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अब स्कैमर्स की खैर नहीं: डिजिटल अरेस्ट रोकने के लिए सरकार सख्त, WhatsApp पर ब्लॉक होगी डिवाइस ID; जानें नियम
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Sat, 21 Mar 2026 02:06 PM IST
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सार
Digital Arrest Scam India Prevention: डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब केवल व्हाट्सएप अकाउंट डिलीट करना काफी नहीं होगा, क्याेंकि अब जिस फोन (डिवाइस ID) से ठगी की जा रही है, उसे ही हमेशा के लिए ब्लॉक कर दिया जाएगा। जानिए, क्या है सरकार का नया प्लान और आप खुद को इन डिजिटल लुटेरों से कैसे बचा सकते हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली विंग इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की रिपोर्ट के बाद सरकार ने व्हाट्सएप को लेकर और सख्त निर्देश जारी किए हैं।
अकाउंट नहीं, अब फोन होगा ब्लॉक
अबतक साइबर ठग एक अकाउंट ब्लॉक होने पर दूसरे नंबर से नया अकाउंट बना लेते थे, लेकिन अब सरकार ने यूनिक डिवाइस आईडी को ही ब्लॉक करने का आदेश दिया है।
IMEI नंबर और MAC एड्रेस: ये फोन की ऐसी पहचान हैं जैसे इंसान का आधार नंबर होता है। इन्हें ब्लॉक करने का मतलब है कि उस फोन से फिर कभी व्हाट्सएप या अन्य नेटवर्क सेवाओं का इस्तेमाल नहीं हो पाएगा।
180 दिन का डेटा: आईटी रूल्स 2021 के तहत अब डिलीट किए गए अकाउंट्स का डेटा 180 दिनों तक सुरक्षित रखने पर जोर दिया जा सकता है, ताकि जांच एजेंसियां अपराधियों तक पहुंच सकें।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या होता है?
यह एक खतरनाक साइबर फ्रॉड है जिसमें स्कैमर्स खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य कोई अधिकारी बताते हैं। वो आपको कॉल करके किसी फर्जी केस में फंसाने की धमकी देते हैं। आपके नाम से कोई अवैध पार्सल आया है या आपके बैंक खाते से मनी लॉन्ड्रिंग हुई है, ऐसे झूठे केस बताकर डरवाते हैं और पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं। साथ ही वीडियो कॉल पर डिजिटल हिरासत में रहने को कहते है। सामने वाला हड़बड़ी में मोटी रकम ट्रांसफर कर देता है, इसके बाद ये गायब हो जाते हैं। इसलिए आपके ध्यान रहे कि भारत में ऑनलाइन गिरफ्तारी जैसा कोई कानून नहीं है, इसलिए ऐसा कोई भी कॉल आने पर तुरंत सतर्क हो जाएं।
डिजिटल ठगी से बचने के रूल्स
ऑनलाइन गिरफ्तारी जैसा कुछ नहीं: कानून में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जहां पुलिस आपको फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तार करे या कैमरे के सामने रहने को कहे।
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अकाउंट नहीं, अब फोन होगा ब्लॉक
अबतक साइबर ठग एक अकाउंट ब्लॉक होने पर दूसरे नंबर से नया अकाउंट बना लेते थे, लेकिन अब सरकार ने यूनिक डिवाइस आईडी को ही ब्लॉक करने का आदेश दिया है।
IMEI नंबर और MAC एड्रेस: ये फोन की ऐसी पहचान हैं जैसे इंसान का आधार नंबर होता है। इन्हें ब्लॉक करने का मतलब है कि उस फोन से फिर कभी व्हाट्सएप या अन्य नेटवर्क सेवाओं का इस्तेमाल नहीं हो पाएगा।
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180 दिन का डेटा: आईटी रूल्स 2021 के तहत अब डिलीट किए गए अकाउंट्स का डेटा 180 दिनों तक सुरक्षित रखने पर जोर दिया जा सकता है, ताकि जांच एजेंसियां अपराधियों तक पहुंच सकें।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या होता है?
यह एक खतरनाक साइबर फ्रॉड है जिसमें स्कैमर्स खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य कोई अधिकारी बताते हैं। वो आपको कॉल करके किसी फर्जी केस में फंसाने की धमकी देते हैं। आपके नाम से कोई अवैध पार्सल आया है या आपके बैंक खाते से मनी लॉन्ड्रिंग हुई है, ऐसे झूठे केस बताकर डरवाते हैं और पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं। साथ ही वीडियो कॉल पर डिजिटल हिरासत में रहने को कहते है। सामने वाला हड़बड़ी में मोटी रकम ट्रांसफर कर देता है, इसके बाद ये गायब हो जाते हैं। इसलिए आपके ध्यान रहे कि भारत में ऑनलाइन गिरफ्तारी जैसा कोई कानून नहीं है, इसलिए ऐसा कोई भी कॉल आने पर तुरंत सतर्क हो जाएं।
डिजिटल ठगी से बचने के रूल्स
ऑनलाइन गिरफ्तारी जैसा कुछ नहीं: कानून में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जहां पुलिस आपको फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तार करे या कैमरे के सामने रहने को कहे।
- बैंक डिटेल्स कभी साझा न करें: कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर आपसे बैंक बैलेंस, ओटीपी या पैसे ट्रांसफर करने की मांग नहीं करती।
- अनजान कॉल्स से न डरें: अगर कोई आपको डराता है, तो तुरंत फोन काटें और अपने करीबी पुलिस स्टेशन या परिवार को सूचित करें।
- सरकारी पोर्टल पर करें शिकायत: अगर आपको कोई संदिग्ध कॉल आता है, तो तुरंत sancharsaathi.gov.in पोर्टल पर जाकर उसकी रिपोर्ट करें। या फिर नजदीकी पुलिस स्टेशन या हेल्पलाइन पर संपर्क करें।