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सस्ते कॉलिंग प्लान पर घमासान: Jio, Airtel और Vi ने TRAI के प्रस्ताव को ठुकराया, बताई वजह
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Tue, 16 Jun 2026 03:56 PM IST
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सार
टेलीकॉम कंपनियों ने TRAI की ओर से केवल वॉइस और एसएमएस वाले किफायती मोबाइल प्लान शुरू करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। इससे टेलीकॉम कंपनियों और उपभोक्ता संगठनों के बीच बहस छिड़ गई है। जहां Jio, Airtel और Vodafone Idea इसे तकनीकी रूप से अव्यावहारिक और डिजिटल इंडिया के खिलाफ बता रहे हैं, वहीं उपभोक्ता संगठन इसे करोड़ों लोगों के हित में जरूरी कदम मान रहे हैं।
टेलीकॉम कंपनियों ने ट्राई के प्रस्ताव को ठुकराया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हाल ही में TRAI ने टेलीकॉम कंपनियों को ऐसे किफायती प्लान भी पेश करने का सुझाव दिया था जिनमें केवल वॉइस कॉलिंग और SMS की सुविधा हो, जबकि डेटा को अनिवार्य रूप से शामिल न किया जाए। लेकिन देश की तीन बड़ी टेलीकॉम कंपनियों रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया (Vi) ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है।
क्या है TRAI का प्रस्ताव?
कंपनियों ने क्यों जताई आपत्ति?
उपभोक्ता संगठनों का अलग नजरिया
दूसरी ओर, उपभोक्ता अधिकार संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं ने कंपनियों के तर्कों को खारिज किया है। उनका कहना है कि देश के कई आदिवासी, पहाड़ी और दूरदराज क्षेत्रों में डेटा सेवाएं आज भी भरोसेमंद नहीं हैं। इसके बावजूद लोगों को डेटा वाले महंगे रिचार्ज प्लान खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
संगठनों का यह भी दावा है कि शुरुआती प्लान में डेटा की प्रति जीबी लागत काफी अधिक पड़ती है। उपभोक्ता करीब 94 से 99 रुपये प्रति जीबी तक भुगतान करते हैं, जबकि महंगे प्लान में यही लागत काफी कम हो जाती है। अब सभी की नजर TRAI के अंतिम फैसले पर है, क्योंकि इसका असर करोड़ों मोबाइल उपभोक्ताओं और देश के टेलीकॉम बाजार पर पड़ सकता है।
क्या है TRAI का प्रस्ताव?
- दूरसंचार नियामक TRAI ने टेलीकॉम कंपनियों (Jio, Airtel, Vi) को ऐसे सस्ते मोबाइल रिचार्ज प्लान पेश करने का प्रस्ताव दिया है, जिनमें केवल कॉलिंग और SMS की सुविधा हो और इंटरनेट (डेटा) का कोई अतिरिक्त चार्ज शामिल न हो।
- ट्राई का कहना है कि जो उपभोक्ता केवल कॉलिंग और मैसेज इस्तेमाल करते हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से महंगे इंटरनेट (डेटा) वाले बंडल पैक नहीं खरीदने चाहिए।
- प्रस्ताव के तहत, हर उस वैधता अवधि के लिए जो वर्तमान में डेटा-पैक के साथ उपलब्ध है, एक समान 'केवल वॉइस और SMS' वाला विशेष टैरिफ वाउचर (STV) भी पेश किया जाना चाहिए।
- ऐसे प्लान्स की कीमत केवल कॉलिंग और SMS के अनुपात में तय की जानी चाहिए ताकि आम, बुजुर्ग और ग्रामीण ग्राहकों को वित्तीय राहत मिले।
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कंपनियों ने क्यों जताई आपत्ति?
- TRAI की खुली चर्चा के दौरान टेलीकॉम कंपनियों ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था को बरकरार रखा जाना चाहिए। कंपनियों का तर्क है कि 4G/5G नेटवर्क पर वॉइस कॉल इंटरनेट (IP-आधारित) के जरिए काम करती है, इसलिए इसे डेटा से अलग करना तकनीकी रूप से मुश्किल है।
- Jio का कहना है कि केवल Voice और SMS वाले बेहद सस्ते प्लान साइबर अपराधियों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इससे स्पैम कॉल, फर्जी मैसेज और ऑनलाइन धोखाधड़ी की घटनाएं बढ़ने का खतरा है। कंपनी ने यह भी दावा किया कि उसके लगभग 88 प्रतिशत शुरुआती ग्राहक सक्रिय रूप से डेटा सेवाओं का उपयोग करते हैं और वॉइस प्लान की मांग काफी सीमित रही है।
- वहीं Vodafone Idea का कहना है कि यदि डेटा को प्लान से अलग कर दिया जाता है तो ग्राहकों को अनजाने में अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ सकता है। कई एप्स, सॉफ्टवेयर अपडेट और OTP आधारित सेवाएं बैकग्राउंड में डेटा का उपयोग करती हैं, जिससे ग्राहकों पर अप्रत्याशित खर्च बढ़ सकता है।
- Airtel ने भी प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि भारत की डिजिटल सार्वजनिक व्यवस्था मोबाइल डेटा पर आधारित है। ऐसे में केवल वॉइस प्लान को बढ़ावा देना कुछ लोगों को डिजिटल सेवाओं की मुख्यधारा से दूर कर सकता है।
उपभोक्ता संगठनों का अलग नजरिया
दूसरी ओर, उपभोक्ता अधिकार संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं ने कंपनियों के तर्कों को खारिज किया है। उनका कहना है कि देश के कई आदिवासी, पहाड़ी और दूरदराज क्षेत्रों में डेटा सेवाएं आज भी भरोसेमंद नहीं हैं। इसके बावजूद लोगों को डेटा वाले महंगे रिचार्ज प्लान खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
संगठनों का यह भी दावा है कि शुरुआती प्लान में डेटा की प्रति जीबी लागत काफी अधिक पड़ती है। उपभोक्ता करीब 94 से 99 रुपये प्रति जीबी तक भुगतान करते हैं, जबकि महंगे प्लान में यही लागत काफी कम हो जाती है। अब सभी की नजर TRAI के अंतिम फैसले पर है, क्योंकि इसका असर करोड़ों मोबाइल उपभोक्ताओं और देश के टेलीकॉम बाजार पर पड़ सकता है।