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मेटा का एआई ट्रेनिंग से जुड़ी विवादित शर्त पर यू-टर्न: वेबसाइट्स के कंटेंट को लेकर दी सफाई, क्या है मामला?
Sun, 18 Oct 2026 02:51 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Sun, 18 Oct 2026 02:51 PM IST
सार
Meta AI Web Scrapping Controversy: काफी विवादों के बाद मेटा ने अपनी व्यावसायिक शर्तों से एआई ट्रेनिंग के लिए वेबसाइट्स का कंटेंट इस्तेमाल करने से जुड़ा विवादित प्रावधान हटा दिया है। कानूनी विशेषज्ञों ने आशंका जताई थी कि इसकी भाषा कंपनी को न्यूज वेबसाइट्स का कंटेंट बिना भुगतान के इस्तेमाल करने की छूट दे सकती है। जानिए क्या था पूरा विवाद और कंपनी ने क्या सफाई दी।
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मेटा ने विवाद बढ़ने के बाद नियमों में किया बदलाव।
- फोटो : ANI
विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रेस में आगे निकलने की होड़ के बीच दिग्गज टेक कंपनी मेटा (Meta) को एक बड़ा कदम पीछे खींचना पड़ा है। अपने एआई मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए न्यूज वेबसाइट्स और बिजनेस पेजों का कंटेंट मुफ्त में इस्तेमाल करने के फैसले पर कंपनी ने आखिरकार यू-टर्न ले लिया है। भारी आलोचनाओं और पब्लिशर्स के दबाव के बाद, मेटा ने शनिवार, 17 अक्टूबर को अपने कमर्शियल टर्म्स से विवादित प्रावधान को हटा दिया है। हालांकि, मेटा का कहना है कि शर्तों में किए गए बदलाव का मतलब वेब क्रॉलिंग के तरीके में बदलाव नहीं है और कंपनी ने वेबसाइट्स के कंटेंट इस्तेमाल करने के अधिकार नहीं बढ़ाए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा ने शनिवार, 17 अक्टूबर को अपनी व्यावसायिक शर्तों से उस प्रावधान को हटा दिया, जिसकी भाषा को लेकर सवाल उठ रहे थे। यह शर्त कंपनी के कमर्शियल टर्म्स पेज पर जोड़ी गई थी। इसमें कहा गया था कि मेटा कुछ डोमेन, वेब पेज या यूआरएल से मिले कंटेंट का इस्तेमाल अपने प्रोडक्ट्स, सेवाओं और फीचर्स को विकसित करने, बेहतर बनाने, रिसर्च करने और एआई ट्रेनिंग के लिए कर सकती है।
वेब स्क्रैपिंग को लेकर क्या है विवाद?
दुनिया भर की लगभग हर छोटी-बड़ी न्यूज वेबसाइट, मीडिया हाउस और पब्लिशर का फेसबुक और इंस्टाग्राम पर बिजनेस अकाउंट है। वे अपनी खबरें और आर्टिकल्स वहां शेयर करते हैं ताकि पाठकों तक पहुंच सकें। मेटा के इस नए नियम का सीधा मतलब यह था कि मेटा इन न्यूज वेबसाइट्स का सारा ओरिजिनल कंटेंट बिना कोई पैसा या रॉयल्टी दिए अपने एआई को सिखाने (ट्रेन करने) के लिए इस्तेमाल करेगा।
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मेटा के नए नियमों से यह चिंता भी थी कि अगर मेटा का एआई सारी खबरें पढ़कर यूजर्स को फेसबुक या इंस्टाग्राम पर ही सीधे सवालों के जवाब देने लगे, तो कोई भी यूजर असली न्यूज वेबसाइट पर क्लिक नहीं करेगा। इससे पब्लिशर्स के ट्रैफिक और विज्ञापन से होने वाली कमाई पर भारी असर पड़ेगा। यह मामला खास तौर पर न्यूज पब्लिशर्स के लिए अहम था, क्योंकि उनकी वेबसाइट्स पर मौजूद खबरें, इंटरव्यू और विश्लेषण एआई मॉडल को ट्रेन करने के लिए किया जा सकता था।
एक्सपर्ट्स ने क्यों जताई थी चिंता?
नीमन लैब और कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में डिजिटल व सूचना कानून के प्रोफेसर जेम्स ग्रिमेलमैन समेत कई विशेषज्ञों ने इस प्रावधान पर सवाल उठाए थे। उनकी चिंता थी कि इसकी व्यापक व्याख्या से मेटा वेबसाइट्स का कंटेंट बिना भुगतान के एआई ट्रेनिंग में इस्तेमाल कर सकती है।
एक और अहम मुद्दा वेबसाइट्स की robots.txt फाइल से जुड़ा था। वेबसाइट मालिक इस फाइल के जरिए ऑटोमेटेड बॉट्स और वेब क्रॉलर्स को अपनी साइट का डेटा चुराने से रोकते हैं। विशेषज्ञों ने आशंका जताई थी कि मेटा का यह नया नियम इतना चालाकी से लिखा गया था कि यह वेबसाइट्स की उस सिक्योरिटी को भी दरकिनार कर सकता था।
भारी विरोध के बाद मेटा ने दी सफाई
जैसे ही यह बात सामने आई, टेक जगत, मीडिया संस्थानों और डिजिटल पब्लिशर्स में हड़कंप मच गया। मेटा पर आरोप लगने लगे कि वह अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रहा है और पत्रकारों की मेहनत पर डाका डाल रहा है। यह सवाल उठा कि क्या टेक कंपनियां बिना इजाजत और बिना पैसे दिए किसी का भी डेटा इस्तेमाल कर सकती हैं?
चारों तरफ से हो रही फजीहत और भारी विरोध के बाद, 17 अक्टूबर को मेटा को बैकफुट पर आना पड़ा। कंपनी ने अपनी वेबसाइट से उस विवादित नियम को तुरंत हटा दिया।
नियम हटाने के बाद मेटा के प्रवक्ता ने सफाई पेश करते हुए कहा कि उनके नए नियमों का गलत मतलब निकाला गया। वे नियम केवल हमारे विज्ञापन और बिजनेस टूल्स को बेहतर बनाने के लिए थे, न कि न्यूज वेबसाइट्स का डेटा चुराने के लिए। प्रवक्ता के मुताबिक, वेब क्रॉलिंग के पुराने तरीके में कोई बदलाव नहीं किया गया है और आज भी वे पब्लिशर्स की प्राइवेसी का पूरा सम्मान करते हैं।
मेटा के कम्युनिकेशन वाइस प्रेसिडेंट एंडी स्टोन ने भी कहा कि कंपनी के वेब क्रॉलर्स के इस्तेमाल के तरीके में कोई बदलाव नहीं हुआ है और इसके उलट किए जा रहे दावे गलत हैं।
एआई ट्रेनिंग के लिए डेटा इस्तेमाल पर पहले भी विवाद
AI कंपनियां अपने मॉडल को बेहतर बनाने के लिए इंटरनेट पर उपलब्ध बड़ी मात्रा में डेटा का इस्तेमाल करती हैं। लेकिन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि उसे बिना किसी शर्त के इस्तेमाल किया जा सकता है। कॉपीराइट, निजता और डेटा के इस्तेमाल की अनुमति जैसे मुद्दे इस बहस को और जटिल बनाते हैं।
उदाहरण के लिए, एलन मस्क की कंपनी एक्सएआई अपने ग्रोक चैटबॉट को ट्रेन करने के लिए एक्स पर सार्वजनिक पोस्ट का इस्तेमाल करती है। मेटा भी 18 साल से अधिक उम्र के यूजर्स की सार्वजनिक रूप से साझा की गई सामग्री का AI ट्रेनिंग में इस्तेमाल करती है। इन तरीकों को लेकर डेटा और सहमति से जुड़े सवाल उठते रहे हैं।
पिछले साल मेटा ने कॉपीराइट उल्लंघन के आरोपों से जुड़े एक बड़े मुकदमे में जीत हासिल की थी। हालांकि, एआई कंपनियों के खिलाफ इसी तरह के दूसरे मामले अब भी चल रहे हैं। ऐसे विवादों में हर मामले के तथ्य और कानूनी स्थिति अलग हो सकती है।
WeTransfer भी बदल चुका है अपनी शर्तें
एआई ट्रेनिंग के लिए यूजर कंटेंट के इस्तेमाल पर विवाद सिर्फ मेटा तक सीमित नहीं है। जुलाई 2025 में फाइल शेयरिंग सेवा वीट्रांसफर ने भी अपनी सेवा शर्तों में बदलाव किया था। उस समय कंपनी की शर्तों में ऐसा संकेत मिला था कि यूजर्स की अपलोड की गई फाइलों का इस्तेमाल मशीन लर्निंग मॉडल को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है। इस पर लोगों ने आपत्ति जताई। इसके बाद वीट्रांसफर ने अपनी शर्तों से मशीन लर्निंग और एआई का उल्लेख हटा दिया।
मेटा के मामले ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि टेक कंपनियां एआई मॉडल को बेहतर बनाने के लिए इंटरनेट पर मौजूद कंटेंट का इस्तेमाल किस हद तक कर सकती हैं। वेबसाइट मालिकों और न्यूज पब्लिशर्स के लिए यह जानना जरूरी है कि उनका कंटेंट कैसे इस्तेमाल हो रहा है, वे उस पर क्या नियंत्रण रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर अपनी शर्तें कैसे लागू कर सकते हैं।
फिलहाल मेटा ने विवादित प्रावधान हटा दिया है और कहा है कि उसकी वेब क्रॉलिंग प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं हुआ। लेकिन एआई ट्रेनिंग, कॉपीराइट और कंटेंट के इस्तेमाल को लेकर टेक कंपनियों और कंटेंट बनाने वालों के बीच बहस जारी रह सकती है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा ने शनिवार, 17 अक्टूबर को अपनी व्यावसायिक शर्तों से उस प्रावधान को हटा दिया, जिसकी भाषा को लेकर सवाल उठ रहे थे। यह शर्त कंपनी के कमर्शियल टर्म्स पेज पर जोड़ी गई थी। इसमें कहा गया था कि मेटा कुछ डोमेन, वेब पेज या यूआरएल से मिले कंटेंट का इस्तेमाल अपने प्रोडक्ट्स, सेवाओं और फीचर्स को विकसित करने, बेहतर बनाने, रिसर्च करने और एआई ट्रेनिंग के लिए कर सकती है।
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वेब स्क्रैपिंग को लेकर क्या है विवाद?
दुनिया भर की लगभग हर छोटी-बड़ी न्यूज वेबसाइट, मीडिया हाउस और पब्लिशर का फेसबुक और इंस्टाग्राम पर बिजनेस अकाउंट है। वे अपनी खबरें और आर्टिकल्स वहां शेयर करते हैं ताकि पाठकों तक पहुंच सकें। मेटा के इस नए नियम का सीधा मतलब यह था कि मेटा इन न्यूज वेबसाइट्स का सारा ओरिजिनल कंटेंट बिना कोई पैसा या रॉयल्टी दिए अपने एआई को सिखाने (ट्रेन करने) के लिए इस्तेमाल करेगा।
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मेटा के नए नियमों से यह चिंता भी थी कि अगर मेटा का एआई सारी खबरें पढ़कर यूजर्स को फेसबुक या इंस्टाग्राम पर ही सीधे सवालों के जवाब देने लगे, तो कोई भी यूजर असली न्यूज वेबसाइट पर क्लिक नहीं करेगा। इससे पब्लिशर्स के ट्रैफिक और विज्ञापन से होने वाली कमाई पर भारी असर पड़ेगा। यह मामला खास तौर पर न्यूज पब्लिशर्स के लिए अहम था, क्योंकि उनकी वेबसाइट्स पर मौजूद खबरें, इंटरव्यू और विश्लेषण एआई मॉडल को ट्रेन करने के लिए किया जा सकता था।
एक्सपर्ट्स ने क्यों जताई थी चिंता?
नीमन लैब और कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में डिजिटल व सूचना कानून के प्रोफेसर जेम्स ग्रिमेलमैन समेत कई विशेषज्ञों ने इस प्रावधान पर सवाल उठाए थे। उनकी चिंता थी कि इसकी व्यापक व्याख्या से मेटा वेबसाइट्स का कंटेंट बिना भुगतान के एआई ट्रेनिंग में इस्तेमाल कर सकती है।
एक और अहम मुद्दा वेबसाइट्स की robots.txt फाइल से जुड़ा था। वेबसाइट मालिक इस फाइल के जरिए ऑटोमेटेड बॉट्स और वेब क्रॉलर्स को अपनी साइट का डेटा चुराने से रोकते हैं। विशेषज्ञों ने आशंका जताई थी कि मेटा का यह नया नियम इतना चालाकी से लिखा गया था कि यह वेबसाइट्स की उस सिक्योरिटी को भी दरकिनार कर सकता था।
भारी विरोध के बाद मेटा ने दी सफाई
जैसे ही यह बात सामने आई, टेक जगत, मीडिया संस्थानों और डिजिटल पब्लिशर्स में हड़कंप मच गया। मेटा पर आरोप लगने लगे कि वह अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रहा है और पत्रकारों की मेहनत पर डाका डाल रहा है। यह सवाल उठा कि क्या टेक कंपनियां बिना इजाजत और बिना पैसे दिए किसी का भी डेटा इस्तेमाल कर सकती हैं?
चारों तरफ से हो रही फजीहत और भारी विरोध के बाद, 17 अक्टूबर को मेटा को बैकफुट पर आना पड़ा। कंपनी ने अपनी वेबसाइट से उस विवादित नियम को तुरंत हटा दिया।
नियम हटाने के बाद मेटा के प्रवक्ता ने सफाई पेश करते हुए कहा कि उनके नए नियमों का गलत मतलब निकाला गया। वे नियम केवल हमारे विज्ञापन और बिजनेस टूल्स को बेहतर बनाने के लिए थे, न कि न्यूज वेबसाइट्स का डेटा चुराने के लिए। प्रवक्ता के मुताबिक, वेब क्रॉलिंग के पुराने तरीके में कोई बदलाव नहीं किया गया है और आज भी वे पब्लिशर्स की प्राइवेसी का पूरा सम्मान करते हैं।
मेटा के कम्युनिकेशन वाइस प्रेसिडेंट एंडी स्टोन ने भी कहा कि कंपनी के वेब क्रॉलर्स के इस्तेमाल के तरीके में कोई बदलाव नहीं हुआ है और इसके उलट किए जा रहे दावे गलत हैं।
एआई ट्रेनिंग के लिए डेटा इस्तेमाल पर पहले भी विवाद
AI कंपनियां अपने मॉडल को बेहतर बनाने के लिए इंटरनेट पर उपलब्ध बड़ी मात्रा में डेटा का इस्तेमाल करती हैं। लेकिन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि उसे बिना किसी शर्त के इस्तेमाल किया जा सकता है। कॉपीराइट, निजता और डेटा के इस्तेमाल की अनुमति जैसे मुद्दे इस बहस को और जटिल बनाते हैं।
उदाहरण के लिए, एलन मस्क की कंपनी एक्सएआई अपने ग्रोक चैटबॉट को ट्रेन करने के लिए एक्स पर सार्वजनिक पोस्ट का इस्तेमाल करती है। मेटा भी 18 साल से अधिक उम्र के यूजर्स की सार्वजनिक रूप से साझा की गई सामग्री का AI ट्रेनिंग में इस्तेमाल करती है। इन तरीकों को लेकर डेटा और सहमति से जुड़े सवाल उठते रहे हैं।
पिछले साल मेटा ने कॉपीराइट उल्लंघन के आरोपों से जुड़े एक बड़े मुकदमे में जीत हासिल की थी। हालांकि, एआई कंपनियों के खिलाफ इसी तरह के दूसरे मामले अब भी चल रहे हैं। ऐसे विवादों में हर मामले के तथ्य और कानूनी स्थिति अलग हो सकती है।
WeTransfer भी बदल चुका है अपनी शर्तें
एआई ट्रेनिंग के लिए यूजर कंटेंट के इस्तेमाल पर विवाद सिर्फ मेटा तक सीमित नहीं है। जुलाई 2025 में फाइल शेयरिंग सेवा वीट्रांसफर ने भी अपनी सेवा शर्तों में बदलाव किया था। उस समय कंपनी की शर्तों में ऐसा संकेत मिला था कि यूजर्स की अपलोड की गई फाइलों का इस्तेमाल मशीन लर्निंग मॉडल को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है। इस पर लोगों ने आपत्ति जताई। इसके बाद वीट्रांसफर ने अपनी शर्तों से मशीन लर्निंग और एआई का उल्लेख हटा दिया।
मेटा के मामले ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि टेक कंपनियां एआई मॉडल को बेहतर बनाने के लिए इंटरनेट पर मौजूद कंटेंट का इस्तेमाल किस हद तक कर सकती हैं। वेबसाइट मालिकों और न्यूज पब्लिशर्स के लिए यह जानना जरूरी है कि उनका कंटेंट कैसे इस्तेमाल हो रहा है, वे उस पर क्या नियंत्रण रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर अपनी शर्तें कैसे लागू कर सकते हैं।
फिलहाल मेटा ने विवादित प्रावधान हटा दिया है और कहा है कि उसकी वेब क्रॉलिंग प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं हुआ। लेकिन एआई ट्रेनिंग, कॉपीराइट और कंटेंट के इस्तेमाल को लेकर टेक कंपनियों और कंटेंट बनाने वालों के बीच बहस जारी रह सकती है।