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'एआई और बायोलॉजी का मेल बनेगा हेल्थकेयर की नई संजीवनी': एआई समिट में बोलीं किरण मजूमदार-शॉ
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Fri, 20 Feb 2026 02:41 PM IST
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सार
बायोकॉन की चेयरपर्सन किरण मजूमदार-शॉ ने कहा है कि एआई और बायोलॉजिकल इंटेलिजेंस का मेल मेडिकल साइंस की दुनिया बदल देगा। इससे न केवल कैंसर जैसी बीमारियों का सटीक इलाज संभव होगा, बल्कि भारत अपनी डिजिटल शक्ति के दम पर इस बदलाव का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
एआई शिखर सम्मेलन
- फोटो : ANI
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विस्तार
शुक्रवार को आयोजित 'एआई इम्पैक्ट समिट' में बायोकॉन की मुखिया किरण मजूमदार-शॉ ने भविष्य की एक बेहद उत्साहजनक तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा जगत में अब एक ऐसा दौर आने वाला है जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बायोलॉजिकल इंटेलिजेंस (इंसानी शरीर की समझ) एक साथ मिलकर काम करेंगे। उनका मानना है कि यह मिलाप 'प्रेडिक्टिव हेल्थकेयर' यानी बीमारी होने से पहले पहचान और शरीर के अंगों को दोबारा ठीक करने वाली 'रीजेनरेटिव साइंस' में बड़ी कामयाबी दिलाएगा।
किरण मजूमदार-शॉ ने एक बहुत ही दिलचस्प बात कही। उन्होंने बताया कि हमारे शरीर का बायोलॉजिकल सिस्टम किसी 'डाटा सेंटर' की तरह काम करता है, जो बहुत कम ऊर्जा (एनर्जी) खर्च करके बड़ी से बड़ी जानकारी प्रोसेस कर लेता है। वहीं, आज के एआई सिस्टम को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, "बायोलॉजी एआई को सिखा सकती है कि कैसे कम ऊर्जा में, तेजी से और कई तरह के डेटा को एक साथ हैंडल किया जाता है।"
कैंसर के इलाज में सबसे अनोखी खोज
चिकित्सा विज्ञान में कोशिकाओं की प्रोग्रामिंग बदलना हमेशा से वैज्ञानिकों का सबसे बड़ा सपना रहा है। मजूमदार-शॉ ने इसे चिकित्सा की 'होली ग्रिल' (सबसे अनमोल खोज) बताया। उन्होंने कहा कि एआई की मदद से हम भविष्य में कैंसर वाली खतरनाक कोशिकाओं को स्वस्थ कोशिकाओं में बदल सकेंगे। इससे इलाज का तरीका अस्पतालों से हटकर समाज और घरों तक पहुंच जाएगा, जहां बीमारी होने से पहले ही उसे रोका जा सकेगा।
डीएनए (DNA) में छिपा है ज्ञान का भंडार
उन्होंने प्रवासी पक्षियों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे उनके डीएनए में पीढ़ी दर पीढ़ी सीखने की क्षमता होती है, जिससे वे बिना किसी नक्शे के मीलों का सफर तय करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिना एआई के हम बायोलॉजी की इन गहरी परतों को कभी नहीं समझ सकते।
भारत के पास है 'जीत का फॉर्मूला'
भारत की ताकत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश अपनी जानकारी साझा करने में कतराते हैं, लेकिन भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) पूरी तरह खुला और मजबूत है।
उन्होंने कहा, "भारत के पास ओपन नेटवर्क और डेटा का बड़ा भंडार है। अगर हम बड़े पैमाने पर डेटा का सही इस्तेमाल करें, तो भारत हेल्थकेयर के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर सकता है।"
अंत में उन्होंने भरोसा जताया कि एआई और बायोलॉजी का यह जुड़ाव दुनिया के लिए एक शक्तिशाली बदलाव साबित होगा और भारत इस बदलाव का केंद्र बनेगा।
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किरण मजूमदार-शॉ ने एक बहुत ही दिलचस्प बात कही। उन्होंने बताया कि हमारे शरीर का बायोलॉजिकल सिस्टम किसी 'डाटा सेंटर' की तरह काम करता है, जो बहुत कम ऊर्जा (एनर्जी) खर्च करके बड़ी से बड़ी जानकारी प्रोसेस कर लेता है। वहीं, आज के एआई सिस्टम को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, "बायोलॉजी एआई को सिखा सकती है कि कैसे कम ऊर्जा में, तेजी से और कई तरह के डेटा को एक साथ हैंडल किया जाता है।"
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कैंसर के इलाज में सबसे अनोखी खोज
चिकित्सा विज्ञान में कोशिकाओं की प्रोग्रामिंग बदलना हमेशा से वैज्ञानिकों का सबसे बड़ा सपना रहा है। मजूमदार-शॉ ने इसे चिकित्सा की 'होली ग्रिल' (सबसे अनमोल खोज) बताया। उन्होंने कहा कि एआई की मदद से हम भविष्य में कैंसर वाली खतरनाक कोशिकाओं को स्वस्थ कोशिकाओं में बदल सकेंगे। इससे इलाज का तरीका अस्पतालों से हटकर समाज और घरों तक पहुंच जाएगा, जहां बीमारी होने से पहले ही उसे रोका जा सकेगा।
डीएनए (DNA) में छिपा है ज्ञान का भंडार
उन्होंने प्रवासी पक्षियों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे उनके डीएनए में पीढ़ी दर पीढ़ी सीखने की क्षमता होती है, जिससे वे बिना किसी नक्शे के मीलों का सफर तय करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिना एआई के हम बायोलॉजी की इन गहरी परतों को कभी नहीं समझ सकते।
भारत के पास है 'जीत का फॉर्मूला'
भारत की ताकत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश अपनी जानकारी साझा करने में कतराते हैं, लेकिन भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) पूरी तरह खुला और मजबूत है।
उन्होंने कहा, "भारत के पास ओपन नेटवर्क और डेटा का बड़ा भंडार है। अगर हम बड़े पैमाने पर डेटा का सही इस्तेमाल करें, तो भारत हेल्थकेयर के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर सकता है।"
अंत में उन्होंने भरोसा जताया कि एआई और बायोलॉजी का यह जुड़ाव दुनिया के लिए एक शक्तिशाली बदलाव साबित होगा और भारत इस बदलाव का केंद्र बनेगा।