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Smartphone Security: सरकार ने कंपनियों से मांगा सोर्स कोड, जानें क्यों एपल-सैमसंग जैसे टेक दिग्गज कर रहे विरोध

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Sun, 11 Jan 2026 07:48 PM IST
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सार

Mobile Data Protection: भारत सरकार  स्मार्टफोन यूजर्स को साइबर ठगी और डेटा चोरी से बचाने के लिए सख्त सुरक्षा नियम लागू करने की तैयारी में है, लेकिन सरकार की प्रस्तावित नए सुरक्षा मानकों के बाद टेक जगत की दिग्गज कंपनियों के बीच खलबली मच गई है। जानिए इसे लेकर कंपनियों का क्या कहना है।
 

Government tightens grip smartphones demands source code causing stir among companies including Apple
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
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विस्तार
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भारत सरकार स्मार्टफोन यूजर्स की साइबर सुरक्षा बढ़ाने के लिए नए नियमों पर विचार कर रही है। रॉयटर्स के मुताबिक सरकारी दस्तावेजों की मानें तो भारत ने टेक दिग्गजों से उनके डिवाइस का सोर्स कोड साझा करने और सॉफ्टवेयर में बड़े बदलाव करने का प्रस्ताव दिया है। इस कदम ने एपल,सैमसंग और शियामी जैसी वैश्विक कंपनियों के बीच भारी चिंता पैदा की दी है।  

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83 सुरक्षा मानकों का 'कड़ा' पैकेज

भारत सरकार स्मार्टफोन यूजर्स की डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए टेलीकॉम सिक्योरिटी एश्योरेंस रिक्वायरमेंट्स ( ITSAR) के तहत 83 सुरक्षा मानकों का प्रस्ताव लाई है। इसका उद्देश्य स्मार्टफोन को एक ऐसे डिजिटल रूप से बदलना है, जिसमें साइबर हमले, डेटा चोरी और जासूसी की कोई गुंजाइश न रहे। यह पूरा ढांचा चार अहम स्तंभों पर आधारित है। इसके प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

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सोर्स कोड की जांच: कंपनियों को अपने डिवाइस का सोर्स कोड सरकार के साथ साझा करना होगा, जिससे उसका सुरक्षा विश्लेषण किया जा सके।
अपडेट से पहले सूचना: किसी भी बड़े सॉफ्टवेयर अपडेट या सिक्योरिटी पैच को जारी करने से पहले सरकार को जानकारी देनी होगी।
मालवेयर स्कैनिंग: हर स्मार्टफोन में नियमित और ऑटोमैटिक मालवेयर स्कैनिंग अनिवार्य होगी।
लॉग स्टोरेज: सिस्टम लॉग्स को 12 महीने तक सुरक्षित रखना होगा।

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कंपनियों को आपत्ति किस पर है?स्मार्टफोन कंपनियों और प्रमुख इंडस्ट्री बॉडी MAIT ने भारत सरकार के इन नियमों को लेकर आपत्ति जताई है। कंपनियों का मानना है कि ये मानक न केवल अव्यावहारिक हैं, बल्कि सुरक्षा के नाम पर डेटा की गोपनीयता के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। उनका सबसे बड़ा तर्क इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) को लेकर है। सोर्स कोड किसी भी कंपनी का सबसे गोपनीय ट्रेड सीक्रेट होता है। कंपनियों को डर है कि इसे साझा करने से उनकी तकनीक सार्वजनिक हो सकती है। इसके अलावा, तकनीकी रूप से यह तर्क दिया जा रहा है कि हर वक्त बैकग्राउंड में मालवेयर स्कैनिंग चलने से फोन की बैटरी बहुत जल्दी खत्म होगी और डिवाइस की प्रोसेसिंग स्पीड भी धीमी हो जाएगी। इंडस्ट्री का कहना है कि यूरोपीय संघ, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे कड़े नियमों वाले बाजारों में भी ऐसे प्रावधान नहीं हैं।

ब्लॉटवेयर और बैकग्राउंड एक्सेस पर लगाम की तैयारी
सरकार का एक मुख्य फोकस स्मार्टफोन में पहले से मौजूद अनचाहे एप्स जैसे ब्लॉटवेयर पर है। अक्सर ये एप्स बिना यूजर की जानकारी के डेटा इकट्ठा करते हैं। नए प्रस्ताव के तहत कंपनियों को इन एप्स को अनइंस्टॉल करने का विकल्प देना होगा। साथ ही, सरकार चाहती है कि एप्स के बैकग्राउंड एक्सेस को पूरी तरह नियंत्रित किया जाए, जिससे वे यूजर की अनुमति के बिना चोरी-छिपे कैमरा या माइक्रोफोन का इस्तेमाल न कर सकें। सरकार का मानना है कि स्मार्टफोन हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में ये बदलाव जासूसी और डेटा चोरी जैसी गंभीर समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए अनिवार्य हैं।

भारत का स्मार्टफोन बाजार क्यों अहम है?

भारत वर्तमान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है, जहां लगभग 75 करोड़ लोग सक्रिय रूप से स्मार्टफोन का उपयोग कर रहे हैं। जबकि बाजार में शाओमी (19%), सैमसंग(15%) और एपल (5%) जैसे ब्रांडों का दबदबा है, जिनके लिए भारत एक प्रमुख रेवेन्यू इंजन है। यदि भारत सरकार इन 83 सुरक्षा मानकों पर अडिग रहती है, तो यह वैश्विक टेक कंपनियों और सरकार के बीच एक बड़े कानूनी और नियामक युद्ध की शुरुआत हो सकती है। टेक एक्सपर्ट्स ने ये भी चेताया है कि अगर संतुलन नहीं बनाया गया, तो कंपनियां भारत में नए मॉडल्स लॉन्च करने में देरी कर सकती हैं या अतिरिक्त अनुपालन लागत का बोझ ग्राहकों की जेब पर पड़ सकता है।

सरकार का क्या कहना है?

आईटी सचिव एस कृष्णन के अनुसार, सरकार का उद्देश्य किसी भी कंपनी के काम में बाधा डालना नहीं, बल्कि भारतीय नागरिकों के डेटा को सुरक्षित करना है। सरकार ने बातचीत का रास्ता खुला रखा है और इंडस्ट्री की वैध चिंताओं पर विचार करने का आश्वासन दिया है। 
टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये कदम भारत की डिजिटल संप्रभुता को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। भारत चाहता है कि उसके नागरिकों का डेटा देश के भीतर सुरक्षित रहे और डिवाइस के स्तर पर कोई सुरक्षा खामी न रहे। हालांकि, सुरक्षा और तकनीकी नवाचार के बीच बारीक रेखा को बनाए रखना भी चुनौती है।  

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