फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Technology ›   Tech Diary ›   iit madras flat plate pulsating heat pipe cooling technology hindi

Cooling System: आईआईटी मद्रास की नई तकनीक करेगी कमाल, स्मार्टफोन से डेटा सेंटर और EV तक... सब रहेंगे ठंडे

Mon, 27 Jul 2026 05:32 PM IST
नीतीश कुमार टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Mon, 27 Jul 2026 05:32 PM IST
सार

IIT मद्रास के होनहार शोधकर्ताओं ने एक ऐसी क्रांतिकारी और बिना मोटर के काम करने वाली कूलिंग तकनीक विकसित की है, जो स्मार्टफोन, डेटा सेंटर और रक्षा उपकरणों को आसानी से ठंडा रख सकेगी।

विज्ञापन
iit madras flat plate pulsating heat pipe cooling technology hindi
आईआईटी मद्रास - फोटो : ANI

विस्तार

स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते समय उसका गर्म हो जाना, लंबे समय तक काम करने के बाद लैपटॉप का ओवरहीट होना या फिर डेटा सेंटर और रक्षा उपकरणों में बढ़ता तापमान, ये सभी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स की बड़ी चुनौतियों में शामिल हैं। अब इन समस्याओं का समाधान भारतीय वैज्ञानिकों की नई खोज से संभव होता नजर आ रहा है। आईआईटी मद्रास के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी एडवांस कूलिंग तकनीक विकसित की है, जो भविष्य में कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कार्यक्षमता और भरोसेमंद प्रदर्शन को बेहतर बना सकती है।
विज्ञापन


क्या है नई कूलिंग तकनीक?
  • आईआईटी मद्रास की टीम ने फ्लैट प्लेट पल्सेटिंग हीट पाइप का नया डिजाइन तैयार किया है। यह तकनीक कम जगह में भी तेजी से गर्मी बाहर निकालने में सक्षम है। खास बात यह है कि इसमें किसी मोटर या पंप की जरूरत नहीं पड़ती।
  • विज्ञापन
  • इस सिस्टम के भीतर बेहद पतली नलिकाओं में एक खास लिक्विड भरा जाता है। जब किसी हिस्से का तापमान बढ़ता है, तो यह लिक्विड भाप में बदलकर ठंडे हिस्से तक पहुंचता है। वहां दोबारा तरल बनकर वापस लौट आता है। यही प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और डिवाइस का तापमान नियंत्रण में रहता है।
  • विज्ञापन
    विज्ञापन

दुनिया में पहली बार 'एंटीपैरलल डिजाइन' का कमाल
अब तक दुनिया भर में जो भी ऐसे कूलिंग सिस्टम बनते थे, उनमें गर्मी सोखने और गर्मी छोड़ने वाला हिस्सा प्लेट के एक ही तरफ होता था। लेकिन आईआईटी मद्रास के वैज्ञानिकों ने कुछ अलग सोचा। उन्होंने पहली बार एक 'एंटीपैरलल डिजाइन' बनाया, जहां ये दोनों हिस्से प्लेट के आमने-सामने (विपरीत सतहों पर) लगाए गए हैं। इस छोटे से बदलाव का फायदा यह है कि अब इस कूलिंग सिस्टम को बेहद छोटे और स्लिम इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स में भी आसानी से फिट किया जा सकेगा।

तांबे को पछाड़ एल्युमिनियम ने मारी बाजी
  • इस रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने दो अलग-अलग मॉडल बनाए। एक गैस्केट वाला और दूसरा ओ-रिंग आधारित। परीक्षणों में पता चला कि ओ-रिंग मॉडल में लिक्विड बहुत तेजी से भागता है, जिससे कूलिंग कई गुना बेहतर हो जाती है।
  • सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इस खास डिजाइन में एल्युमिनियम ने तांबे को भी पीछे छोड़ दिया। आमतौर पर तांबे को गर्मी सोखने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, लेकिन इस परीक्षण में एल्युमिनियम का तापीय प्रतिरोध तांबे से लगभग 20% कम रहा। एल्युमिनियम न सिर्फ हल्का होता है, बल्कि इसके इस्तेमाल से गैजेट्स का वजन और उन्हें बनाने का खर्च, दोनों काफी कम हो जाएंगे।
  • इसके अलावा, वैज्ञानिकों ने नलियों के अंदरूनी हिस्से में कुछ खास बदलाव किए, जिससे लिक्विड और बेहतर तरीके से फैलने लगा। इस छोटे से सुधार ने डिवाइस को ठंडा करने की क्षमता में 16% का अतिरिक्त इजाफा कर दिया।

कहां-कहां होगा इसका इस्तेमाल?
अगर यह तकनीक व्यावसायिक स्तर पर अपनाई जाती है, तो इसका उपयोग कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा सकता है। भविष्य में इस तकनीक की मदद से डेटा सेंटर्स कम खर्च में ज्यादा प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगे। रक्षा क्षेत्र में रडार और एवियोनिक्स जैसे भारी-भरकम इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम ज्यादा भरोसेमंद बनेंगे। इतना ही नहीं, इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की बैटरी और पावर कन्वर्टर्स में भी ओवरहीटिंग को रोकने के लिए यह तकनीक एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News App अपने मोबाइल पे|
Get all Tech News in Hindi related to live news update of latest mobile reviews apps, tablets etc. Stay updated with us for all breaking news from Tech and more Hindi News.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed