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पलक झपकते ही खाली हो जाएगा बैंक अकाउंट: शिकायत के लिए गूगल पर खोजते हैं कस्टमर केयर नंबर? तो हो जाएं सावधान!
Wed, 21 Oct 2026 03:16 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Wed, 21 Oct 2026 03:16 PM IST
सार
गूगल पर कस्टमर केयर नंबर खोजना साइबर ठगी की वजह बन सकता है। महाराष्ट्र के नालासोपारा में स्विगी इंस्टामार्ट के एक ग्राहक ने एक्सपायर्ड प्रोडक्ट की शिकायत के लिए ऑनलाइन नंबर खोजा। आरोप है कि फर्जी एजेंट ने व्हाट्सएप पर APK फाइल डाउनलोड कराई, जिसके बाद खाते से 34,000 रुपये निकल गए। जानिए ऐसी ठगी से कैसे बचें।
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गूगल पर हेल्पलाइन नंबर ढूंढना पड़ सकता है भारी।
- फोटो : एआई
विस्तार
आजकल हम किसी भी छोटी-बड़ी समस्या के समाधान के लिए सीधे गूगल (Google) का रुख करते हैं। ऑनलाइन शॉपिंग या ग्रॉसरी ऑर्डर में कोई गड़बड़ी होने पर भी हमारी पहली प्रतिक्रिया इंटरनेट पर 'कस्टमर केयर नंबर' खोजने की होती है। लेकिन आपकी यह आदत आपको कंगाल बना सकती है। महाराष्ट्र के नालासोपारा से साइबर ठगी का एक ऐसा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां Swiggy Instamart के एक ग्राहक को 34,000 रुपये का चूना लग गया।
एक्सपायर सामान की शिकायत करना पड़ा महंगा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नालासोपारा के रहने वाले एक व्यक्ति ने स्विगी इंस्टामार्ट से ग्रॉसरी का सामान मंगाया था। डिलीवरी के बाद जब उन्होंने चेक किया, तो Kellogg’s Choco का पैकेट एक्सपायर हो चुका था। इसकी शिकायत दर्ज कराने के लिए उन्होंने गूगल पर स्विगी का कस्टमर केयर नंबर सर्च किया।
सर्च रिजल्ट में मिले एक नंबर पर उन्होंने कॉल कर दी, जो असल में साइबर ठगों का था। कॉल उठाने वाले फर्जी एग्जीक्यूटिव ने बड़ी ही चालाकी से ग्राहक को WhatsApp पर चैट करने के लिए राजी कर लिया। बातचीत के दौरान ठग ने समस्या सुलझाने के नाम पर ग्राहक को एक APK फाइल भेजी और उसे डाउनलोड करने को कहा। जैसे ही ग्राहक ने उस फाइल को अपने फोन में इंस्टॉल किया, उसके बैंक अकाउंट से दो बार में 34,000 रुपये कट गए।
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APK फाइल के झांसे में फंसते हैं लोग
APK एंड्रॉयड फोन में एप इंस्टॉल करने के लिए इस्तेमाल होने वाली फाइल होती है। आमतौर पर एप Google Play Store जैसे आधिकारिक प्लेटफॉर्म से डाउनलोड किए जाते हैं। लेकिन जब कोई अनजान व्यक्ति WhatsApp या दूसरे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर APK भेजकर उसे इंस्टॉल करने को कहता है, तो सावधान हो जाना चाहिए।
ऐसी फाइल में नुकसान पहुंचाने वाला सॉफ्टवेयर हो सकता है। उसे इंस्टॉल करने और जरूरी परमिशन देने पर फोन में मौजूद डेटा, मैसेज या अन्य संवेदनशील जानकारी जोखिम में पड़ सकती है। कुछ परिस्थितियों में ठग इस तरह के सॉफ्टवेयर या दूसरे तरीकों का इस्तेमाल करके वित्तीय धोखाधड़ी की कोशिश कर सकते हैं।
इसलिए कस्टमर केयर के नाम पर कोई व्यक्ति अगर आपको एप इंस्टॉल करने, स्क्रीन शेयर करने या फोन की सेटिंग बदलने के लिए कहता है, तो उसकी बात पर तुरंत भरोसा न करें। शिकायत सुलझाने के लिए अनजान फाइल डाउनलोड करना जरूरी नहीं होना चाहिए।
बिना OTP बताए कैसे हो जाती है ठगी?
अक्सर लोगों को लगता है कि जब तक वे किसी के साथ OTP (वन टाइम पासवर्ड) शेयर नहीं करेंगे, तब तक उनके पैसे सुरक्षित हैं। लेकिन नए दौर की साइबर ठगी में OTP बताने की जरूरत ही नहीं पड़ती। ठग अब स्क्रीन शेयरिंग एप्स या संदिग्ध APK फाइल्स का इस्तेमाल करते हैं। ये खतरनाक एप्स बैकग्राउंड में काम करते हैं और आपके फोन पर आने वाले OTP को खुद ही रीड कर लेते हैं। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति को OTP, UPI PIN, बैंकिंग पासवर्ड, कार्ड नंबर या CVV न बताएं।
क्या सच में Swiggy का कोई कस्टमर केयर नंबर है?
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि फूड डिलीवरी एप Swiggy का कोई भी आधिकारिक कस्टमर केयर फोन नंबर नहीं है। कंपनी अपनी वेबसाइट पर साफ शब्दों में बताती है कि किसी भी तरह की समस्या या रिफंड के लिए ग्राहकों को सिर्फ एप के हेल्प सेक्शन का इस्तेमाल करना चाहिए।
इंटरनेट पर सर्च करने पर जो नंबर सबसे ऊपर दिखते हैं, जरूरी नहीं कि वे असली हों। ठग फर्जी लिस्टिंग के जरिए अपने नंबरों को गूगल सर्च में ऊपर ले आते हैं। ऐसे में नंबर पर कॉल करने से पहले कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या एप पर चेक करना जरूरी है।
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एक्सपायर सामान की शिकायत करना पड़ा महंगा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नालासोपारा के रहने वाले एक व्यक्ति ने स्विगी इंस्टामार्ट से ग्रॉसरी का सामान मंगाया था। डिलीवरी के बाद जब उन्होंने चेक किया, तो Kellogg’s Choco का पैकेट एक्सपायर हो चुका था। इसकी शिकायत दर्ज कराने के लिए उन्होंने गूगल पर स्विगी का कस्टमर केयर नंबर सर्च किया।
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सर्च रिजल्ट में मिले एक नंबर पर उन्होंने कॉल कर दी, जो असल में साइबर ठगों का था। कॉल उठाने वाले फर्जी एग्जीक्यूटिव ने बड़ी ही चालाकी से ग्राहक को WhatsApp पर चैट करने के लिए राजी कर लिया। बातचीत के दौरान ठग ने समस्या सुलझाने के नाम पर ग्राहक को एक APK फाइल भेजी और उसे डाउनलोड करने को कहा। जैसे ही ग्राहक ने उस फाइल को अपने फोन में इंस्टॉल किया, उसके बैंक अकाउंट से दो बार में 34,000 रुपये कट गए।
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APK फाइल के झांसे में फंसते हैं लोग
APK एंड्रॉयड फोन में एप इंस्टॉल करने के लिए इस्तेमाल होने वाली फाइल होती है। आमतौर पर एप Google Play Store जैसे आधिकारिक प्लेटफॉर्म से डाउनलोड किए जाते हैं। लेकिन जब कोई अनजान व्यक्ति WhatsApp या दूसरे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर APK भेजकर उसे इंस्टॉल करने को कहता है, तो सावधान हो जाना चाहिए।
ऐसी फाइल में नुकसान पहुंचाने वाला सॉफ्टवेयर हो सकता है। उसे इंस्टॉल करने और जरूरी परमिशन देने पर फोन में मौजूद डेटा, मैसेज या अन्य संवेदनशील जानकारी जोखिम में पड़ सकती है। कुछ परिस्थितियों में ठग इस तरह के सॉफ्टवेयर या दूसरे तरीकों का इस्तेमाल करके वित्तीय धोखाधड़ी की कोशिश कर सकते हैं।
इसलिए कस्टमर केयर के नाम पर कोई व्यक्ति अगर आपको एप इंस्टॉल करने, स्क्रीन शेयर करने या फोन की सेटिंग बदलने के लिए कहता है, तो उसकी बात पर तुरंत भरोसा न करें। शिकायत सुलझाने के लिए अनजान फाइल डाउनलोड करना जरूरी नहीं होना चाहिए।
बिना OTP बताए कैसे हो जाती है ठगी?
अक्सर लोगों को लगता है कि जब तक वे किसी के साथ OTP (वन टाइम पासवर्ड) शेयर नहीं करेंगे, तब तक उनके पैसे सुरक्षित हैं। लेकिन नए दौर की साइबर ठगी में OTP बताने की जरूरत ही नहीं पड़ती। ठग अब स्क्रीन शेयरिंग एप्स या संदिग्ध APK फाइल्स का इस्तेमाल करते हैं। ये खतरनाक एप्स बैकग्राउंड में काम करते हैं और आपके फोन पर आने वाले OTP को खुद ही रीड कर लेते हैं। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति को OTP, UPI PIN, बैंकिंग पासवर्ड, कार्ड नंबर या CVV न बताएं।
क्या सच में Swiggy का कोई कस्टमर केयर नंबर है?
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि फूड डिलीवरी एप Swiggy का कोई भी आधिकारिक कस्टमर केयर फोन नंबर नहीं है। कंपनी अपनी वेबसाइट पर साफ शब्दों में बताती है कि किसी भी तरह की समस्या या रिफंड के लिए ग्राहकों को सिर्फ एप के हेल्प सेक्शन का इस्तेमाल करना चाहिए।
इंटरनेट पर सर्च करने पर जो नंबर सबसे ऊपर दिखते हैं, जरूरी नहीं कि वे असली हों। ठग फर्जी लिस्टिंग के जरिए अपने नंबरों को गूगल सर्च में ऊपर ले आते हैं। ऐसे में नंबर पर कॉल करने से पहले कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या एप पर चेक करना जरूरी है।