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Internet Shutdown: ईरान विरोध प्रदर्शन; जब इंटरनेट हुआ बंद, तो स्टारलिंक कैसे बना लोगों की आखिरी उम्मीद?

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुयश पांडेय Updated Wed, 14 Jan 2026 10:23 AM IST
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सार

विरोध प्रदर्शनों के दौरान इंटरनेट बंद करना सरकारों का आम हथियार बन चुका है, लेकिन ईरान में हालिया घटनाओं ने दिखा दिया कि यह तरीका अब पूरी तरह कारगर नहीं रहा। इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद कुछ ईरानियों ने सेवा स्टारलिंक की मदद से इंटरनेट चलाया। 

How Starlink Helped Iranians Bypass Internet Shutdowns During Protests
स्टारलिंक इंटरनेट (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Starlink
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विस्तार
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जब किसी देश में बड़े विरोध प्रदर्शन होते हैं तो सरकार अक्सर सबसे पहले इंटरनेट बंद कर देती है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि लोग आपस में संपर्क न कर सकें, वीडियो-तस्वीरें बाहर न जा पाएं और खबरें फैलना धीमा हो जाए। इससे प्रदर्शन कमजोर पड़ते हैं। ईरान में भी हालिया विरोध के दौरान ऐसा ही हुआ जब इंटरनेट लगभग पूरी तरह ठप हो गया। लेकिन इंटरनेट बंद होने के बाद भी कुछ ईरानियों ने 'स्टारलिंक' सैटेलाइट इंटरनेट का रास्ता ढूंढ निकाला। 

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स्टारलिंक क्या है और यह इंटरनेट ब्लैकआउट में कैसे काम आता है?

स्टारलिंक, एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है। सैटेलाइट इंटरनेट मोबाइल टावर या फाइबर केबल पर निर्भर नहीं करता बल्कि सीधे सैटेलाइट से इंटरनेट मुहैया कराता है। इसी वजह से सरकार के लिए इसे एक साथ हर जगह बंद करना मुश्किल होता है। ब्लैकआउट के दौरान ईरान में कुछ लोगों ने स्टारलिंक से इंटरनेट चलने की जानकारी दी, हालांकि कनेक्शन कभी-कभी कमजोर रहता है। फिर भी यह इसलिए अहम है क्योंकि इससे लोग:

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  • देश के बाहर वीडियो और फोटो भेज पाते हैं
  • विदेश में अपने रिश्तेदारों से बात कर पाते हैं
  • मैसेजिंग एप्स और खबरों तक पहुंच बना पाते हैं
  • उन इलाकों में पहुंच बना पाते हैं जहां मोबाइल डाटा पूरी तरह बंद है

ईरान में बैन होने के बावजूद स्टारलिंक कैसे पहुंचा?

ईरान में स्टारलिंक आधिकारिक तौर पर बैन है और सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा मानती है। फिर भी तस्करी के रास्तों से सैटेलाइट इंटरनेट के टर्मिनल ईरान के अंदर पहुंचे हैं। समय के साथ एक गुप्त नेटवर्क बन गया है, जहां एक डिवाइस से कई लोग इंटरनेट चलाते हैं। माना जाता है कि अब ईरान में हजारों ऐसे टर्मिनल हो सकते हैं।

ईरान इसे रोकने की कोशिश कैसे करता है?

सरकार सिर्फ मोबाइल डाटा बंद नहीं करती बल्कि स्टारलिंक पर भी कड़ी नजर रखती है। इसके रोकथाम के लिए सरकार के जरिए ये कदम उठाए जाते हैं:

सिग्नल जैमिंग: सैटेलाइट सिग्नल में दखल देकर कनेक्शन कमजोर किया जाता है ताकि वीडियो/तस्वीरें अपलोड न हो सकें।
उपकरणों की खोज: सैटेलाइट डिश और टर्मिनल ढूंढकर जब्त किए जाते हैं, खासकर संवेदनशील इलाकों में।

तकनीकी 'चूहे-बिल्ली' का खेल

यह एक लगातार चलने वाली तकनीकी लड़ाई है। स्टारलिंक जैमिंग से बचने के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट और तकनीकी बदलाव करता है। कभी कनेक्शन सुधरता है, कभी फिर बिगड़ जाता है। सब कुछ दोनों पक्षों की तेजी पर निर्भर करता है।

कानूनी खतरे भी बढ़े

ईरान ने स्टारलिंक से जुड़े कानून और सख्त कर दिए हैं। इसे रखना या ले जाना गंभीर अपराध माना जा रहा है और रिपोर्ट्स के मुताबिक 10 साल तक की जेल हो सकती है। इसलिए इसे देश के अंदर उपयोग करना बेहद जोखिम भरा है।

अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय राजनीति

पहले रास्ते में सिर्फ ईरान के कानून नहीं बल्कि अमेरिकी प्रतिबंध भी बाधा थे। 2022 में अमेरिका ने कुछ नियमों में ढील दी, ताकि ईरानियों की इंटरनेट आजादी को समर्थन मिल सके।
वहीं ईरान ने यूनाइटेड नेशन के दूरसंचार मंच पर शिकायत की है कि स्टारलिंक बिना अनुमति काम कर रहा है।

ट्रम्प और मस्क का जिक्र

रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ब्लैकआउट पर चर्चा की और मस्क से कनेक्टिविटी मजबूत करने की बात की। मस्क ने संकेत दिया कि उनकी टीम जैमिंग से निपटने के तरीके खोज रही है।

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