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AI Impact Summit 2026: कृषि और मातृभाषा शिक्षा में AI विस्तार पर पीएम मोदी ने स्टार्टअप्स से किया संवाद
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Fri, 20 Feb 2026 01:33 PM IST
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सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने AI और डीप-टेक स्टार्टअप्स के CEOs के साथ बैठक कर कृषि, पर्यावरण संरक्षण और मातृभाषा में उच्च शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर चर्चा की। उन्होंने मजबूत डेटा गवर्नेंस और भारतीय जरूरतों के मुताबिक समाधान विकसित करने पर जोर दिया।
पीएम नरेन्द्र मोदी
- फोटो : ANI
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विस्तार
पीएम नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में AI और डीप-टेक क्षेत्र से जुड़े 16 स्टार्टअप्स के सीईओ और संस्थापकों के साथ राउंडटेबल चर्चा की। इस दौरान स्टार्टअप्स ने अपने इनोवेटिव आइडियाज और चल रहे प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किए। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के बयान के अनुसार, बैठक का फोकस भारत की जरूरतों के अनुरूप AI आधारित समाधान विकसित करने पर था।
कृषि और पर्यावरण में AI की बड़ी भूमिका
प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में AI के इस्तेमाल पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि फसल उत्पादकता की निगरानी, उर्वरकों के सही उपयोग और मिट्टी की सेहत बचाने में AI अहम भूमिका निभा सकता है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण और जलवायु जोखिम प्रबंधन के लिए जियोस्पेशियल और अंडरवॉटर इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के उपयोग पर भी चर्चा हुई।
मातृभाषा में उच्च शिक्षा के लिए AI टूल्स
मोदी ने भारतीय भाषाओं और संस्कृति को बढ़ावा देने की जरूरत दोहराई। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को मातृभाषा में सुलभ बनाने के लिए AI टूल्स का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि तकनीक के जरिए शिक्षा को अधिक समावेशी बनाया जा सकता है।
डेटा गवर्नेंस और गलत सूचना पर चेतावनी
बैठक में प्रधानमंत्री ने मजबूत डेटा गवर्नेंस की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने AI के माध्यम से फैलने वाली गलत सूचना (मिसइन्फॉर्मेशन) के खतरे को लेकर भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए।
UPI का उदाहरण, घरेलू उत्पादों पर भरोसा
मोदी ने नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा संचालित UPI मॉडल का उल्लेख करते हुए इसे सरल और स्केलेबल डिजिटल इनोवेशन का उदाहरण बताया। उन्होंने भारतीय कंपनियों पर भरोसा जताया और घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की। साथ ही अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने और स्टार्टअप्स में निवेशकों की बढ़ती रुचि का भी जिक्र किया।
हेल्थकेयर से साइबर सिक्योरिटी तक AI का विस्तार
पीएमओ के अनुसार, स्टार्टअप्स हेल्थकेयर में एडवांस डायग्नोस्टिक्स, जीन थेरेपी और मरीजों के रिकॉर्ड मैनेजमेंट में AI का उपयोग कर रहे हैं, ताकि अंतिम छोर तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें। इसके अलावा समूह में साइबर सिक्योरिटी, एथिकल AI, स्पेस टेक्नोलॉजी, स्थानीय भाषाओं में न्याय और शिक्षा की पहुंच बढ़ाने तथा एंटरप्राइज सिस्टम्स के आधुनिकीकरण पर काम करने वाले वेंचर्स भी शामिल थे। बयान में कहा गया कि यह इकोसिस्टम स्थानीय जरूरतों को पूरा करते हुए वैश्विक नेतृत्व की दिशा में बढ़ रहा है।
स्टार्टअप्स ने की भारत की सराहना
AI स्टार्टअप्स ने भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता इकोसिस्टम को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि AI सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है और इसमें अपार संभावनाएं हैं। उनका मानना है कि वैश्विक स्तर पर AI इनोवेशन और तैनाती का केंद्र अब तेजी से भारत की ओर शिफ्ट हो रहा है। प्रतिभागियों ने AI Impact Summit को भी वैश्विक AI विमर्श में भारत की बढ़ती भूमिका का प्रतीक बताया।
बैठक में शामिल प्रमुख स्टार्टअप्स
बैठक में एब्रिड, अदालत एआई, ब्रेनसाइट एआई, क्रेडो एआई, एका केयर, ग्लीन, इनोगल, इनवीडियो, मीको, ओरिजिन, प्रोफेज, रैसन, रूबरिक, सैटस्योर, सुपरनोवा और सायफा एआई के सीईओ और संस्थापक शामिल हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री के साथ प्रधान सचिव पी. के. मिश्रा, प्रधान सचिव-2 शाक्तिकांत दास और केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी मौजूद रहे।
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कृषि और पर्यावरण में AI की बड़ी भूमिका
प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में AI के इस्तेमाल पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि फसल उत्पादकता की निगरानी, उर्वरकों के सही उपयोग और मिट्टी की सेहत बचाने में AI अहम भूमिका निभा सकता है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण और जलवायु जोखिम प्रबंधन के लिए जियोस्पेशियल और अंडरवॉटर इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के उपयोग पर भी चर्चा हुई।
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मातृभाषा में उच्च शिक्षा के लिए AI टूल्स
मोदी ने भारतीय भाषाओं और संस्कृति को बढ़ावा देने की जरूरत दोहराई। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को मातृभाषा में सुलभ बनाने के लिए AI टूल्स का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि तकनीक के जरिए शिक्षा को अधिक समावेशी बनाया जा सकता है।
डेटा गवर्नेंस और गलत सूचना पर चेतावनी
बैठक में प्रधानमंत्री ने मजबूत डेटा गवर्नेंस की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने AI के माध्यम से फैलने वाली गलत सूचना (मिसइन्फॉर्मेशन) के खतरे को लेकर भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए।
UPI का उदाहरण, घरेलू उत्पादों पर भरोसा
मोदी ने नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा संचालित UPI मॉडल का उल्लेख करते हुए इसे सरल और स्केलेबल डिजिटल इनोवेशन का उदाहरण बताया। उन्होंने भारतीय कंपनियों पर भरोसा जताया और घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की। साथ ही अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने और स्टार्टअप्स में निवेशकों की बढ़ती रुचि का भी जिक्र किया।
हेल्थकेयर से साइबर सिक्योरिटी तक AI का विस्तार
पीएमओ के अनुसार, स्टार्टअप्स हेल्थकेयर में एडवांस डायग्नोस्टिक्स, जीन थेरेपी और मरीजों के रिकॉर्ड मैनेजमेंट में AI का उपयोग कर रहे हैं, ताकि अंतिम छोर तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें। इसके अलावा समूह में साइबर सिक्योरिटी, एथिकल AI, स्पेस टेक्नोलॉजी, स्थानीय भाषाओं में न्याय और शिक्षा की पहुंच बढ़ाने तथा एंटरप्राइज सिस्टम्स के आधुनिकीकरण पर काम करने वाले वेंचर्स भी शामिल थे। बयान में कहा गया कि यह इकोसिस्टम स्थानीय जरूरतों को पूरा करते हुए वैश्विक नेतृत्व की दिशा में बढ़ रहा है।
स्टार्टअप्स ने की भारत की सराहना
AI स्टार्टअप्स ने भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता इकोसिस्टम को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि AI सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है और इसमें अपार संभावनाएं हैं। उनका मानना है कि वैश्विक स्तर पर AI इनोवेशन और तैनाती का केंद्र अब तेजी से भारत की ओर शिफ्ट हो रहा है। प्रतिभागियों ने AI Impact Summit को भी वैश्विक AI विमर्श में भारत की बढ़ती भूमिका का प्रतीक बताया।
बैठक में शामिल प्रमुख स्टार्टअप्स
बैठक में एब्रिड, अदालत एआई, ब्रेनसाइट एआई, क्रेडो एआई, एका केयर, ग्लीन, इनोगल, इनवीडियो, मीको, ओरिजिन, प्रोफेज, रैसन, रूबरिक, सैटस्योर, सुपरनोवा और सायफा एआई के सीईओ और संस्थापक शामिल हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री के साथ प्रधान सचिव पी. के. मिश्रा, प्रधान सचिव-2 शाक्तिकांत दास और केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी मौजूद रहे।