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म्यूज वॉइस ट्रांसक्राइब: बोलकर टाइप करें आपनी बात, मेटा लाया कमाल का एआई टूल, 5 भारतीय भाषाओं को करेगा सपोर्ट
Thu, 03 Sep 2026 03:14 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Thu, 03 Sep 2026 03:14 PM IST
सार
मेटा ने रियल-टाइम ऑडियो ट्रांसक्रिप्शन के लिए 'म्यूज वॉइस ट्रांसक्राइब' नाम का एक नया एआई मॉडल लॉन्च किया है, जो बोलते ही आपकी आवाज को तुरंत टेक्स्ट में बदल देगा। यह हिंदी समेत पांच भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है। आइए जानते हैं इस टूल की क्या खासियत है और यह किन लोगों के काम आ सकता है।
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मेटा (सांकेतिक)
- फोटो : मेटा
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विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में हर दिन नए चमत्कार हो रहे हैं। अब वॉयस ट्रांसक्रिप्शन पहले से कहीं ज्यादा तेज और सटीक हो गया है। दिग्गज टेक कंपनी मेटा (Meta) ने 1 सितंबर को अपना नया स्पीच-टू-टेक्स्ट मॉडल पेश किया है। इसे 'म्यूज वॉइस ट्रांसक्राइब' नाम दिया गया है। यह मेटा सुपरइंटेलिजेंस लैब्स द्वारा जारी किया गया पहला रियल-टाइम ऑडियो मॉडल है, जो बातचीत के दौरान ही उसे तुरंत टेक्स्ट में बदलने की जबरदस्त क्षमता रखता है।
पांच प्रमुख भारतीय भाषाओं का शानदार सपोर्ट
20 से ज्यादा लोगों की आवाज को अलग-अलग पहचानने की क्षमता
रफ्तार और सटीकता का बेहतरीन तालमेल
यह एआई मॉडल स्पीड और सटीकता के बीच एक शानदार संतुलन बनाता है। आसान शब्दों को सुनते ही यह तुरंत टाइप कर देता है, जबकि कठिन शब्दों को पहचानने के लिए यह थोड़ा अधिक समय लेता है। 1 सितंबर 2026 तक, यह टूल 'आर्टिफिशियल एनालिसिस स्ट्रीमिंग स्पीच-टू-टेक्स्ट लीडरबोर्ड' पर पहले स्थान पर काबिज था।
कैसे करें इस्तेमाल और कितनी है कीमत?
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पांच प्रमुख भारतीय भाषाओं का शानदार सपोर्ट
- मेटा के अनुसार, यह नया मॉडल 70 से अधिक भाषाओं को सपोर्ट करता है। भारतीयों के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ जैसी पांच प्रमुख भारतीय भाषाओं को शामिल किया गया है। भारत में लोग अक्सर बातचीत के दौरान अंग्रेजी और अपनी क्षेत्रीय भाषा का इस्तेमाल एक साथ करते हैं, जिसे 'कोड-स्विचिंग' (Code-switching) कहा जाता है।
- इस नए एआई मॉडल को इसी बात को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यानी, अगर आप बात करते समय अचानक अंग्रेजी से हिंदी में आ जाते हैं, तो भी यह टूल बिना किसी रुकावट या अतिरिक्त प्रोसेसिंग के आपकी बात समझकर उसे बिल्कुल सही टाइप कर देगा।
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20 से ज्यादा लोगों की आवाज को अलग-अलग पहचानने की क्षमता
- म्यूज वॉइस ट्रांसक्राइब की एक और बड़ी खूबी इसकी स्ट्रीमिंग ट्रांसक्रिप्शन क्षमता है। इसका सीधा मतलब है कि आपको पूरी रिकॉर्डिंग खत्म होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि जैसे-जैसे आप बोलते जाएंगे, वैसे-वैसे टेक्स्ट आपकी स्क्रीन पर छपता जाएगा। मेटा का दावा है कि अगर किसी ऑडियो रिकॉर्डिंग में 20 से ज्यादा लोग भी बात कर रहे हैं, तो यह टूल सबकी आवाजों को अलग-अलग पहचान सकता है।
- इसके अलावा, यह एक घंटे से अधिक लंबी रिकॉर्डिंग को भी आसानी से ट्रांसक्राइब कर सकता है। सबसे खास बात यह है कि इसके लिए किसी अलग पोस्ट-प्रोसेसिंग स्टेप की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि एक ही सिंगल मॉडल यह सारे काम आसानी से निपटा देता है।
रफ्तार और सटीकता का बेहतरीन तालमेल
यह एआई मॉडल स्पीड और सटीकता के बीच एक शानदार संतुलन बनाता है। आसान शब्दों को सुनते ही यह तुरंत टाइप कर देता है, जबकि कठिन शब्दों को पहचानने के लिए यह थोड़ा अधिक समय लेता है। 1 सितंबर 2026 तक, यह टूल 'आर्टिफिशियल एनालिसिस स्ट्रीमिंग स्पीच-टू-टेक्स्ट लीडरबोर्ड' पर पहले स्थान पर काबिज था।
कैसे करें इस्तेमाल और कितनी है कीमत?
- उपलब्धता की बात करें तो, म्यूज वॉइस ट्रांसक्राइब अब मेटा के मॉडल API के जरिए उपलब्ध हो गया है। वर्तमान में इसका इस्तेमाल Mac के लिए Meta AI और Muse Code में डिक्टेशन के लिए किया जा रहा है। कंपनी ने एपीआई की कीमत 3 डॉलर प्रति 1,000 ऑडियो मिनट तय की है, जो लगभग 0.18 डॉलर प्रति घंटे के बराबर बैठती है।
- ऐसे समय में जब वॉयस असिस्टेंट, कोडिंग और ट्रांसक्रिप्शन जैसे कामों के लिए स्पीच-बेस्ड एआई सिस्टम की मांग तेजी से बढ़ रही है, मेटा का यह नया कदम काफी अहम माना जा रहा है। भारतीय बाजार जैसे बहुभाषी क्षेत्रों में यह टूल लोगों के संवाद करने के तरीके को पूरी तरह से बदल सकता है।