{"_id":"6a6c8c09fd9c626fbf0e7ee6","slug":"meta-global-team-summons-india-government-algorithmic-bias-public-order-content-moderation-2026-07-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meta पर सरकार का सख्त रुख: एल्गोरिद्म और कंटेंट मॉडरेशन पर देना होगा जवाब, ग्लोबल टीम होगी तलब","category":{"title":"Tech Diary","title_hn":"टेक डायरी","slug":"tech-diary"}}
Meta पर सरकार का सख्त रुख: एल्गोरिद्म और कंटेंट मॉडरेशन पर देना होगा जवाब, ग्लोबल टीम होगी तलब
Fri, 31 Jul 2026 05:20 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Fri, 31 Jul 2026 05:20 PM IST
सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट पर अस्थायी रोक लगाने के मामले में अब मेटा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सरकार अगले सप्ताह कंपनी की वैश्विक टीम से एल्गोरिद्म, संभावित पक्षपात और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े सवालों पर विस्तृत जवाब मांगेगी।
विज्ञापन
पीएम वीडियो मामले में मेटा की ग्लोबल टीम होगी तलब
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट पर कुछ समय के लिए लगाए गए प्रतिबंध के मामले में अब सरकार मेटा से विस्तृत जवाब मांगने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, अगले सप्ताह के मध्य तक मेटा की वैश्विक टीम भारत आ सकती है, जहां उससे कंपनी के एल्गोरिद्म, संभावित एल्गोरिद्म बायस और सार्वजनिक व्यवस्था पर सोशल मीडिया के प्रभाव जैसे अहम मुद्दों पर सवाल पूछे जाएंगे। सरकार का मानना है कि केवल तकनीकी गड़बड़ी का हवाला देना पर्याप्त नहीं है। इसी वजह से अब मामले की गहराई से जांच की जाएगी।
कैसे काम करता है एल्गोरिद्म जानना चाहती है सरकार
सूत्रों के अनुसार, मेटा की वैश्विक टीम से साफ तौर पर पूछा जाएगा कि उसका एल्गोरिद्म किस आधार पर कंटेंट को सीमित या प्रमोट करता है। इसके अलावा यह भी जानना चाहती है कि कहीं एल्गोरिद्म में किसी तरह का पक्षपात तो नहीं है और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में कंपनी अपनी जिम्मेदारी किस तरह निभाती है। बताया जा रहा है कि मेटा के प्रतिनिधियों को संसदीय समिति के सामने भी पेश होना होगा।
PM मोदी की पोस्ट पर लगाई थी अस्थायी रोक
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाने वाली एक फेसबुक पोस्ट साझा की थी। इसी पोस्ट पर कुछ समय के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया था। मेटा ने बाद में इसे तकनीकी गड़बड़ी बताया और सार्वजनिक रूप से खेद भी जताया। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी की इस सफाई को पर्याप्त नहीं माना।
विज्ञापन
हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स के लिए लागू किया नया प्रोटोकॉल
विवाद के बाद मेटा ने सरकार को जानकारी दी कि उसने अपने प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री और अन्य प्रमुख हस्तियों के खातों के लिए नई निगरानी व्यवस्था लागू कर दी है। कंपनी के अनुसार, ऐसे खातों से प्रकाशित होने वाले कंटेंट पर अब वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कई स्तरों पर जांच की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
हैदराबाद में भी दर्ज हुआ मामला
इस पूरे विवाद के बीच हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने भी मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास और फेसबुक तथा इंस्टाग्राम के कुछ खातों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर प्रधानमंत्री को निशाना बनाकर कथित तौर पर मॉर्फ्ड और एआई से तैयार की गई भ्रामक सामग्री साझा की गई। पुलिस ने कंपनी से यह पूछा था कि उनके पास एआई से बने फर्जी विज्ञापनों, घोटालों और भ्रामक कंटेंट को पकड़ने और हटाने का क्या सिस्टम है। समन मिलने के बाद मेटा का एक प्रतिनिधि जांच अधिकारियों के सामने पेश भी हुआ था और उन्होंने अपनी कंपनी की कंटेंट मॉडरेशन नीतियों और नियमों के अनुपालन की जानकारी दी थी।
नियम तोड़ने पर तय होगी जवाबदेही
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यदि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर से नियमों और कानूनों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसकी जवाबदेही भी तय की जाएगी। सरकार का यह भी मानना है कि सोशल मीडिया का समाज पर व्यापक असर पड़ता है। कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों और वयस्कों, दोनों के मानसिक स्वास्थ्य और सोचने-समझने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे आवश्यक कदम उठाएगी और इस मामले को गंभीरता से देख रही है।
विज्ञापन
कैसे काम करता है एल्गोरिद्म जानना चाहती है सरकार
सूत्रों के अनुसार, मेटा की वैश्विक टीम से साफ तौर पर पूछा जाएगा कि उसका एल्गोरिद्म किस आधार पर कंटेंट को सीमित या प्रमोट करता है। इसके अलावा यह भी जानना चाहती है कि कहीं एल्गोरिद्म में किसी तरह का पक्षपात तो नहीं है और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में कंपनी अपनी जिम्मेदारी किस तरह निभाती है। बताया जा रहा है कि मेटा के प्रतिनिधियों को संसदीय समिति के सामने भी पेश होना होगा।
विज्ञापन
PM मोदी की पोस्ट पर लगाई थी अस्थायी रोक
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाने वाली एक फेसबुक पोस्ट साझा की थी। इसी पोस्ट पर कुछ समय के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया था। मेटा ने बाद में इसे तकनीकी गड़बड़ी बताया और सार्वजनिक रूप से खेद भी जताया। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी की इस सफाई को पर्याप्त नहीं माना।
विज्ञापन
हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स के लिए लागू किया नया प्रोटोकॉल
विवाद के बाद मेटा ने सरकार को जानकारी दी कि उसने अपने प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री और अन्य प्रमुख हस्तियों के खातों के लिए नई निगरानी व्यवस्था लागू कर दी है। कंपनी के अनुसार, ऐसे खातों से प्रकाशित होने वाले कंटेंट पर अब वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कई स्तरों पर जांच की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
हैदराबाद में भी दर्ज हुआ मामला
इस पूरे विवाद के बीच हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने भी मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास और फेसबुक तथा इंस्टाग्राम के कुछ खातों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर प्रधानमंत्री को निशाना बनाकर कथित तौर पर मॉर्फ्ड और एआई से तैयार की गई भ्रामक सामग्री साझा की गई। पुलिस ने कंपनी से यह पूछा था कि उनके पास एआई से बने फर्जी विज्ञापनों, घोटालों और भ्रामक कंटेंट को पकड़ने और हटाने का क्या सिस्टम है। समन मिलने के बाद मेटा का एक प्रतिनिधि जांच अधिकारियों के सामने पेश भी हुआ था और उन्होंने अपनी कंपनी की कंटेंट मॉडरेशन नीतियों और नियमों के अनुपालन की जानकारी दी थी।
नियम तोड़ने पर तय होगी जवाबदेही
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यदि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर से नियमों और कानूनों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसकी जवाबदेही भी तय की जाएगी। सरकार का यह भी मानना है कि सोशल मीडिया का समाज पर व्यापक असर पड़ता है। कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों और वयस्कों, दोनों के मानसिक स्वास्थ्य और सोचने-समझने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे आवश्यक कदम उठाएगी और इस मामले को गंभीरता से देख रही है।