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Ban On AI: सोशल मीडिया के बाद अब बच्चों के लिए AI पर भी बैन, जानिए किस देश ने उठाया यह सख्त कदम

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitish Kumar Updated Tue, 23 Jun 2026 09:01 AM IST
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सार

क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बच्चों का दिमाग कमजोर कर रहा है? इस खतरे को भांपते हुए दुनिया में पहली बार स्कूलों में एआई टूल्स पर बैन लगा दिया गया है। नॉर्वे ने कक्षा सात तक के बच्चों के लिए इसे पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। जानिए आखिर क्यों सरकार को उठाना पड़ा यह कड़ा कदम।

norway bans generative ai tools for children under 13 in schools
नॉर्वे ने बच्चों के लिए एआई किया बैन - फोटो : अमर उजाला (एआई जनरेटेड)
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विस्तार

क्या AI बच्चों की पढ़ाई को आसान बना रहा है या उनकी सीखने की क्षमता को कमजोर? दुनिया भर में इस बहस के बीच नॉर्वे ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने शिक्षा और तकनीक की दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। देश ने पहली बार स्कूलों में छोटे बच्चों के लिए जनरेटिव AI टूल्स के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।


नॉर्वे सरकार ने घोषणा की है कि पहली से सातवीं कक्षा तक के छात्रों को स्कूलों में जनरेटिव AI टूल्स की पहुंच नहीं दी जाएगी। आमतौर पर इस आयु वर्ग में 13 साल तक के बच्चे शामिल होते हैं। नया नियम इसी साल सितंबर से लागू हो जाएगा।
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यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई देश बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर सख्त रुख अपना रहे हैं। इससे पहले इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी प्रतिबंध लगाने या कड़े नियम लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं।
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आखिर AI पर बैन लगाने की जरूरत क्यों पड़ी?

  • नॉर्वे सरकार का मानना है कि बच्चों की बुनियादी सीखने की क्षमता को बचाना सबसे जरूरी है। सरकार इस बात से इनकार नहीं करती कि कुछ खास मामलों में एआई पढ़ाई में मददगार साबित हो सकता है, लेकिन शुरुआती कक्षाओं में बच्चों को इसके बिना ही पढ़ना, लिखना और गणित के सवाल हल करना सीखना चाहिए।
  • कई शोधों में यह बात सामने आई है कि अगर बच्चे स्कूल में एआई का आंख मूंदकर इस्तेमाल करते हैं, तो वे सीखने के महत्वपूर्ण चरणों से चूक सकते हैं। इसके अलावा, छोटे बच्चों में इतनी समझ या आलोचनात्मक सोच (क्रिटिकल थिंकिंग) विकसित नहीं होती कि वे इन एडवांस टूल्स का जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल कर सकें।

बड़े बच्चों के लिए भी लागू होंगी कुछ शर्तें

  • नॉर्वे सरकार का यह नया नियम केवल 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सख्त है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इससे बड़े छात्रों को पूरी छूट मिल जाएगी। 13 साल से अधिक उम्र के बच्चे एआई टूल्स का इस्तेमाल तो कर सकेंगे, लेकिन उनके उपयोग पर स्कूल प्रशासन की कड़ी नजर रहेगी। इसके साथ ही, शिक्षकों को भी एआई के सही और संतुलित इस्तेमाल को लेकर विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे बच्चों का सही मार्गदर्शन कर सकें।
  • गौरतलब है कि नॉर्वे के स्कूलों में मोबाइल फोन ले जाने पर पहले से ही पाबंदी है। अब एआई पर बैन लगाने के बाद, वहां की सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को भी पूरी तरह बंद करने की योजना बना रही है।

कनाडा भी उठा सकता है ऐसा कदम

नॉर्वे की इस पहल का असर दुनिया के अन्य देशों में भी देखने को मिल रहा है। नॉर्वे की तर्ज पर अब कनाडा भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया और एआई चैटबॉट्स पर कड़ा प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए कनाडाई सरकार जल्द ही एक नया कानून लाने वाली है। सरकार का तर्क है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और एआई चैटबॉट्स को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि यूजर्स हर समय उनसे जुड़े रहें। छोटे बच्चों को लगातार स्क्रीन से बांधे रखने वाली यह आदत उनकी मानसिक सेहत पर बहुत बुरा असर डालती है, जिसे रोकना समय की सबसे बड़ी मांग है।
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