NASA का बड़ा यू-टर्न: Artemis 3 मिशन का पूरा प्लान बदला; नई टीम में एक भी महिला नहीं, छिड़ा विवाद
NASA Artemis III: नासा (NASA) के आर्टेमिस 3 मिशन के प्लान में बड़ा बदलाव हुआ है। अब यह मिशन सीधे चांद पर उतरने के बजाय पृथ्वी की कक्षा में लूनर लैंडर और हीट शील्ड जैसी जरूरी तकनीकों की टेस्टिंग करेगा। हाल ही में नासा ने इस मिशन के लिए चार अंतरिक्ष यात्रियों के नामों का एलान भी किया है, लेकिन इस टीम में किसी महिला को शामिल न करने पर भारी विवाद खड़ा हो गया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नासा (NASA) ने अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस (Artemis) कार्यक्रम के तहत आर्टेमिस 3 मिशन के क्रू की घोषणा कर दी है। इस मिशन के लिए नासा के आंद्रे डगलस, रैंडी ब्रेसनिक और फ्रैंक रुबियो के साथ यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के लुका परमितानो को चुना गया है। हालांकि, मिशन के उद्देश्यों में बदलाव और पूरी तरह पुरुषों वाली टीम के चयन को लेकर सोशल मीडिया पर बहस भी शुरू हो गई है।
अब चांद पर नहीं उतरेगा आर्टेमिस 3
जब आर्टेमिस कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी, तब आर्टेमिस 3 को इंसानों को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारने वाले मिशन के रूप में पेश किया गया था। लेकिन 2026 में नासा ने मिशन की योजना में बदलाव करते हुए आर्टेमिस 2 और चंद्रमा पर लैंडिंग मिशन के बीच एक अतिरिक्त मिशन जोड़ दिया।
अब आर्टेमिस 3 का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी की कक्षा में उन तकनीकों और सिस्टम्स का परीक्षण करना होगा, जिनका इस्तेमाल भविष्य में चंद्रमा पर उतरने के दौरान किया जाएगा। फिलहाल चंद्रमा पर लैंडिंग का लक्ष्य आर्टेमिस 4 मिशन को सौंपा गया है, जिसकी योजना 2028 के लिए बनाई गई है।
मिशन में देरी क्यों हुई?
आर्टेमिस कार्यक्रम को पिछले कुछ वर्षों में कई तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। आर्टेमिस 1 मिशन के दौरान ओरियन कैप्सूल के हीट शील्ड में अपेक्षा से अधिक नुकसान देखा गया था।
हीट शील्ड किसी भी अंतरिक्ष यान का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जो पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश के समय उत्पन्न होने वाली अत्यधिक गर्मी से अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा करता है।
NASA का मानना है कि चंद्रमा पर इंसानों को दोबारा भेजने से पहले सभी तकनीकों की अतिरिक्त जांच और परीक्षण जरूरी है। यही वजह है कि आर्टेमिस 3 को अब एक टेस्ट मिशन के रूप में तैयार किया जा रहा है।
मिशन के प्लान में बदलाव क्यों?
पहले आर्टेमिस 3 का लक्ष्य चांद के दक्षिणी ध्रुव पर इंसान को उतारना था। लेकिन इससे पहले वाले मिशन की लॉन्चिंग में हो रही देरी और सुरक्षा चिंताओं के कारण नासा ने अपना प्लान बदल दिया।
अब नासा चाहता है कि चांद पर फाइनल लैंडिंग से पहले एक अतिरिक्त मिशन किया जाए। इस मिशन में उन सभी नई तकनीकों और उपकरणों का टेस्ट किया जाएगा, जिनका इस्तेमाल अंतरिक्ष यात्री भविष्य में चांद पर उतरने के लिए करेंगे।
कौन हैं आर्टेमिस 3 के यात्री?
जून 2026 में नासा ने इस मिशन के लिए चार अंतरिक्ष यात्रियों के नामों की घोषणा की। यह मिशन कम से कम 2027 के अंत तक लॉन्च होगा, जिससे इस टीम को एक साथ ट्रेनिंग करने के लिए लगभग 18 महीने का समय मिलेगा।
| अंतरिक्ष यात्री | अंतरिक्ष एजेंसी |
| आंद्रे डगलस | नासा |
| रैंडी ब्रेसनिक | नासा |
| फ्रैंक रुबियो | नासा |
| लुका पर्मिटानो | यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी |
SpaceX और Blue Origin की तकनीक का भी होगा परीक्षण
नासा ने चंद्रमा पर उतरने के लिए स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन दोनों कंपनियों के साथ साझेदारी की है। हालांकि अभी तक इन दोनों कंपनियों के लूनर लैंडर चंद्रमा पर सफलतापूर्वक नहीं उतरे हैं।
आर्टेमिस 3 मिशन में ओरियन कैप्सूल और संभावित लूनर लैंडर सिस्टम्स के बीच समन्वय और इंटरफेस की जांच की जाएगी। नासा का मानना है कि किसी भी तकनीक की सबसे बड़ी परीक्षा वास्तविक अंतरिक्ष मिशन में ही होती है।
ऑल-मेल क्रू को लेकर विवाद
आर्टेमिस कार्यक्रम की शुरुआत के समय नासा ने कहा था कि वह चंद्रमा पर पहली महिला को भेजेगा। लेकिन हाल ही में घोषित आर्टेमिस 3 क्रू में चारों सदस्य पुरुष हैं। इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाए। आलोचकों का कहना है कि नासा अपने शुरुआती वादे से पीछे हटता नजर आ रहा है।
विवाद बढ़ने के बाद नासा प्रमुख जारेड आइजैकमैन को सार्वजनिक रूप से सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि क्रू का चयन पूरी तरह योग्यता और मिशन की जरूरतों के आधार पर किया गया है और इस प्रक्रिया में किसी राजनीतिक हस्तक्षेप की भूमिका नहीं रही।
2027 से पहले लॉन्च की उम्मीद नहीं
नासा के मौजूदा कार्यक्रम के अनुसार आर्टेमिस 3 मिशन का प्रक्षेपण 2027 के अंत से पहले होने की संभावना नहीं है। इससे चयनित अंतरिक्ष यात्रियों को लगभग 18 महीने का संयुक्त प्रशिक्षण समय मिलेगा।
नासा का कहना है कि चंद्रमा पर मानव मिशन दोबारा शुरू करना आसान नहीं है, क्योंकि आखिरी बार इंसान 1972 में अपोलो 17 मिशन के दौरान चंद्रमा पर गया था। ऐसे में एजेंसी किसी भी तरह का जोखिम लेने के बजाय धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ना चाहती है।
हीट शील्ड और लैंडर की टेस्टिंग
आर्टेमिस प्रोग्राम में हो रही देरी का सबसे बड़ा कारण इंजीनियरिंग से जुड़ी चुनौतियां हैं।
- हीट शील्ड की समस्या: आर्टेमिस 1 के दौरान स्पेसक्राफ्ट की हीट शील्ड को उम्मीद से ज्यादा नुकसान पहुंचा था। जब स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष से पृथ्वी के वायुमंडल में वापस आता है, तो तापमान 2,760 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। नासा इसके लिए Avcoat नाम के खास मटीरियल का इस्तेमाल करता है जो जलकर खत्म होता रहता है और अंदर बैठे क्रू को भयंकर गर्मी से बचाता है। इंसान की सुरक्षा के लिए इस हीट शील्ड का परफेक्ट होना सबसे जरूरी है।
- लूनर लैंडर की टेस्टिंग: नासा ने चांद पर उतरने वाले लैंडर बनाने का कॉन्ट्रैक्ट स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन को दिया है। इन दोनों कंपनियों के लैंडर्स ने अभी तक चांद पर लैंडिंग नहीं की है। आर्टेमिस 3 मिशन के दौरान अंतरिक्ष में ओरियन कैप्सूल और इन लैंडर्स के बीच के कनेक्शन की टेस्टिंग की जाएगी।
क्रू सिलेक्शन पर क्यों हो रहा है विवाद?
जब 2019 में आर्टेमिस प्रोग्राम शुरू हुआ था, तो नासा का सबसे बड़ा नारा था कि वे चांद पर अगले आदमी और पहली महिला को उतारेंगे। लेकिन, आर्टेमिस 3 के लिए चुनी गई टीम में चारों सदस्य पुरुष हैं। इस फैसले के कारण सोशल मीडिया पर नासा की काफी आलोचना हो रही है।
विवाद इतना बढ़ गया कि नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमैन को इंटरनेट पर सफाई देनी पड़ी कि इस चुनाव में कोई राजनीतिक दबाव नहीं था। हैरानी की बात यह है कि अब नासा की आधिकारिक आर्टेमिस वेबसाइट से पहली महिला को चांद पर भेजने का जिक्र हटा दिया गया है।