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PwC: एआई के चक्कर में कंपनी ने कराई फजीहत, ChatGPT के भरोसे छापी रिपोर्ट्स, जांच में सामने आए कई फर्जी दावे
Fri, 31 Jul 2026 02:44 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Fri, 31 Jul 2026 02:44 PM IST
सार
PwC AI Controversy: एआई रणनीति पर कंपनियों को सलाह देने वाली PwC की कई रिसर्च रिपोर्ट सवालों के घेरे में आ गई हैं। जांच में इनमें एआई से तैयार कथित फर्जी रेफरेंस, गलत फुटनोट और ChatGPT से जुड़े लिंक मिलने का दावा किया गया है, जिससे रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर बहस तेज हो गई है। जानिए क्या है पूरा मामला...
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एआई से तैयार की गई रिपोर्ट में पाई गई कई गलतियां
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आज के दौर में दुनिया की दिग्गज कंसल्टिंग फर्में ग्लोबल कंपनियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सही और सुरक्षित इस्तेमाल सिखाने का दावा करती हैं। लेकिन क्या हो जब ये दिग्गज कंपनियां खुद ही एआई के जाल में बुरी तरह फंस जाएं? दुनिया की टॉप 'बिग फोर' अकाउंटिंग और कंसल्टिंग फर्मों में शुमार PwC इन दिनों कुछ ऐसी ही स्थिति का सामना कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
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रिपोर्ट में मिले काल्पनिक रिसर्च पेपर और फर्जी लिंक
GPTZero के दावे के मुताबिक पिछले दो वर्षों में प्रकाशित PwC मिडिल ईस्ट की चार रिपोर्टों की जांच की गई। ये रिपोर्ट्स एजेंटिक एआई, सरकारी सेवाओं, इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार और कॉर्पोरेट रणनीतियों जैसे विषयों पर आधारित थीं। जांच में सामने आया कि एक रिपोर्ट में रियाद की वायु गुणवत्ता पर जिस शोध का हवाला दिया गया, उसका संबंधित जर्नल या बताए गए लेखकों के नाम से कोई रिकॉर्ड ही नहीं मिला। इसके अलावा कई फुटनोट ऐसे वेब पेजों से जुड़े थे जो या तो खुल ही नहीं रहे थे या जिनमें रिपोर्ट में किए गए दावों का कोई उल्लेख नहीं था।
जेपी मॉर्गन की कहानी के लिए ब्लॉगर का सहारा
PwC ने क्या दी प्रतिक्रिया?
गलती सामने आने के बाद PwC ने संबंधित रिपोर्ट्स को अपनी वेबसाइट से हटा दिया। कंपनी का कहना है कि वह इस मामले की समीक्षा कर रही है और अपनी कंटेंट तैयार करने के प्रोसेस को और मजबूत बनाएगी ताकि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो।
एआई होता है हैलुसिनेशन का शिकार
यह भी पढ़ें: रूस के बाद ऑस्ट्रेलिया ने भी टेलीग्राम पर दिखाए सख्त तेवर, करोड़ों के जुर्माने की दी चेतावनी
केवल PwC नहीं, दूसरी कंपनियां भी फंस चुकी हैं
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क्या है पूरा मामला?
- दरअसल, एक ताजा जांच में खुलासा हुआ है कि PwC मिडिल ईस्ट इकाई ने कई अहम रिपोर्ट्स तैयार करने के लिए एआई का सहारा लिया, जिसके चलते उन रिपोर्ट्स में भारी गड़बड़ियां पाई गईं। आरोप है कि इन रिपोर्ट्स को तैयार करने में ChatGPT जैसे एआई टूल्स का अंधाधुंध इस्तेमाल किया गया और फर्जी फुटनोट्स, हवा-हवाई बातें और पूरी तरह से मनगढ़ंत साइटेशन्स पब्लिश कर दिए गए।
- एआई-डिटेक्शन प्लेटफॉर्म GPTZero ने एक पड़ताल कर इस पूरे मामले से पर्दा उठाया है। जांचकर्ताओं ने पिछले दो साल के भीतर पब्लिश की गई PwC मिडिल ईस्ट की चार 'थॉट लीडरशिप' रिपोर्ट्स को शक के घेरे में लिया। इन दस्तावेजों में एजेंटिक एआई बॉट्स के लिए कॉर्पोरेट रणनीति, सरकारी जनसेवा गाइडलाइंस और मिडिल ईस्ट में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के बाजार अनुमान जैसे गंभीर विषयों पर जानकारी दी गई थी। लेकिन जब इनके सोर्स खंगाले गए, तो सच्चाई हैरान करने वाली थी।
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रिपोर्ट में मिले काल्पनिक रिसर्च पेपर और फर्जी लिंक
GPTZero के दावे के मुताबिक पिछले दो वर्षों में प्रकाशित PwC मिडिल ईस्ट की चार रिपोर्टों की जांच की गई। ये रिपोर्ट्स एजेंटिक एआई, सरकारी सेवाओं, इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार और कॉर्पोरेट रणनीतियों जैसे विषयों पर आधारित थीं। जांच में सामने आया कि एक रिपोर्ट में रियाद की वायु गुणवत्ता पर जिस शोध का हवाला दिया गया, उसका संबंधित जर्नल या बताए गए लेखकों के नाम से कोई रिकॉर्ड ही नहीं मिला। इसके अलावा कई फुटनोट ऐसे वेब पेजों से जुड़े थे जो या तो खुल ही नहीं रहे थे या जिनमें रिपोर्ट में किए गए दावों का कोई उल्लेख नहीं था।
जेपी मॉर्गन की कहानी के लिए ब्लॉगर का सहारा
- एक अन्य मामले में PwC ने JPMorgan की एआई पहल को वास्तविक सफलता की कहानी बताने के लिए एक किशोर ब्लॉगर के लेख का हवाला दिया, जिसके केवल 280 फॉलोअर्स थे। जबकि जिस एआई पहल का जिक्र किया गया, वह ChatGPT आने से करीब पांच साल पहले यानी 2017 में शुरू हो चुकी थी।
- जांच में यह भी पाया गया कि सड़क दुर्घटनाओं से जुड़ा एक ही दावा रिपोर्ट के दो पन्नों पर तीन बार दोहराया गया था और हर बार उसके साथ अलग-अलग स्रोत दिए गए थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एक साइबर सुरक्षा रिपोर्ट के लिंक में "utm_source=chatgpt.com" ट्रैकिंग टैग मौजूद था, जिससे संकेत मिला कि संबंधित स्रोत ChatGPT के जरिए खोजा गया था।
- इस मामले पर PwC मिडिल ईस्ट ने बयान जारी कर कहा कि कंपनी अपनी प्रकाशित रिसर्च की सटीकता को गंभीरता से लेती है। कंपनी ने कहा कि जिन रिपोर्टों पर सवाल उठे हैं, उनमें सीमित संख्या में सपोर्टिंग रेफरेंस को अपडेट किया जा रहा है।
PwC ने क्या दी प्रतिक्रिया?
गलती सामने आने के बाद PwC ने संबंधित रिपोर्ट्स को अपनी वेबसाइट से हटा दिया। कंपनी का कहना है कि वह इस मामले की समीक्षा कर रही है और अपनी कंटेंट तैयार करने के प्रोसेस को और मजबूत बनाएगी ताकि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो।
एआई होता है हैलुसिनेशन का शिकार
- आजकल लोग रिसर्च, कंटेंट राइटिंग, पढ़ाई, मेडिकल जानकारी और वित्तीय सलाह तक के लिए एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन एक बड़ी समस्या अब भी बनी हुई है। एआई कई बार ऐसी जानकारी देता है जो सुनने में सही लगती है, लेकिन वास्तव में गलत होती है या उसका कोई आधार नहीं होता। एआई की दुनिया में इसे हैलुसिनेशन (Hallucination) कहा जाता है। कभी-कभी सवाल का सटीक जवाब उपलब्ध न होने पर एआई पूरे आत्मविश्वास के साथ उसस सवाल से मिलते-जुलते जवाब दे देता है जो सैद्धांतिक तौर पर सही नहीं होते।
- 2026 की स्टैनफोर्ड एचएआई एआई इंडेक्स के अनुसार, अलग-अलग एआई मॉडल्स में हैलुसिनेशन यानी गलत जानकारी देने की दर 22% से लेकर 94% तक पाई गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि जब कोई झूठी बात एआई के सामने पेश की जाती है, तो वह उसे मान लेता है। इसलिए एआई पर आंख मूंदकर भरोसा करना समझदारी नहीं है। हमें इसके जवाबों को परखने के तरीके सीखने ही होंगे।
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केवल PwC नहीं, दूसरी कंपनियां भी फंस चुकी हैं
- यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़ी कंसल्टिंग कंपनी की एआई आधारित रिपोर्ट विवादों में आई हो। GPTZero की पिछली जांच के बाद EY और KPMG को भी अपनी कई रिपोर्ट्स वापस लेनी पड़ी थीं। जून में KPMG ने एजेंटिक एआई पर अपनी वैश्विक रिपोर्ट हटाई थी, क्योंकि उसमें कई कंपनियों की उपलब्धियों और केस स्टडी को गलत बताया गया था। मई में EY कनाडा ने भी लॉयल्टी रिवॉर्ड प्रोग्राम पर अपनी रिपोर्ट वेबसाइट से हटा दी थी, जिसमें गलत रेफरेंस और अस्तित्वहीन शोध का हवाला मिला था।
- वहीं, नवंबर में Deloitte भी कनाडा सरकार के लिए तैयार स्वास्थ्य सेवा रिपोर्ट में एआई से जुड़े कई तथ्यात्मक गलतियों के कारण आलोचनाओं का सामना कर चुकी है। इन घटनाओं ने एआई आधारित कंटेंट तैयार करने की प्रक्रिया और उसकी मानवीय जांच की जरूरत को लेकर नई बहस छेड़ दी है।