव नहीं है। दरअसल, एक निश्चित क्षेत्र के लिए सैटेलाइट की बैंडविड्थ सीमित होती है, इसलिए स्टारलिंक उन जगहों पर सबसे ज्यादा असरदार होगा जहां पारंपरिक फाइबर या केबल इंटरनेट नहीं पहुंच पाता।