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5G से 5 गुना ज्यादा ताकत: जियो ने बताया भारत में कब आएगा 6G इंटरनेट, पेश किया पहला गीगा मीमो रेडियो
Fri, 09 Oct 2026 04:08 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Fri, 09 Oct 2026 04:08 PM IST
सार
5G के बाद अब देश में 6G इंटरनेट की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC 2026) में रिलायंस जियो ने भारत के पहले 'गीगा मीमो रेडियो' और प्री-6G स्टैक का लाइव प्रदर्शन करते हुए साफ कर दिया है कि 2030 में ग्लोबल स्टैंडर्ड्स तय होते ही भारत सबसे पहले 6G रोलआउट करेगा। जानिए इस फ्यूचर नेटवर्क की पूरी इनसाइड स्टोरी।
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कब लॉन्च होगा 6G इंटरनेट?
- फोटो : एआई
विस्तार
देशभर में 5G का परचम लहराने के बाद रिलायंस जियो ने अब अगली पीढ़ी यानी 6G वायरलेस तकनीक को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। राजधानी दिल्ली में चल रहे इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC 2026) के मंच से जियो ने भविष्य के डिजिटल भारत का रोडमैप पेश किया। कंपनी का बड़ा दावा है कि साल 2030 में जब दुनिया भर में 6G के अंतरराष्ट्रीय मानक आधिकारिक तौर पर फाइनल होंगे, तब भारत उन चुनिंदा शुरुआती देशों में शामिल होगा जो अपने नागरिकों के लिए कमर्शियल 6G नेटवर्क लाइव करेंगे।
इस विजन को हकीकत में बदलने के लिए जियो ने अपना स्वदेशी प्री-6G स्टैक और देश का पहला गीगा मीमो रेडियो (Giga MIMO Radio) भी तैयार कर लिया है, जिसे IMC में लाइव शोकेस किया गया।
5G से 5 गुना ज्यादा नेटवर्क क्षमता, लेटेंसी में 10 गुना होगी कम
6G केवल इंटरनेट ब्राउजिंग को तेज करने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण कनेक्टिविटी क्रांति होगी। जियो के अनुसार, इस नए नेटवर्क की क्षमता मौजूदा 5G के मुकाबले कम से कम 5 गुना अधिक होगी। इसका सीधा मतलब यह है कि एक ही समय पर नेटवर्क पर लाखों यूजर्स और अरबों डिवाइसेज बिना स्पीड ड्रॉप के एक साथ कनेक्ट रह सकेंगे।
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इसके अलावा, नेटवर्क लेटेंसी (कमांड भेजने और उस पर रिस्पॉन्स मिलने के बीच का समय) को करीब 10 गुना कम करने का लक्ष्य रखा गया है। लगभग 'जीरो लेटेंसी' होने की वजह से कमांड्स का जवाब रियल-टाइम में सेकंड के हजारवें हिस्से में मिलेगा।
तेज रिस्पॉन्स और ज्यादा नेटवर्क क्षमता का फायदा रियल-टाइम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), होलोग्राफिक वीडियो और ऐसी डिजिटल सेवाओं में मिल सकता है, जिनमें तुरंत डेटा प्रोसेस करना जरूरी होता है। हालांकि, वास्तविक स्पीड और परफॉर्मेंस इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी और नेटवर्क की परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगी।
IMC 2026 में भारत के पहले गीगा मीमो रेडियो का जलवा
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में जियो ने गीगा मीमो रेडियो प्रदर्शित किया है। कंपनी इसे भारत का पहला गीगा मीमो रेडियो बता रही है। यह जियो की 6G से जुड़ी तकनीकी तैयारियों का अहम हिस्सा है।
इसके साथ कंपनी ने एक कॉमन बेसबैंड यूनिट भी दिखाई, जो 5G और 6G दोनों के लिए काम कर सकती है। इस तरह के साझा हार्डवेयर से नेटवर्क टेक्नोलॉजी के विकास और बदलाव में मदद मिलने की संभावना है।
जियो ने अपना प्री-6G स्टैक भी तैयार किया है। प्री-6G से जुड़ी तकनीक को भविष्य के नेटवर्क की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। गीगा मीमो रेडियो, प्री-6G स्टैक और साझा बेसबैंड यूनिट के जरिए कंपनी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर, दोनों स्तरों पर अपनी तैयारी आगे बढ़ाना चाहती है।
6G के लिए 8,000 से ज्यादा पेटेंट का दावा
जियो की तैयारी नेटवर्क उपकरणों तक सीमित नहीं है। कंपनी ने 6G टेक्नोलॉजी और उससे जुड़े वैश्विक मानकों के विकास में अपनी भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया है।
कंपनी के मुताबिक, उसने 8,000 से ज्यादा पेटेंट फाइल किए हैं, जिनमें से सैकड़ों पेटेंट 6G से जुड़े हैं। जियो ने ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के लिए 934 से अधिक योगदान देने का भी दावा किया है।
पेटेंट और अंतरराष्ट्रीय मानकों से जुड़े योगदान से किसी कंपनी को नई टेक्नोलॉजी विकसित करने और उसके इस्तेमाल के तरीके तय करने में भूमिका निभाने का मौका मिल सकता है। हालांकि, पेटेंट की कुल संख्या अपने आप में यह साबित नहीं करती कि कोई टेक्नोलॉजी व्यावसायिक रूप से कितनी सफल होगी।
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इस विजन को हकीकत में बदलने के लिए जियो ने अपना स्वदेशी प्री-6G स्टैक और देश का पहला गीगा मीमो रेडियो (Giga MIMO Radio) भी तैयार कर लिया है, जिसे IMC में लाइव शोकेस किया गया।
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5G से 5 गुना ज्यादा नेटवर्क क्षमता, लेटेंसी में 10 गुना होगी कम
6G केवल इंटरनेट ब्राउजिंग को तेज करने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण कनेक्टिविटी क्रांति होगी। जियो के अनुसार, इस नए नेटवर्क की क्षमता मौजूदा 5G के मुकाबले कम से कम 5 गुना अधिक होगी। इसका सीधा मतलब यह है कि एक ही समय पर नेटवर्क पर लाखों यूजर्स और अरबों डिवाइसेज बिना स्पीड ड्रॉप के एक साथ कनेक्ट रह सकेंगे।
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इसके अलावा, नेटवर्क लेटेंसी (कमांड भेजने और उस पर रिस्पॉन्स मिलने के बीच का समय) को करीब 10 गुना कम करने का लक्ष्य रखा गया है। लगभग 'जीरो लेटेंसी' होने की वजह से कमांड्स का जवाब रियल-टाइम में सेकंड के हजारवें हिस्से में मिलेगा।
तेज रिस्पॉन्स और ज्यादा नेटवर्क क्षमता का फायदा रियल-टाइम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), होलोग्राफिक वीडियो और ऐसी डिजिटल सेवाओं में मिल सकता है, जिनमें तुरंत डेटा प्रोसेस करना जरूरी होता है। हालांकि, वास्तविक स्पीड और परफॉर्मेंस इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी और नेटवर्क की परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगी।
IMC 2026 में भारत के पहले गीगा मीमो रेडियो का जलवा
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में जियो ने गीगा मीमो रेडियो प्रदर्शित किया है। कंपनी इसे भारत का पहला गीगा मीमो रेडियो बता रही है। यह जियो की 6G से जुड़ी तकनीकी तैयारियों का अहम हिस्सा है।
इसके साथ कंपनी ने एक कॉमन बेसबैंड यूनिट भी दिखाई, जो 5G और 6G दोनों के लिए काम कर सकती है। इस तरह के साझा हार्डवेयर से नेटवर्क टेक्नोलॉजी के विकास और बदलाव में मदद मिलने की संभावना है।
जियो ने अपना प्री-6G स्टैक भी तैयार किया है। प्री-6G से जुड़ी तकनीक को भविष्य के नेटवर्क की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। गीगा मीमो रेडियो, प्री-6G स्टैक और साझा बेसबैंड यूनिट के जरिए कंपनी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर, दोनों स्तरों पर अपनी तैयारी आगे बढ़ाना चाहती है।
6G के लिए 8,000 से ज्यादा पेटेंट का दावा
जियो की तैयारी नेटवर्क उपकरणों तक सीमित नहीं है। कंपनी ने 6G टेक्नोलॉजी और उससे जुड़े वैश्विक मानकों के विकास में अपनी भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया है।
कंपनी के मुताबिक, उसने 8,000 से ज्यादा पेटेंट फाइल किए हैं, जिनमें से सैकड़ों पेटेंट 6G से जुड़े हैं। जियो ने ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के लिए 934 से अधिक योगदान देने का भी दावा किया है।
पेटेंट और अंतरराष्ट्रीय मानकों से जुड़े योगदान से किसी कंपनी को नई टेक्नोलॉजी विकसित करने और उसके इस्तेमाल के तरीके तय करने में भूमिका निभाने का मौका मिल सकता है। हालांकि, पेटेंट की कुल संख्या अपने आप में यह साबित नहीं करती कि कोई टेक्नोलॉजी व्यावसायिक रूप से कितनी सफल होगी।