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सुविधा या प्राइवेसी पर खतरा?: नए एआई एजेंट Muse की सुरक्षा पर सवाल, जानें कितना सुरक्षित है मेटा का यह नया टूल

Thu, 01 Oct 2026 05:35 PM IST
जागृति शुक्ला टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति शुक्ला Updated Thu, 01 Oct 2026 05:35 PM IST
सार

मेटा ने अपना नया एआई एजेंट म्यूज पेश किया है, जो यूजर्स की ओर से फ्लाइट बुकिंग, शाॅपिंग, कॉल करने और ईमेल भेजने जैसे कामों को खुद कर सकता है, लेकिन क्या इसकी सुविधा के साथ प्राइवेसी का जोखिम भी बढ़ सकता है? आइए जानते हैं इस लेख में...
 

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Meta Introduces Muse AI Agent Everyday Tasks:  Privacy Concerns, Market Positioning Explained
मेटा म्यूज के प्राइवेसी पर उठे सवाल - फोटो : एआई जनरेटेड

विस्तार

कल्पना कीजिए कि आपको फ्लाइट बुक करनी है, ऑनलाइन ग्रॉसरी मंगानी है, कस्टमर सर्विस से बात करनी है या कोई अपॉइंटमेंट लेना है और इन कामों के लिए आपको खुद कुछ करने की जरूरत न पड़े। बस अपना काम एआई एजेंट को बताइए और वह आपकी तरफ से उसे पूरा कर दे।
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मेटा इसी तरह के भविष्य की तैयारी कर रही है। कंपनी चाहती है कि यूजर्स रोजमर्रा के कामों के लिए उसके एआई एजेंट म्यूज का इस्तेमाल करें। मेटा के नए म्यूज ने हाल ही में एक कॉन्फ्रेंस में सीईओ मार्क जकरबर्ग की ओर से पेश किए जाने के बाद एप चार्ट में टॉप पर जगह बनाई।
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म्यूज को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे इस्तेमाल करने के लिए यूजर को किसी खास ट्रेनिंग की जरूरत न पड़े। यह यूजर की तरफ से ऑनलाइन ग्रॉसरी ऑर्डर कर सकता है, कस्टमर सर्विस को कॉल कर सकता है, ईमेल भेज सकता है, अपॉइंटमेंट बुक कर सकता है और यात्रा की योजना बना सकता है।
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लेकिन एआई एजेंट्स की बढ़ती क्षमताओं के साथ सुविधा के अलावा कुछ गंभीर सवाल भी सामने आ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि अगर लोग अपनी जिंदगी के ज्यादा से ज्यादा काम इन एजेंट्स को सौंपने लगें, तो उनकी प्राइवेसी और डेटा पर इसका क्या असर होगा?

एआई एजेंट क्या होते हैं?
सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आखिय ये होते क्या हैं? एआई एजेंट ऐसे सिस्टम हैं जो बड़े लैंग्वेज मॉडल और रीइन्फोर्समेंट लर्निंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करके यूजर के तय किए गए लक्ष्यों को पूरा करने की कोशिश करते हैं।
पारंपरिक चैटबॉट आम तौर पर सवालों के जवाब देते हैं, जबकि एआई एजेंट इससे आगे जाकर किसी काम को पूरा करने के लिए अलग-अलग चरणों में खुद कार्रवाई कर सकते हैं।
पिछले 12 महीनों में एआई एजेंट्स की क्षमता में काफी तेजी से विकास हुआ है। इनका इस्तेमाल डीआईवाई हॉबी प्रोजेक्ट्स से लेकर बेहतर पर्सनल असिस्टेंट एप्स तक में बढ़ा है। इसी दौरान कुछ रोग एजेंट्स यानी अनियंत्रित एआई एजेंट्स से जुड़े हाई-प्रोफाइल हैक और सिस्टम में सेंध की घटनाएं भी सामने आई हैं। ऐसे में मेटा का इस क्षेत्र में उतरना एआई एजेंट्स को आम लोगों तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

एआई की दौड़ में मेटा का बड़ा निवेश
मेटा तेजी से बदलती एआई की दुनिया में अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश कर रही है। कंपनी ने 2025 में स्केल एआई के एंटरप्रेन्योर एलेक्जेंडर वांग को अपनी टीम में लाने के लिए 14.3 अरब डॉलर खर्च किए और इसके बाद अपने इंटरनल एआई सिस्टम को पूरी तरह से नया रूप दिया।
कुल मिलाकर मेटा ने 2025 में एआई और दूसरे कैपिटल खर्चों पर 72 अरब डॉलर खर्च किए। कंपनी के 2026 में इस खर्च को दोगुना करने की उम्मीद है। हालांकि, इन बड़े निवेशों के बावजूद मेटा के एआई मॉडल अभी दुनिया में सबसे आगे नहीं हैं।

मेटा का एआई मॉडल तीसरे स्थान पर
अगर रैंकिंग की बात करें, तो लोकप्रियता के हिसाब से मेटा का लेटेस्ट एआई मॉडल म्यूज स्पार्क 1.2 एंथ्रोपिक और ओपनएआई के बेहतरीन क्लॉड और जीपीटी मॉडल्स के बाद तीसरे स्थान पर आता है। हालांकि, मेटा के लिए शायद यह सबसे बड़ी समस्या नहीं है।  एंथ्रोपिक और ओपनएआई मुख्य रूप से उन प्रोफेशनल्स और बिजनेस यूजर्स पर ध्यान दे रहे हैं, जो कोडिंग, रिसर्च और एनालिसिस जैसे कामों के लिए सबसे सक्षम मॉडल के लिए पैसे खर्च करने को तैयार हैं।
जैसे मान लीजिए, ओपनएआई का हाल ही में लॉन्च किया गया डॉट्स एजेंट ऐसे ग्राहकों को टारगेट करता है, जो बिजनेस से जुड़े कामों में एआई की मदद लेना चाहते हैं। मेटा भी प्रोफेशनल लेवल की पेड एआई सर्विस देने की योजना बना रही है, लेकिन कंपनी की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल यूजर बेस है।

मेटा को सबसे स्मार्ट नहीं, आसान एआई चाहिए
जून तिमाही में 3.6 अरब लोगों ने रोजाना फेसबुक, इंस्टाग्राम, मैसेंजर या व्हाट्सएप का इस्तेमाल किया। इन सभी यूजर्स को जरूरी नहीं कि दुनिया का सबसे स्मार्ट एआई मॉडल चाहिए। मेटा का फोकस ऐसे एआई पर है, जो इस्तेमाल में आसान हो और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके।
इसी वजह से म्यूज स्पार्क मॉडल का लक्ष्य सिर्फ सबसे ताकतवर मॉडल बनना नहीं है। इसे इतना सक्षम होना चाहिए कि वह म्यूज एआई एजेंट को आसानी से चला सके। मेटा म्यूज को सभी के लिए बना एआई एजेंट बताकर प्रमोट कर रही है। इसमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जिन्हें टेक्नोलॉजी का ज्यादा अनुभव नहीं है।

जल्द इंसानी अवतार में दिखेगा म्यूज 
मार्क जकरबर्ग ने बताया है कि यूजर्स जल्द ही अपने म्यूज एजेंट के लिए एक प्यारा, इंसानी रूप वाला अवतार बना सकेंगे। इसके साथ यूजर्स रियल-टाइम में वीडियो चैट भी कर सकेंगे। यानी एआई एजेंट सिर्फ टेक्स्ट या कमांड के जरिए काम करने वाला टूल नहीं रहेगा, बल्कि उसका एक ज्यादा पर्सनल और इंसानी इंटरफेस भी हो सकता है। जकरबर्ग ने फोन के बिना एजेंट से बात करने के लिए चाबी के छल्ले यानी कीचेन के आकार का एक डिवाइस भी पेश किया है।

स्क्रॉल करने से काम सौंपने तक
  • पिछले दो दशकों से मेटा का बिजनेस मॉडल लोगों की ऑनलाइन आदतों पर टिका रहा है। नोटिफिकेशन, लगातार चलने वाली फीड और दूसरों से मिलने वाली मंजूरी ने फेसबुक और इंस्टाग्राम को बार-बार चेक करने की आदत बना दी है। म्यूज इसी व्यवहार को एक नई दिशा देने की कोशिश है। अब सोशल मीडिया फीड स्क्रॉल करने के बजाय यूजर अपना कोई काम एआई एजेंट को सौंप सकता है।
  • म्यूज का डिजाइन भी इसी तरह तैयार किया गया है। यूजर्स अपने एजेंट को नाम दे सकते हैं और यह तय कर सकते हैं कि वह कैसा दिखेगा और किस तरह बात करेगा। हर सफल काम के बाद यूजर का भरोसा एजेंट पर बढ़ सकता है। सेटिंग्स के जरिए यूजर्स यह भी तय कर सकते हैं कि किसी काम को पूरा करने से पहले एजेंट को कितनी बार उनकी अनुमति लेनी होगी।

अभी सीमित है म्यूज की पहुंच
फिलहाल म्यूज की पहुंच सीमित है और यह सिर्फ अमेरिका में उपलब्ध है। इसमें कनेक्टर्स की मदद से एआई एजेंट को यूजर के ईमेल, कैलेंडर और कुछ कंज्यूमर सर्विस से जोड़ा जा सकता है। इनमें रेस्टोरेंट बुकिंग, म्यूजिक और शॉपिंग जैसी सेवाएं शामिल हैं। हालांकि, फिलहाल म्यूज यूजर के बैंक, मेडिकल या टैक्स अकाउंट में लॉग-इन नहीं कर सकता।
मेटा की योजना समय के साथ और कनेक्टर्स जोड़ने और इस प्रोडक्ट को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लाने की है।

ज्यादा काम एआई को सौंपने पर बढ़ेगा जोखिम?
जैसे-जैसे लोग एआई एजेंट का इस्तेमाल करने के आदी होंगे, वे उसे ज्यादा काम सौंप सकते हैं और उसके साथ ज्यादा समय बिता सकते हैं। जिस तरह सोशल मीडिया धीरे-धीरे सिर्फ सोशल नेटवर्किंग से आगे बढ़कर खाली समय बिताने और मूड बदलने का आम जरिया बन गया, उसी तरह एआई एजेंट भी भविष्य में उन डिजिटल इंटरफेस को मैनेज कर सकते हैं, जिन पर आज की रोजमर्रा की जिंदगी निर्भर है। यहीं से प्राइवेसी को लेकर बड़ा सवाल भी खड़ा होता है।
अगर एआई एजेंट ऑनलाइन दुनिया के साथ यूजर का मुख्य इंटरफेस बन जाता है, तो वह यूजर की पसंद, आदतों और रोजमर्रा के कामों के बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की तुलना में कहीं ज्यादा जानकारी जुटा सकता है। इससे यह चिंता भी पैदा होती है कि एजेंट के जरिए जमा हुई इतनी बड़ी मात्रा में जानकारी का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा और क्या इसे बाद में विज्ञापनदाताओं के लिए इस्तेमाल या बेचा जा सकता है।

मेटा का कहना है कि प्राइवेसी का ध्यान रखा गया है
मेटा का कहना है कि म्यूज में प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए सिस्टम तैयार किया गया है। कंपनी के अनुसार, हर म्यूज एजेंट अपनी अलग वर्चुअल मशीन पर चलता है, जिसे म्यूज सिक्योर VM कहा जाता है। इसमें एजेंट और यूजर दोनों का डेटा मौजूद होता है।
मार्क जकरबर्ग ने एक वैकल्पिक हाई-सिक्योरिटी स्टैंडर्ड का भी वादा किया है। इसके तहत मेटा भी यूजर के एजेंट में मौजूद चीजों तक पहुंच नहीं बना सकेगी। हालांकि, मेटा के पिछले प्राइवेसी रिकॉर्ड को देखते हुए इस दावे पर सवाल भी उठाए जा सकते हैं।

मेटा के पुराने प्राइवेसी विवाद क्यों उठाते हैं सवाल?
2018 में कैम्ब्रिज एनालिटिका विवाद सामने आया था। इसमें पता चला था कि एक कंसल्टिंग फर्म ने राजनीतिक प्रोफाइलिंग के लिए 8.7 करोड़ Facebook यूजर्स का डेटा इकट्ठा किया था।
इसके बाद 2019 में अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमिशन ने प्राइवेसी से जुड़ी विफलताओं के मामले में मेटा पर पांच अरब डॉलर का जुर्माना लगाया था। मेटा पर यह आरोप भी लगाया गया है कि उसके प्रोडक्ट्स को इस तरह डिजाइन किया गया कि बच्चों समेत लोग उनका इस्तेमाल ज्यादा समय तक करते रहें।
इस साल की शुरुआत में कंपनी ने 29 अमेरिकी राज्यों के अटॉर्नी जनरल की ओर से दायर मुकदमे को निपटाने के लिए, किसी गलत काम को स्वीकार किए बिना, करीब 18 अरब डॉलर का भुगतान किया था। इन मुकदमों में आरोप लगाया गया था कि इंस्टाग्राम और फेसबुक को किशोरों को प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने के लिए डिजाइन किया गया।

म्यूज को लेकर शुरुआती चिंताएं
म्यूज फिलहाल 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों तक सीमित है। लेकिन इसके साथ एक अलग तरह की चिंता जुड़ी है। एक ऐसा एआई एजेंट जिसका नाम और चेहरा हो और जिससे लोग पूरे दिन सलाह लेते रहें, वह लोगों में किसी भी सामान्य डिजिटल सेवा से ज्यादा मजबूत आदत बना सकता है।
म्यूज को लेकर शुरुआती स्तर पर कुछ चिंताएं सामने भी आने लगी हैं। जो यूजर्स नहीं चाहते कि उनके इंटरैक्शन का इस्तेमाल मेटा के एआई मॉडल को ट्रेन करने के लिए किया जाए, उन्हें डेटा कंट्रोल की सेटिंग खोजकर इसे खुद बंद करना होगा।

एआई एजेंट्स के लिए नियम अभी साफ नहीं
एआई एजेंट्स तेजी से ज्यादा काम करने में सक्षम हो रहे हैं, लेकिन इनके डिजाइन और संचालन को नियंत्रित करने वाले नियम और रेगुलेशन अभी बहुत स्पष्ट नहीं हैं।
ऐसे नियम बनने में समय लग सकता है। लेकिन अगर उससे पहले अरबों लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी चलाने के लिए किसी एक कंपनी के एआई एजेंट पर निर्भर होने लगते हैं, तो यह सवाल और बड़ा हो जाएगा कि इन एजेंट्स के व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए किस तरह के नियम जरूरी होंगे।

मेटा म्यूज को सिर्फ एक नया एआई टूल नहीं, बल्कि लोगों और इंटरनेट के बीच एक नए इंटरफेस के तौर पर आगे बढ़ा रही है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि सुविधा और ऑटोमेशन के साथ यूजर्स के डेटा, प्राइवेसी और भरोसे को किस तरह सुरक्षित रखा जाता है।
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