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Smartphone Kill Switch: अब चोरी का फोन नहीं आएगा किसी काम, लॉन्च हुआ 'किल स्वीच', जानें कैसे करता है काम
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Mon, 22 Jun 2026 01:02 PM IST
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सार
Smartphone Kill Switch: ब्रिटेन में स्मार्टफोन चोरी पर लगाम लगाने के लिए दो बड़ी टेलीकॉम कंपनियों ने 'किल स्विच' तकनीक पेश की है। यह तकनीक शोरूम से चुराए गए नए फोन को चालू होते ही निष्क्रिय कर देगी। इसका मकसद मोबाइल के काले बाजार को पूरी तरह खत्म करना है।
स्मार्टफोन किल स्वीच
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
ब्रिटेन की दो दिग्गज मोबाइल नेटवर्क कंपनियों, वर्जिन मीडिया ओ2 और वोडाफोन-थ्री ने एक बेहद अनोखी 'किल स्विच' तकनीक की शुरुआत की है। यह कदम तब उठाया गया है जब एपल और सैमसंग जैसी बड़ी स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों ने अपने स्मार्टफोन्स में 'यूनिवर्सल एंटी-थेफ्ट लॉक' देने से मना कर दिया। तब टेलीकॉम कंपनियों ने खुद स्मार्टफोन की सुरक्षा के लिए इस नई तकनीक को लाने की पहल की। इस नई तकनीक का मुख्य उद्देश्य रिटेल स्टोर से नए फोन चुराकर बेचने वाले गिरोहों पर नकेल कसना है।
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यह भी पढ़ें: फैक्ट्री रीसेट करने ने नहीं मिटता पूरा डेटा: 69% भारतीय पुराना स्मार्टफोन बेचने से कतरा रहे, डेटा लीक का है डर
इस डेटाबेस में फोन की पहचान होते ही दूर से एक ऐसा कमांड भेजा जाता है, जो उस हैंडसेट को पूरी तरह से काम करने लायक नहीं छोड़ता। यानी चोर के हाथ में वह फोन महज एक प्लास्टिक और कांच के टुकड़े जैसा रह जाता है। हालांकि, टेलीकॉम ऑपरेटर किसी कानूनी रूप से खरीदे गए फोन को इस तरह बंद नहीं कर सकते, क्योंकि बिकने के बाद वे उस डिवाइस के कानूनी मालिक नहीं रह जाते।
बढ़ रहे हैं स्मार्टफोन चोरी के आंकड़े
इन दिनों मोबाइल शोरूम में डकैती और चोरी की घटनाओं में भारी इजाफा देखने को मिला है। रिपोर्ट बताती है कि अकेले लंदन में पिछले साल 70 हजार से ज्यादा लोग मोबाइल चोरी का शिकार हुए हैं। ऐसे में इस ट्रैकिंग तकनीक को उतारने का फैसला लिया गया है ताकि चोरी किए गए उपकरणों की बिक्री के अवैध बाजार को जड़ से खत्म किया जा सके। आपको बता दें कि नीदरलैंड में भी मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर अपने स्टॉक को बचाने के लिए पहले ही ऐसे कदम उठा चुके हैं।
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कैसे काम करती है 'किल स्विच' तकनीक?
मामले से जुड़े जानकारों की मानें तो यह सुरक्षा प्रणाली बेहद सख्त नियमों के तहत काम करती है और इसका खास निशाना संगठित आपराधिक गिरोह हैं। यह बात ध्यान रखने वाली है कि यह तकनीक सिर्फ उन्हीं बिल्कुल नए स्मार्टफोन्स पर लागू होती है, जिन्हें अब तक ग्राहकों को बेचा नहीं गया है। जैसे ही कोई चोर दुकान से फोन चुराकर उसे पहली बार चालू करता है, फोन अपने आप डिवाइस निर्माता के एक विशेष डेटाबेस में दर्ज हो जाता है।यह भी पढ़ें: फैक्ट्री रीसेट करने ने नहीं मिटता पूरा डेटा: 69% भारतीय पुराना स्मार्टफोन बेचने से कतरा रहे, डेटा लीक का है डर
इस डेटाबेस में फोन की पहचान होते ही दूर से एक ऐसा कमांड भेजा जाता है, जो उस हैंडसेट को पूरी तरह से काम करने लायक नहीं छोड़ता। यानी चोर के हाथ में वह फोन महज एक प्लास्टिक और कांच के टुकड़े जैसा रह जाता है। हालांकि, टेलीकॉम ऑपरेटर किसी कानूनी रूप से खरीदे गए फोन को इस तरह बंद नहीं कर सकते, क्योंकि बिकने के बाद वे उस डिवाइस के कानूनी मालिक नहीं रह जाते।