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'AI के लिए चुका रहे दोहरी कीमत': नडेला ने कहा- कंपनियों को मुफ्त में मिल रहा कीमती यूजर डेटा, समाधान भी बताया
Mon, 13 Jul 2026 12:57 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Mon, 13 Jul 2026 12:57 PM IST
सार
माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला ने हाल ही में कहा कि लोग एआई का इस्तेमाल करने के लिए पैसों के साथ-साथ अपना कीमती डेटा भी लुटा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आखिर कैसे कंपनियां भी अनजाने में अपनी खुफिया जानकारी एआई लैब्स को सौंप रही हैं। इसके साथ ही नडेला ने इस समस्या से बचने के लिए 5 अहम सुझाव भी दिए हैं। आइए विस्तार से समझते हैं।
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सत्य नडेला
- फोटो : amarujala.com
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विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने काम करने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। चैटजीपीटी, कोपायलट और दूसरे एआई टूल्स कंपनियों की उत्पादकता बढ़ा रहे हैं, लेकिन माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला का मानना है कि इसके साथ एक ऐसा खतरा भी जुड़ा है, जिस पर अभी तक पर्याप्त चर्चा नहीं हुई। उनका कहना है कि एआई का इस्तेमाल करने वाले लोग और कंपनियां एआई कंपनियों को सिर्फ पैसे ही नहीं, बल्कि अपना सबसे कीमती ज्ञान भी दे रही हैं। इसी समस्या को उन्होंने "रिवर्स इंफॉर्मेंशन पैराडॉक्स" का नाम दिया है।
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क्या है रिवर्स इनफॉर्मेंशन पैराडॉक्स?
- नडेला के अनुसार, आज के दौर में कंपनियां एआई टूल्स का उपयोग करके अनजाने में अपनी ही सबसे बड़ी ताकत यानी अपना 'संस्थागत ज्ञान' एआई लैब्स को सौंप रही हैं।
- नडेला ने नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री केनेथ एरो के मशहूर सिद्धांत 'इंफॉर्मेशन पैराडॉक्स' का हवाला दिया। एरो के मुताबिक, जब कोई विक्रेता अपना ज्ञान बेचता है, तो उसे यह डर सताता है कि कहीं ज्ञान मुफ्त में न चला जाए, क्योंकि खरीदार को उसकी असली कीमत ज्ञान मिलने के बाद ही पता चलती है।
- लेकिन, नडेला का मानना है कि AI के युग में यह समस्या बिल्कुल उल्टी हो गई है। उन्होंने लिखा, "एआई के दौर में, खरीदार (उपयोगकर्ता) जिस टूल को खरीदता है, उसी का इस्तेमाल करने के लिए उसे अपना ज्ञान दांव पर लगाना पड़ता है।" आसान शब्दों में समझें तो, किसी भी एआई टूल से बेहतरीन परिणाम पाने के लिए आपको उसे सटीक जानकारी और प्रॉम्प्ट (Prompts) देने पड़ते हैं, जिससे वह एआई मॉडल खुद सीखता है और अधिक स्मार्ट बन जाता है।
- सत्य नडेला ने कहा कि समय के साथ यह असंतुलन बढ़ता जाता है। AI कंपनी अपने ग्राहकों के बारे में लगातार अधिक जानकारी जुटाती रहती है, जबकि ग्राहक को यह पता ही नहीं चलता कि AI कंपनी उसकी जानकारी से क्या सीख रही है। इसी स्थिति को उन्होंने रिवर्स इनफॉर्मेंशन पैराडॉक्स कहा है।
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AI के इस्तेमाल के लिए दो बार कीमत चुकाते हैं लोग
नडेला के मुताबिक एआई यूजर असल में दो तरह से कीमत चुकाते हैं। पहली बार पैसे देकर और दूसरी बार अपनी संस्थागत या गोपनीय जानकारी साझा करके। उन्होंने कहा कि एआई कंपनियां यूजर्स के प्रॉम्प्ट, डेटा और फीडबैक से लगातार सीखती रहती हैं। दूसरी ओर, वे अपने एआई मॉडल की नकल को सीमित रखती हैं। नडेला ने इसे विडंबना बताया।इस समस्या का समाधान क्या है?
नडेला के अनुसार, कंपनियों को अपने डेटा और एआई से जुड़ी सीख के लिए एक मजबूत ट्रस्ट बाउंडरी बनानी होगी। इसके भीतर संगठन का डेटा, एआई मॉडल के मूल्यांकन, मेमोरी, एडॉप्टेड वेट्स और एआई के साथ हुई बातचीत से बनने वाली जानकारी सुरक्षित रहनी चाहिए। उनकी राय में किसी भी तरह की एआई से उत्पन्न सीख, संगठन की अनुमति के बिना बाहर नहीं जानी चाहिए।एआई के लिए सत्य नडेला के 5 सुझाव
Microsoft CEO ने कंपनियों के लिए पांच अहम सुझाव भी दिए हैं:- पहला- नियंत्रण: कंपनियों के पास एआई मॉडल का मूल्यांकन और अपने डेटा पर पूरा नियंत्रण होना चाहिए।
- दूसरा- अपनी क्षमता विकसित करें: ऐसे निजी एआई लर्निंग एनवायरमेंट तैयार किए जाएं, जहां मॉडल को कंपनी का डेटा बाहर भेजे बिना प्रशिक्षित किया जा सके।
- तीसरा- विकल्प रखें: किसी एक एआई मॉडल पर पूरी तरह निर्भर न रहें। जरूरत के अनुसार अलग-अलग मॉडल का इस्तेमाल करें।
- चौथा- लागत का संतुलन: हर काम के लिए सबसे उपयुक्त और किफायती एआई मॉडल चुनें, ताकि खर्च भी नियंत्रित रहे।
- पांचवां- दीर्घकालिक निवेश: अगर ऊपर दिए गए चारों कदम सही से उठाए जाएं, तो समय के साथ आपका AI निवेश आपको कई गुना होकर वापस मिलेगा।