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टीसीएस का नया दांव: 20,000 की छंटनी के बाद कंपनी कर रही 8,900 AI इंजीनियर्स की भर्ती, करोड़ों में है सैलरी

Mon, 13 Jul 2026 10:48 AM IST
नीतीश कुमार टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Mon, 13 Jul 2026 10:48 AM IST
सार

TCS Forward Deployed Engineer: एआई की वजह से आईटी सेक्टर में छंटनी का दौर जारी है, लेकिन टीसीएस (TCS) इसे संकट नहीं बल्कि नए अवसर के रूप में देख रही है। कंपनी अब हजारों फॉर्वर्ड डिप्लॉड इंजीनियर्स (FDE) की भर्ती करने जा रही है, जो ग्राहकों के लिए AI लागू करने का काम करेंगे। जानिए आखिर FDE क्या होते हैं और इनकी इतनी मांग क्यों बढ़ गई है।

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20 हजार कर्मचारियों की छंटनी के बाद कंपनी का बड़ा कदम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने दुनिया भर के आईटी उद्योग की तस्वीर बदल दी है। ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों के नए एआई टूल्स आने के बाद टीसीएस, इनफोसिस और विप्रो जैसी बड़ी भारतीय आईटी कंपनियों पर भी दबाव बढ़ा है। हाल के महीनों में एआई को लेकर निवेशकों की चिंताओं और सॉफ्टवेयर एज-ए-सर्विस (SaaS) सेक्टर में आई सुस्ती का असर इन कंपनियों के कारोबार और शेयरों पर भी देखने को मिला। इसी बीच, करीब 20,000 कर्मचारियों की छंटनी के बाद अब टाटा कंसल्टेंसी सर्विस (TCS) ने एआई पर बड़ा दांव खेला है।
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8,900 सुपर इंजीनियर्स की होगी बहाली
  • इसी विजन के साथ, टीसीएस अब 5,900 से लेकर 8,900 'फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर्स' (एफडीई) की एक विशेष टीम तैयार करने जा रही है। रॉयटर्स से बातचीत में टीसीएस के सीईओ के. कृतिवासन ने बताया कि उनका लक्ष्य है कि कंपनी के कुल कर्मचारियों का कम से कम 1 से 1.5 प्रतिशत हिस्सा एफडीई की भूमिका में हो। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 30 जून 2026 तक टीसीएस के पास वैश्विक स्तर पर 5,93,798 कर्मचारियों का विशाल वर्कफोर्स था।
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  • फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर्स की इस बड़ी भर्ती के अलावा, टीसीएस डेटा सुरक्षा, साइबर सिक्योरिटी और एआई के क्षेत्र में नई कंपनियों के रणनीतिक अधिग्रहण की भी योजना बना रही है।
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क्या करते हैं एफडीई और इनकी मांग क्यों है?
  • फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर्स यानी एफडीई ऐसे इंजीनियर होते हैं जो सीधे क्लाइंट के साथ काम करते हैं और उनके मौजूदा सिस्टम में एआई टूल्स को लागू करने में मदद करते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य किसी कंपनी की जरूरतों के अनुसार एआई मॉडल को उसके सॉफ्टवेयर, डेटा और बिजनेस प्रोसेस के साथ जोड़ना होता है।
  • उदाहरण के तौर पर, यदि कोई बैंक एआई के जरिए अपनी कस्टमर सर्विस बेहतर बनाना चाहता है, तो एफडीई पहले बैंक के मौजूदा सिस्टम और डेटा को समझेगा, फिर उसी के अनुसार एआई मॉडल को इंटीग्रेट करेगा ताकि उसका प्रभावी उपयोग किया जा सके।

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करोड़ों में है सैलरी का पैकेज
इस पद की अहमियत का अंदाजा आप इसकी सैलरी से लगा सकते हैं। अमेरिका में हाल ही में निकली जॉब लिस्टिंग्स के अनुसार, गूगल क्लाउड इन पदों के लिए लगभग $153,000 (करीब 1.46 करोड़ रुपये) से $222,000 (करीब 2.12 करोड़ रुपये) तक की बेसिक सैलरी दे रहा है। वहीं, OpenAI इसी तरह के अमेरिकी पदों के लिए $198,000 (करीब 1.89 करोड़ रुपये) से लेकर $335,000 (करीब 3.2 करोड़ रुपये) तक का भारी-भरकम पैकेज ऑफर कर रहा है।

भारतीय आईटी कंपनियों के लिए क्यों है यह शुभ संकेत?
  • दशकों से टीसीएस जैसी भारतीय कंपनियां विदेशी क्लाइंट्स के सिस्टम में नए टूल्स को सफलतापूर्वक इंटीग्रेट करती आई हैं। ऐसे में एफडीई की बढ़ती मांग इन कंपनियों के लिए एक छिपा हुआ वरदान साबित हो सकती है।
  • सीईओ कृतिवासन ने उस धारणा को सिरे से खारिज कर दिया कि एआई आउटसोर्सिंग मॉडल को तबाह कर देगा। उन्होंने कहा, "एआई सिस्टम को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए ग्राहकों के माहौल की गहरी समझ होना बेहद जरूरी है, और यही वह जगह है जहां हम खुद को दूसरों से अलग साबित करते हैं। यह केवल सस्ती लागत का खेल नहीं है, बल्कि उस बेहतरीन टैलेंट पूल का नतीजा है जिसे हमने वर्षों की मेहनत से तैयार किया है।"

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TCS ने अपने आंतरिक कामकाज को बेहतर बनाने के लिए चैटजीपीटी इंटरप्राइज के उपयोग को लेकर पहले ही OpenAI के साथ एक समझौता किया हुआ है।

इस बदलाव और भविष्य की चिंताओं पर इंफोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणी का बयान भी टीसीएस के कदम से मेल खाता है। उन्होंने हाल ही में यह विश्वास जताते हुए कहा था कि एआई हमारी जैसी कंपनियों की जगह नहीं लेगा। इसके बजाय, यह उन कंपनियों की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा जो तेजी से और एक स्पष्ट उद्देश्य के साथ खुद को इस नई तकनीक के सांचे में ढाल लेंगी।
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